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शीतला अष्टमी पर इन चीजों का भोग लगाएं, पाएं देवी मां का आशीर्वाद

Updated at : 22 Mar 2025 8:11 AM (IST)
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Sheetala Ashtami 2025 Bhog

Sheetala Ashtami 2025 Bhog

Sheetala Ashtami 2025 Bhog: हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष शीतला अष्टमी का व्रत 22 मार्च (शनिवार) को मनाया जा रहा है. यह मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन माता शीतला को विशेष भोग अर्पित करता है, उसके घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है. आइए, जानते हैं कि शीतला अष्टमी पर माता शीतला को किस प्रकार का भोग अर्पित करना चाहिए.

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Sheetala Ashtami 2025 Bhog: शीतला अष्टमी का त्योहार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है, जिसे बसोड़ा पर्व के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन माता शीतला की पूजा की जाती है और उन्हें विशेष प्रकार के भोग अर्पित किए जाते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता शीतला को बासी भोजन का भोग अर्पित करने से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और बीमारियों से सुरक्षा मिलती है.

शीतला माता को अर्पित किए जाने वाले प्रमुख भोग

बासी रोटी

शीतला अष्टमी पर ताजा भोजन नहीं बनाया जाता, बल्कि एक दिन पहले से ही खाना तैयार कर लिया जाता है. इस दिन माता को बासी रोटी का भोग अर्पित किया जाता है, जिसे गुड़ या दही के साथ सेवन किया जाता है.

शीतला अष्टमी के पावन अवसर पर सुनें यह व्रत कथा और पाएं सुख-समृद्धि

मीठे चावल

इस दिन मीठे चावल बनाए जाते हैं और उन्हें ठंडा करके माता को अर्पित किया जाता है. इसके लिए चावल को गुड़ या चीनी में पकाया जाता है, जिसमें इलायची, नारियल और सूखे मेवे मिलाए जाते हैं.

कढ़ी और चावल

शीतला माता को बासी कढ़ी-चावल का भोग अर्पित किया जाता है. इसे एक दिन पहले बेसन और दही से तैयार किया जाता है और ठंडा करके अगले दिन माता को समर्पित किया जाता है.

हलवा

इस दिन माता को गेहूं के आटे या सूजी से बना हलवा भी चढ़ाया जाता है. हलवा को घी, चीनी और सूखे मेवों के साथ बनाया जाता है.

पूआ और मालपुआ

गेंहू के आटे या मैदा से बने पूआ या मालपुआ भी माता को अर्पित किए जाते हैं. इन्हें घी में तलकर चीनी की चाशनी में डुबोया जाता है.

दही और बूंदी

शीतला माता को ठंडी चीजें पसंद होती हैं, इसलिए उन्हें दही और बूंदी का भोग अर्पित किया जाता है. यह प्रसाद भक्तों में बांटा जाता है.

सफेद तिल और गुड़ के लड्डू

माता शीतला को सफेद तिल और गुड़ के लड्डू अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है. इसे स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है.

शीतला अष्टमी के अवसर पर व्रत रखकर माता शीतला की पूजा करने से परिवार में सुख और शांति बनी रहती है, साथ ही त्वचा संबंधी रोगों से भी सुरक्षा मिलती है. इस दिन ठंडे भोजन का सेवन करने से माता प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती हैं.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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