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Shardiya Navratri 2025: 29 या 30 सितम्बर, कब है महाष्टमी? यहां देखिए सही तिथि

Updated at : 28 Sep 2025 8:51 AM (IST)
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Mahagauri maa

महागौरी मां

Shardiya Navratri 2025: नवरात्रि का आठवां दिन, जिसे अष्टमी तिथि कहा जाता है, देवी भक्तों के लिए बहुत खास होता है. इस दिन मां महागौरी की आराधना और कन्या पूजन का बड़ा महत्व माना जाता है. श्रद्धालु अष्टमी पर उपवास रखते हैं और कन्याओं को पूजकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. आइए जानते हैं अष्टमी कब पड़ रही है और इस दिन पूजा का सही तरीका क्या है.

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Shardiya Navratri 2025: शास्त्रों के अनुसार अष्टमी के दिन महागौरी की आराधना करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और भक्त को सुख, शांति व सौभाग्य की प्राप्ति होती है. मां महागौरी को शांति और सौम्यता की प्रतीक माना जाता है. उनका वर्ण अत्यंत गोरा है, जो शंख, चंद्रमा और कुंद के पुष्प की तरह उज्ज्वल दिखता है. वे श्वेत वस्त्र और आभूषण धारण करती हैं. मां के चार भुजाएं हैं—ऊपरी दाहिने हाथ में अभय मुद्रा, निचले दाहिने में त्रिशूल, ऊपरी बाएं हाथ में डमरू और निचले बाएं हाथ में वर मुद्रा रहती है. उनका वाहन वृषभ (बैल) है, इसी कारण उन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है.

कब है अष्टमी तिथि

इस साल अष्टमी तिथि 29 सितम्बर को शाम 4:30 बजे से आरंभ होकर 30 सितम्बर को शाम 6:00 बजे तक रहेगी. ऐसे में कन्या पूजन और अष्टमी व्रत का सबसे शुभ समय 30 सितम्बर को माना गया है, इसी दिन पूजा करने से पूर्ण फल की प्राप्ति होती है.

दुर्गा अष्टमी का महत्व

अष्टमी के दिन मां महागौरी की विशेष पूजा की जाती है. वे करुणा, आशीर्वाद और आध्यात्मिक शक्ति की देवी मानी जाती हैं. उनकी आराधना करने से भय और कष्ट दूर होते हैं. मां को अन्नपूर्णा स्वरूप भी कहा गया है, इसलिए इस अवसर पर कन्याओं को भोजन कराकर सम्मानित किया जाता है. माना जाता है कि ऐसा करने से घर-परिवार में कभी अन्न व समृद्धि की कमी नहीं होती.

दुर्गा अष्टमी के दिन ऐसे करें पूजा

अष्टमी के दिन प्रातःकाल स्नान करके पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें. इसके बाद दीप जला कर मां दुर्गा का गंगाजल से अभिषेक करें. मां को अक्षत, सिंदूर और लाल फूल अर्पित करें तथा प्रसाद के रूप में फल और मिठाई चढ़ाकर श्रद्धा भाव से पूजा करें.

कन्या पूजन का महत्व

नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष स्थान है. हालांकि भक्त सभी दिनों में कन्याओं की पूजा कर सकते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग अष्टमी और नवमी को ही यह विधि करते हैं. इस बार शारदीय नवरात्रि में कन्या पूजन 30 सितम्बर को अष्टमी और 1 अक्टूबर को महानवमी के दिन किया जाएगा.

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल मान्यताओं और परंपरागत जानकारियों पर आधारित है. प्रभात खबर किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है.

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JayshreeAnand

लेखक के बारे में

By JayshreeAnand

कहानियों को पढ़ने और लिखने की रुचि ने मुझे पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. सीखने और समझने की इस यात्रा में मैं लगातार नए अनुभवों को अपनाते हुए खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करती हूं. वर्तमान मे मैं धार्मिक और सामाजिक पहलुओं को नजदीक से समझने और लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हूं.

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