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Sindoor Ke Niyam: टीके की तरह सिंदूर लगाने से क्या हो सकते हैं दुष्परिणाम

Updated at : 02 Aug 2025 11:08 AM (IST)
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Sindoor Ke Niyam

Sindoor Ke Niyam in Hindi (PC: Instagram)

Sindoor Ke Niyam: हिंदू परंपरा में विवाहित महिलाओं के लिए सिंदूर का विशेष महत्व है, जिसे मांग में भरना शुभ माना जाता है. लेकिन इसे माथे पर टीके की तरह लगाने को शास्त्रों में अशुभ बताया गया है. जानें, सिंदूर लगाने के सही नियम और गलत तरीके अपनाने से होने वाले संभावित दुष्परिणाम.

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Sindoor Ke Niyam: हिंदू परंपरा में विवाहित महिलाओं के लिए सिंदूर का विशेष स्थान है. यह वैवाहिक सुख, पति की लंबी उम्र और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. सामान्यतः इसे बालों की मांग में भरा जाता है, जो सुहाग की पहचान है. लेकिन आजकल फैशन या अनजाने में कई महिलाएं इसे माथे पर टीके की तरह लगाने लगी हैं, जो शास्त्रों के अनुसार अशुभ माना गया है.

सिंदूर लगाने का सही स्थान और मान्यताएं

मान्यताओं के मुताबिक, सिंदूर हमेशा मांग में ही भरना शुभ होता है. यह स्थान सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि बनाए रखने में सहायक होता है. वहीं, माथे पर टीके के रूप में सिंदूर लगाने से इसका शुभ प्रभाव घट सकता है और कभी-कभी नकारात्मक परिणाम भी मिल सकते हैं. इससे ग्रहों का संतुलन प्रभावित हो सकता है और दांपत्य जीवन में तनाव या मतभेद बढ़ने की आशंका रहती है.

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आयुर्वेदिक दृष्टि से सिंदूर का महत्व

आयुर्वेद के अनुसार भी मांग में सिंदूर भरना ही उचित है, क्योंकि यह स्थान मस्तिष्क के ब्रह्मरंध्र और सहस्रार चक्र से जुड़ा होता है. यहां सिंदूर लगाने से मानसिक शांति और ऊर्जा का प्रवाह बेहतर होता है, जबकि गलत स्थान पर लगाने से यह प्रवाह बाधित हो सकता है.

सिंदूर लगाने का सही समय और विधि

शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि विवाहित महिलाएं सिंदूर हमेशा शुभ मुहूर्त में, घर के मंदिर में भगवान के सामने बैठकर लगाएं. सिंदूर भरते समय मन में सकारात्मक विचार और पति की दीर्घायु की कामना करनी चाहिए.

पारंपरिक तरीके से सिंदूर भरने का लाभ

इसलिए यदि आप फैशन के कारण सिंदूर को टीके के रूप में लगाती हैं, तो यह आदत छोड़कर पारंपरिक तरीके से मांग में भरें. इससे न केवल धार्मिक और ज्योतिषीय लाभ मिलेगा, बल्कि दांपत्य जीवन में सुख और सौभाग्य भी स्थायी रहेगा.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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