संकष्टी चतुर्थी 2026: भगवान गणेश को ‘एकदंत’ क्यों कहा जाता है? जानें रहस्य

भगवान गणेश
Sankashti Chaturthi 2026: भगवान गणेश के अनेक नाम हैं, जिनमें से एक ‘एकदंत’ है. ‘एकदंत’ का अर्थ होता है एक दांत वाला. आइए, पौराणिक कथाओं के माध्यम से जानते हैं कि गणपति बप्पा को यह नाम कैसे मिला.
Sankashti Chaturthi 2026: 5 मई, मंगलवार को देशभर में ‘एकदंत संकष्टी चतुर्थी’ का पावन पर्व मनाया जाएगा. जब यह पर्व मंगलवार के दिन पड़ता है, तो ‘अंगारकी संकष्टी चतुर्थी’ का दुर्लभ संयोग बनता है. इस दिन घरों में धूमधाम से भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है. हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय माना गया है. किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले उनकी आराधना की जाती है. कहा जाता है कि गणपति बप्पा की पूजा से जीवन के सभी दुखों का अंत होता है और सुख-समृद्धि आती है. भगवान गणेश को ‘एकदंत’ क्यों कहा जाता है, इसके पीछे कई रोचक पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं. इनमें से दो प्रमुख कथाओं के बारे में हम इस लेख में चर्चा करेंगे.
पौराणिक कथा
महाभारत लेखन की कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब महर्षि वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत की रचना करने का विचार किया, तो उन्हें एक ऐसे लेखक की आवश्यकता थी, जो बिना रुके उनकी वाणी को लिख सके. इसके लिए भगवान गणेश तैयार हुए, लेकिन उन्होंने शर्त रखी कि एक बार लेखन शुरू होने के बाद कलम नहीं रुकेगी, जब तक काव्य पूरा न हो जाए. लेखन के दौरान अचानक गणेश जी की लेखनी (कलम) टूट गई. समय की पाबंदी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने बिना देर किए अपना एक दांत तोड़ लिया और उसी से महाभारत लिखना जारी रखा. यह घटना उनके त्याग और ज्ञान के प्रति समर्पण का प्रतीक मानी जाती है.
परशुराम जी के साथ युद्ध
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, एक बार भगवान परशुराम, भगवान शिव से मिलने कैलाश पर्वत पहुंचे. उस समय भगवान शिव ध्यान में लीन थे और गणेश जी द्वार पर पहरा दे रहे थे. जब गणेश जी ने परशुराम को अंदर जाने से रोका, तो वे क्रोधित हो गए और अपने फरसे से गणेश जी पर प्रहार कर दिया. चूंकि वह फरसा स्वयं भगवान शिव द्वारा दिया गया था, इसलिए उसका सम्मान करते हुए गणेश जी ने उस वार को अपने दांत पर सहन किया, जिससे उनका एक दांत टूट गया. इसी कारण वे ‘एकदंत’ कहलाए.
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By Neha Kumari
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