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Parivartini Ekadashi 2025: कब है परिवर्तिनी एकादशी, जानें भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के आसान उपाय

Updated at : 02 Sep 2025 9:20 AM (IST)
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Parivartini Ekadashi 2025 Remedies in Hindi

परिवर्तिनी एकादशी पर जरूर करें ये आसान उपाय

Parivartini Ekadashi 2025: भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं. इस वर्ष यह व्रत 3 सितंबर को रखा जाएगा. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु करवट बदलते हैं. व्रत-पूजा और खास उपाय करने से विष्णु-लक्ष्मी की कृपा मिलती है और हर मनोकामना पूरी होती है.

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Parivartini Ekadashi 2025 Remedies: भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है, जब योगनिद्रा में लीन भगवान विष्णु करवट बदलते हैं. इस वर्ष यह शुभ व्रत 3 सितंबर को रखा जाएगा. इसे पद्मा और पार्श्व एकादशी भी कहते हैं. मान्यता है कि इस व्रत से पापों का नाश होता है, मोक्ष की प्राप्ति होती है और किए गए उपाय विवाह, करियर व धन की रुकावटों को दूर करते हैं.

पीपल वृक्ष की पूजा करें

परिवर्तिनी एकादशी के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने से पितृदोष का नाश होता है. जल चढ़ाकर और दीपक जलाकर भगवान विष्णु से आशीर्वाद मांगे.

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तुलसी दल अर्पित करें

विष्णु भगवान को तुलसी अत्यंत प्रिय है. इस दिन तुलसी दल अर्पित करने से घर में सुख-समृद्धि और सौभाग्य बढ़ता है.

दान-पुण्य करें

गरीब और जरूरतमंद को भोजन, वस्त्र या अनाज दान करने से पापों का क्षय होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है.

पीली वस्तु अर्पित करें

भगवान विष्णु को पीला रंग प्रिय है. व्रत और पूजा के समय पीले पुष्प या पीले वस्त्र अर्पित करें. इससे करियर और नौकरी में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं.

मंत्र जप करें

‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करने से मानसिक शांति मिलती है और हर मनोकामना पूरी होती है.

परिवर्तिनी एकादशी शुभ मुहूर्त (Parivartini Ekadashi Shubh Muhurat)

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 03 सितंबर, रात्रि 03:53 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 04 सितंबर, प्रातः 04:21 बजे

परिवर्तिनी एकादशी का महत्व

एकादशी तिथि को भगवान विष्णु के प्रति समर्पित माना जाता है. इस दिन विष्णु भगवान की आराधना और साधना करने से मां लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं और साधक पर अपनी विशेष कृपा बरसाती हैं. उनकी कृपा से जीवन की हर मनोकामना पूर्ण होती है और घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है. इस पावन अवसर पर मंदिरों में लक्ष्मी-नारायण की विशेष पूजा-अर्चना होती है और दान-पुण्य करने का महत्व भी अत्यधिक है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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