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Sawan Putrada Ekadashi 2025: आज रखा जा रहा है पुत्रदा एकादशी का व्रत,जानें पूजा करने का शुभ मुहूर्त व विधि

Updated at : 05 Aug 2025 7:38 AM (IST)
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Sawan Putrada Ekadashi 2025

Sawan Putrada Ekadashi 2025 (PC: X)

Sawan Putrada Ekadashi 2025: सावन पुत्रदा एकादशी 2025 का व्रत आज श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है. यह व्रत संतान सुख, समृद्धि और पारिवारिक खुशहाली की प्राप्ति के लिए विशेष माना जाता है. आइए जानते हैं इसके शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से.

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Sawan Putrada Ekadashi 2025: आज मंगलवार 5अगस्त 2025 को विष्णु भक्त सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत रख जा रहा है. सावन माह में भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. इसी महीने पड़ने वाली पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान सुख, समृद्धि और खुशहाली की प्राप्ति के लिए किया जाता है. सावन के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाने वाली यह एकादशी विशेष रूप से उन दंपतियों के लिए महत्वपूर्ण है, जो संतान की कामना रखते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.

पुत्रदा एकादशी 2025: शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 4 अगस्त 2025 को सुबह 11:41 बजे शुरू होकर 5 अगस्त 2025 को दोपहर 1:12 बजे समाप्त होगी. उदया तिथि के आधार पर श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत 5 अगस्त को रखा जाएगा. व्रत का पारण 6 अगस्त 2025 को सुबह 5:45 से 8:26 बजे के बीच किया जा सकेगा.

क्यों रखते हैं पुत्रदा एकादशी का व्रत? जानिए धार्मिक महत्व

पुत्रदा एकादशी पूजा विधि

पुत्रदा एकादशी के दिन सवेरे स्नान कर स्वच्छ पीले या लाल वस्त्र धारण करें और सबसे पहले सूर्यदेव को जल अर्पित करें. पूजा स्थल पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. भगवान विष्णु और लड्डू गोपाल को दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत से स्नान कराएं. इसके बाद पीले फूल, तुलसी दल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें.

पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें. दिनभर निराहार या फलाहार व्रत रखें और रात में भजन-कीर्तन करें. जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्य सामग्री का दान करें. साथ ही आटे के दीपक बनाकर, उनमें तेल या घी भरकर पीपल या बड़ के पत्ते पर रखकर नदी में प्रवाहित करें.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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