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एकादशी के अगले दिन चावल खाना होता है शुभ, जानें धार्मिक दृष्टिकोण

Updated at : 04 Jun 2025 11:18 AM (IST)
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Nirjala Ekadashi 2025 Paaran

Nirjala Ekadashi 2025 Paaran

Nirjala Ekadashi 2025:निर्जला एकादशी को हिंदू धर्म में भगवान विष्णु की आराधना के लिए एक अत्यंत पावन तिथि माना गया है. यह व्रत ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है और इसका विशेष धार्मिक महत्व है. इस दिन श्रद्धालु निर्जल उपवास करते हैं और पूरे समर्पण भाव से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं. ऐसी मान्यता है कि चावल देवी अन्नपूर्णा का प्रतीक होते हैं और यह अन्न भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है. इसी कारण, व्रत के अगले दिन द्वादशी तिथि पर चावल का भोग लगाकर पारण करना अत्यंत शुभ और पुण्यदायक माना जाता है.

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Nirjala Ekadashi 2025: निर्जला एकादशी को हिंदू धर्म में अत्यंत शक्तिशाली और पुण्यदायक माना जाता है. यह तिथि पूरी तरह से भगवान विष्णु की उपासना को समर्पित होती है और भक्त इस दिन निर्जल व्रत रखकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं. इस विशेष अवसर पर भक्त पूजा, प्रार्थना और ध्यान के माध्यम से आध्यात्मिक शांति की कामना करते हैं.

कब है निर्जला एकादशी

द्रिक पंचांग के अनुसार, निर्जला एकादशी हर वर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आती है. इस वर्ष यह पर्व 6 जून 2025 को मनाया जाएगा, जबकि वैष्णव संप्रदाय के भक्त 7 जून 2025 को व्रत रखेंगे.

एकादशी पर क्यों लगाते हैं विष्णु भगवान को खीर का भोग

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का अत्यंत पावन महत्व है. यह उपवास भगवान विष्णु को अर्पित होता है और माना जाता है कि इसका पालन करने से पापों का क्षय होता है और मोक्ष की प्राप्ति संभव होती है. व्रत के दिन अन्न, विशेषकर चावल का सेवन निषेध होता है, लेकिन अगले दिन यानी द्वादशी को व्रत खोलते समय विशेष रूप से चावल खाने की परंपरा है. इस परंपरा के पीछे धार्मिक मान्यता के साथ-साथ आयुर्वेद और तत्वज्ञान के गहरे कारण छिपे हैं.

धार्मिक दृष्टिकोण

भगवान विष्णु का प्रिय अन्न

मान्यता है कि चावल देवी अन्नपूर्णा का प्रतीक है और भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है. इसीलिए द्वादशी को चावल का भोग लगाकर व्रत पारण करना शुभ माना जाता है.

व्रत की पूर्णता का संकेत

द्वादशी पर चावल का सेवन व्रत की पूर्णता और फल प्राप्ति का प्रतीक होता है. इससे व्रती की तपस्या सफल मानी जाती है.

आयुर्वेदिक कारण

पाचन में सहायक

व्रत के दिन हल्का आहार लेने से शरीर का पाचन तंत्र संवेदनशील हो जाता है. ऐसे में चावल जैसा आसानी से पचने वाला अन्न उत्तम माना गया है.

ऊर्जा की पूर्ति

चावल में मौजूद कार्बोहाइड्रेट उपवास के बाद शरीर को त्वरित ऊर्जा प्रदान करता है, जिससे थकान दूर होती है और शरीर पुनः सक्रिय हो जाता है.

तात्त्विक (आध्यात्मिक) आधार

शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा

एकादशी के दिन उपवास कर तन, मन और आत्मा को शुद्ध किया जाता है. द्वादशी पर सात्त्विक अन्न, जैसे चावल का सेवन, शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और मानसिक संतुलन बनाए रखता है.

निष्कर्ष

द्वादशी के दिन चावल खाना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि एक संतुलित सोच का प्रतीक है, जिसमें स्वास्थ्य, आध्यात्मिकता और श्रद्धा तीनों का समावेश है. यह परंपरा शरीर को पोषण, मन को स्थिरता और आत्मा को संतोष प्रदान करती है, इसलिए इसे शास्त्रसम्मत और लाभकारी माना गया है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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