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Navratri 2020: घट स्थापना के लिए 3 मुहूर्त, सर्वार्थसिद्धि और 3 राजयोग में नवरात्र शुरू होना देश के लिए शुभ

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Navratri 2020 : शनिवार यानि आज घट स्थापना के लिए दिनभर में 3 शुभ मुहूर्त हैं.
Navratri 2020 : शनिवार यानि आज घट स्थापना के लिए दिनभर में 3 शुभ मुहूर्त हैं.
Prabhat Khabar

Navratri 2020 Kalash Sthapana Time, Shubh Muhurat, Aaj ka Panchang : 17 अक्टूबर दिन शनिवार यानी आज से शारदीय नवरात्रि शुरू हो रही है, जो 25 अक्टूबर तक रहेगा. शनिवार यानि आज घट स्थापना के लिए दिनभर में 3 शुभ मुहूर्त हैं. नवरात्रि के पहले दिन सर्वार्थसिद्धि योग बन रहा है, जिसका शुभ प्रभाव देशभर में रहेगा.

इस शक्ति पर्व नवरात्रि के दौरान खरीदारी के लिए हर दिन शुभ मुहूर्त रहेगा. साथ ही, महात्मा, सत्कीर्ति और शश नाम के 3 राजयोग में नवरात्र की शुरुआत भी हो रही है. इस बार नवरात्रि में सूर्य, चंद्रमा और शनि से बनने वाले ये शुभ योगों में नवरात्रि कलश स्थापना होना देश के लिए शुभ संकेत हैं.

इस तरह की योजनाओं की शुभ स्थिति से देश में फैली बीमारी से राहत मिलने की संभावना दिख रही है. इसके साथ ही आंतरिक स्तर पर भारत की छवि मजबूत होगी और देश उन्नति करेगा. यह नवरात्र में नवमी तिथि 24 और 25 अक्टूबर, यानी एक दिन है. इसलिए, पंचांग भेद होने के कारण देश के कुछ हिस्सों में दशहरा 25 को, तो कहीं 26 अक्टूबर को मनाया जाएगा.

घट स्थापना के शुभ मुहूर्त

सुबह 8 बजकर 36 मिनट से 10 बजकर 53 मिनट तक. ये वृश्चिक स्थिर लग्न मुहूर्त है. इस दौरान घट स्थापना करने से स्थिर खुशी, समृद्धि और धन लाभ मिलने की मान्यता है.

सुबह 11 बजकर 36 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 तक रहेगा. यह अभिजित मुहूर्त है. माना जाता है कि इस मुहूर्त में घट स्थापना करने से अच्छी सेहत, सौभाग्य और ऐश्वर्य बढ़ता है.

दोपहर 2 बजकर 26 मिनट से शाम 4 बजकर 17 मिनट तक. ये गूंगा है. मान्यता है कि इस लग्न में घट स्थापना करने से चरक्रम बढ़ता है, दुश्मनों पर जीत मिलती है और पश्चात प्रतिफल भी मिलता है.

चौघड़िया अनुसार शुभ मुहूर्त

सुबह 8:00 बजे से 9:30 बजे तक शुभ

दोपहर 12:30 से 2:00 बजे तक चर

दोपहर 2:00 बजे से 3:30 बजे तक लाभ

दोपहर 3:30 से शाम 5:00 बजे तक अमृत

देवी का आगमन-प्रस्थान और शुभ मुहूर्त

कलश स्थापना के लिए मंत्र

सबसे पहले हाथ में गंगाजल लेकर ये मंत्र पढ़ें.

ओम अपवित्रः पवित्रोवा सर्वावस्थां गतोऽपिवा।

यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥

अब जल को खुद पर और पूजन सामग्रियों पर छींट दें. इसके बाद दाएं हाथ में अक्षत, फूल, जल, पान, सिक्का और सुपारी लेकर नवरात्र दुर्गा पूजन का संकल्प लें. तब कलश की स्थापना करें.

इस बार देवी का आगमन घोड़े पर और प्रस्थान भैंसे पर होगा. इसका मिला-जुला फल देश की राजनीतिक स्थिति पर पड़ेगा, जिससे देश के कुछ हिस्सों में बड़े बदलाव हो सकते हैं. वहीं, सिद्ध संक्रांति में नवरात्र शुरू होने से अशुभ फल में कमी आ सकती है. वहीं, नवरात्र में रवियोग, त्रिपुष्कर और सर्वार्थसिद्धि जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं. इनमें से प्रॉपर्टी, व्हीकल और खुशी-सुविधाओं के सामानों की खरीदारी करना शुभ रहेगा.

News posted by : Radheshyam kushwaha

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