ePaper

Santan Saptami 2024: संतान सप्तमी कल, जानें माताएं क्यों करती हैं इस व्रत का पालन

Updated at : 09 Sep 2024 8:57 AM (IST)
विज्ञापन
Santan Saptami 2024

Santan Saptami 2024

Santan Saptami 2024: संतान सप्तमी का व्रत सबसे खास है. यदि आप संतान की दीर्घायु की कामना करते हैं तो इसके लिए हलषष्ठी का व्रत रखा जाता है. यहां जानें कब रखा जाएगा संतान सप्तमी का व्रत.

विज्ञापन

Santan Saptami 2024: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को संतान सप्तमी का व्रत रखा जाएगा. आपको बता दें महिलाएं अपनी संतान और संतान प्राप्ति के लिए संतान सप्तमी का व्रत रखती हैं. इस दिन भगवान शिव और माँ पार्वती की पूजा की जाती है. आइए जानें कब रखा जाएगा ये व्रत और क्या है शुभ मुहूर्त

Lalita Saptami 2024: कल है ललिता सप्तमी, जानें भगवान कृष्ण से कैसे संबंधित है ये त्योहार

कब रखा जाएगा संतान सप्तमी का व्रत ?

इस साल संतान सप्तमी का व्रत 10 सितंबर मंगलवार को रखा जाएगा.

संतान सप्तमी व्रत का शुभ मुहूर्त क्या है ?

संतान सप्तमी पर सप्तमी तिथि का प्रारंभ 9 सितंबर शाम 5 बजे से शुरू होगा, इसका समापन 10 सितंबर को शाम 5:47 बजे तक होगा.सप्तमी तिथि का सूर्योदय 10 सितंबर को होगा, इसलिए इसी दिन संतान सप्तमी का व्रत किया जाएगा.

संतान सप्तमी का महत्व क्या है ?

संतान सप्तमी 2024 व्रत का बहुत महत्व है क्योंकि यह अपने बच्चों की खुशहाली, सुख, समृद्धि और सफलता को सुरक्षित करने के लिए मनाया जाता है. इसके अलावा, यह वित्तीय चुनौतियों को कम करने में मदद करता है और माता-पिता बनने का एक बेहतरीन साधन है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, संतान सप्तमी 2024 व्रत अपने बच्चों के लिए एक लंबी और समृद्ध जिंदगी सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है, जिससे उन्हें कई तरह की परेशानियों और दुखों से राहत मिलती है.

संतान सप्तमी की पूजा विधि क्या है ?

पूजा विधि की बात करें तो, सुबह स्नान करके अपना दिन शुरू करें. फिर, अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को सुरक्षित करने और किसी भी परेशानी या दुख से राहत पाने के लिए, व्रत रखने का संकल्प लें.

इस खास दिन दोपहर से पहले पूजा पूरी करना बेहद शुभ होता है. संतान सप्तमी के दिन भगवान विष्णु, भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करें. अपने पूजा स्थल पर एक वेदी बनाएं और वहां भगवान शिव और देवी पार्वती की मूर्तियां रखें.

इसके बाद, मूर्तियों का अभिषेक करें और चंदन का लेप लगाएँ. इसके बाद देवताओं को अक्षत (चावल के दाने), नारियल, सुपारी और अन्य पवित्र वस्तुएं अर्पित करें. उनके सामने दीप जलाएं.

अपने बच्चे की सुरक्षा के प्रतीक के रूप में, अपनी प्रतिज्ञा करते समय भगवान शिव को एक पवित्र धागा बांधें. फिर आप इस धागे को अपने बच्चे की कलाई पर बांध सकते हैं.
भोग के लिए, आप खीर और पूरी जैसे व्यंजन शामिल कर सकते हैं और उन्हें देवताओं को अर्पित कर सकते हैं. सुनिश्चित करें कि आप प्रसाद में तुलसी का पत्ता भी शामिल करें.

आरती करके और देवताओं को अपनी इच्छाएँ व्यक्त करके पूजा का समापन करें.
अंत में, पूजा में उपस्थित सभी लोगों के बीच भोग वितरित करें.

विज्ञापन
Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola