वैशाख मास क्यों है सबसे पवित्र? जानें इसकी अद्भुत महिमा

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वैशाख महीने का महत्व (AI Generated Image)

Vaishakh Month: वैशाख मास हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है. इस महीने स्नान, दान और पूजा से अक्षय पुण्य मिलता है. तिल दान और गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है.

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न माधवसमो मासो न कृतेन युगं समम् .
न च वेदसमं शास्त्रं न तीर्थं गंगया समम् ..
(-स्कंद पुराण, वैष्णव खंड)

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Vaishakh Month:  हिंदू धर्म में वैशाख मास को अत्यंत पवित्र और श्रेष्ठ माना गया है. शास्त्रों में कहा गया है—“वैशाख के समान कोई मास नहीं, सतयुग के समान कोई युग नहीं, वेद के समान कोई शास्त्र नहीं और गंगा के समान कोई तीर्थ नहीं.” अपनी इसी विशेषता के कारण इस माह को सभी महीनों में उत्तम स्थान प्राप्त है. मान्यता है कि भगवान विष्णु ने इसी मास में मधु नामक दैत्य का वध किया था, इसलिए इसे ‘माधव मास’ भी कहा जाता है.

 पुराणों में वैशाख मास का महत्व

पुराणों के अनुसार देवर्षि नारद ने राजा अंबरीश को बताया था कि स्वयं ब्रह्मा जी ने वैशाख मास को सभी महीनों में श्रेष्ठ बताया है. इस माह में सभी तीर्थ, देवी-देवता और पवित्र शक्तियां जल में निवास करती हैं. भगवान विष्णु की आज्ञा से ये सभी सूर्योदय से लेकर दिन के एक चौथाई भाग तक मनुष्यों के कल्याण के लिए उपस्थित रहते हैं. ऐसा कहा जाता है कि इस माह में केवल जल का दान करने से ही उतना पुण्य मिलता है, जितना अन्य समय में बड़े-बड़े यज्ञ, दान और तीर्थों के दर्शन से मिलता है.

 स्नान और दान का विशेष महत्व

वैशाख मास में प्रातःकाल स्नान का विशेष महत्व है. पद्म पुराण के अनुसार इस महीने में सूर्योदय से पहले स्नान करना अश्वमेध यज्ञ के समान फलदायी माना गया है. विशेष रूप से वैशाख शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक पांच दिनों का स्नान अत्यंत पुण्यदायी होता है. माना जाता है कि इन पांच दिनों के स्नान से पूरे महीने के साथ-साथ वर्ष भर के धार्मिक कार्यों का फल प्राप्त होता है.

 सात पवित्र नदियों का महत्व

इस मास में सात पवित्र नदियों—गंगा, गोदावरी, यमुना, सरस्वती, कावेरी, नर्मदा और वेणी—में से किसी एक में भी स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. कथाओं के अनुसार राजा महीरथ को केवल वैशाख मास में स्नान करने से ही मोक्ष प्राप्त हो गया था, जो इस माह की महिमा को दर्शाता है.

तिल और दान की परंपरा

वैशाख पूर्णिमा के दिन तिलों की उत्पत्ति मानी जाती है. एक पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु के स्वेद से काले और सफेद तिल उत्पन्न हुए थे. इसलिए इस मास में धार्मिक अनुष्ठानों में तिल का विशेष महत्व है. लक्ष्मी पूजा में सफेद तिल और विष्णु पूजा में काले तिल का प्रयोग किया जाता है. साथ ही जल, छाता, पंखा, चटाई और जूते-चप्पल का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है.

 उज्जैन में कल्पवास का महत्व

जैसे माघ मास में प्रयाग का कल्पवास महत्वपूर्ण होता है, वैसे ही वैशाख मास में उज्जैन में कल्पवास का विशेष महत्व है. चैत्र पूर्णिमा से वैशाख पूर्णिमा तक क्षिप्रा नदी में स्नान और वहां निवास करना अत्यंत फलदायी माना गया है. मान्यता है कि जो व्यक्ति इस अवधि में वहां निवास करता है, वह शिव स्वरूप बन जाता है और उसे विशेष आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है.

इस प्रकार वैशाख मास केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति और पुण्य अर्जन का सर्वोत्तम अवसर माना गया है.

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