सावन शिवरात्रि व्रत कथा: शिकारी ने अनजाने में किया शिव पूजन, बदल गई पूरी जिंदगी
सावन शिवरात्रि व्रत कथा
सावन शिवरात्रि व्रत कथा में शिकारी चित्रभानु की कहानी मिलती है. अनजाने में शिव पूजा, उपवास और बेलपत्र अर्पित करने से उसके जीवन में बड़ा बदलाव आया.
Sawan Shivratri Vrat Katha: सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है. इस पवित्र महीने में पड़ने वाली शिवरात्रि का महत्व और भी बढ़ जाता है. सावन शिवरात्रि सावन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है. इस साल सावन शिवरात्रि का व्रत 10 अगस्त 2026 को रखा जाएगा. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा, व्रत और रात्रि जागरण करने से भक्तों को महादेव की कृपा प्राप्त होती है.
सावन शिवरात्रि पर भक्तों को भगवान शिव का जलाभिषेक करने के साथ व्रत कथा भी सुननी चाहिए. व्रत कथा में एक शिकारी की कहानी आती है, जिसने अनजाने में ही भगवान शिव की पूजा कर ली और उसके जीवन में बड़ा बदलाव आया.
साहूकार के कर्ज में डूबा था चित्रभानु
पौराणिक कथा के अनुसार, चित्रभानु नाम का एक शिकारी जंगल में जानवरों का शिकार करके अपने परिवार का पालन-पोषण करता था. उस पर एक साहूकार का काफी कर्ज था. कर्ज न चुका पाने पर साहूकार ने एक दिन उसे बंदी बना लिया.
संयोग से वह दिन शिवरात्रि का था. बंदी रहते हुए चित्रभानु ने भगवान शिव की महिमा और शिवरात्रि व्रत की कथा सुनी. शाम को साहूकार ने उसे एक दिन में कर्ज चुकाने की शर्त पर छोड़ दिया.
भूखे-प्यासे जंगल में पहुंचा शिकारी
कर्ज चुकाने के लिए चित्रभानु दिनभर बिना कुछ खाए-पिए जंगल में शिकार की तलाश करता रहा. शाम होने पर उसने एक पेड़ पर मचान बनाया. मचान बनाते समय उसके हाथ से बेलपत्र की कुछ पत्तियां नीचे शिवलिंग पर जा गिरीं. इस तरह अनजाने में ही उसकी शिव पूजा शुरू हो गई.
रात में एक गर्भवती मृगी तालाब पर पानी पीने पहुंची. चित्रभानु ने उसे मारने के लिए धनुष उठाया, तभी उसके हाथ के स्पर्श से बेलपत्र और पानी की बूंदें शिवलिंग पर गिर गईं. इस प्रकार उसके प्रथम प्रहर की पूजा भी पूरी हो गई.
मृगियों ने मांगा जीवनदान
मृगी ने शिकारी से कहा कि वह गर्भवती है और बच्चे को जन्म देने के बाद वापस लौट आएगी. उसकी बात सुनकर चित्रभानु ने उसे जाने दिया.
इसके बाद दूसरी मृगी वहां आई. उसने भी अपने पति से मिलने के बाद वापस लौटने का वचन दिया. शिकारी ने उसे भी जाने दिया. कुछ समय बाद एक मृगी अपने बच्चों के साथ वहां पहुंची. उसने बच्चों को उनके पिता के पास छोड़कर वापस आने की बात कही. शिकारी ने उसे भी जीवनदान दे दिया.
इस दौरान पेड़ से बेलपत्र टूट-टूटकर शिवलिंग पर गिरते रहे. इस तरह अनजाने में ही शिकारी की तीसरे प्रहर की पूजा भी पूरी हो गई.
मृग ने भी दिया वचन
सुबह होने से पहले एक मृग वहां आया. उसने बताया कि वह उन तीनों मृगियों का पति है. उसने कहा कि यदि शिकारी ने उन्हें मार दिया है तो उसे भी मार दे, लेकिन अगर उन्हें जीवनदान दिया है तो उसे भी कुछ समय के लिए जाने दे.
शिकारी ने मृग को भी जाने दिया. इस तरह पूरी रात उसका उपवास, जागरण और शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करना अनजाने में ही पूरा हो गया.
शिव भक्ति से बदल गया शिकारी का हृदय
कुछ समय बाद मृग अपनी पत्नियों और बच्चों के साथ शिकारी के सामने वापस लौट आया. पशुओं की सत्यनिष्ठा और प्रेम देखकर चित्रभानु का हृदय बदल गया. उसे अपने पुराने कर्मों पर बहुत पछतावा हुआ और उसकी आंखों से आंसू निकल पड़े.
उसने मृग परिवार को जीवनदान दे दिया और आगे से किसी भी जीव की हत्या न करने का संकल्प लिया. धार्मिक मान्यता के अनुसार, शिवरात्रि के व्रत, उपवास, जागरण और बेलपत्र अर्पित करने के प्रभाव से उसके भीतर की हिंसक प्रवृत्ति समाप्त हो गई.
कथा से मिलती है यह सीख
सावन शिवरात्रि व्रत कथा हमें सिखाती है कि सच्ची भावना और भगवान शिव का स्मरण मनुष्य के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है. यह कथा करुणा, दया, सत्य और अहिंसा का संदेश भी देती है. इसलिए सावन शिवरात्रि पर श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की पूजा करने के साथ इस कथा का श्रवण करना शुभ माना जाता है.
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लेखक के बारे में
By शौर्य पुंज
मैं धर्म, ज्योतिष और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन में विशेषज्ञता रखता हूं. हस्तरेखा शास्त्र, राशिफल, ग्रह-नक्षत्र, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं से जुड़े विषयों पर मेरी विशेष रुचि और गहरी समझ है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष के अलावा एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी लगातार लेखन करता रहा हूं. मेरी कोशिश रहती है कि जटिल विषयों को आसान, रोचक और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाया जाए.
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