मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर करें इस आरती का पाठ

Updated at : 09 Apr 2026 8:36 AM (IST)
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Krishna Jee Ki Aarti

श्रीकृष्ण जी की आरती

Masik Krishna Janmashtami 2026: आज 9 अप्रैल 2026 को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखा जा रहा है. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के मंत्र जाप और आरती से सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है.

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Masik Krishna Janmashtami 2026: पंचांग के अनुसार, हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक जन्माष्टमी मनाई जाती है. आज 9 अप्रैल 2026 को वैशाख मास की कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखा जा रहा है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की पूजा और सेवा के लिए समर्पित होता है. इस बार कई शुभ और दुर्लभ योग बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ गया है.

क्यों खास है आज का दिन?

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन व्रत रखने और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से पूजा करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और नकारात्मकता दूर होती है.विशेष रूप से लड्डू गोपाल की सेवा करने से घर में आनंद और खुशहाली का वास होता है.

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के मंत्र

इस पावन दिन पर भगवान श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है—

  • ॐ कृष्णाय नमः हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे .
  • हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ..
  • ॐ श्री कृष्णः शरणं ममः

श्रीकृष्ण जी की आरती

आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की.
गले में बैजंती माला,बजावै मुरली मधुर बाला.
श्रवण में कुण्डल झलकाला,नंद के आनंद नंदलाला.
गगन सम अंग कांति काली,राधिका चमक रही आली.
लतन में ठाढ़े बनमाली;भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक,
चन्द्र सी झलक;ललित छवि श्यामा प्यारी की.
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की..
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की..
कनकमय मोर मुकुट बिलसै,देवता दरसन को तरसैं.
गगन सों सुमन रासि बरसै;बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग;अतुल रति गोप कुमारी की..
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की..
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की..
जहां ते प्रकट भई गंगा,कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा.
स्मरन ते होत मोह भंगा;बसी सिव सीस, जटा के बीच,
हरै अघ कीच;चरन छवि श्रीबनवारी की..
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की..
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की..
चमकती उज्ज्वल तट रेनू,बज रही वृंदावन बेनू.
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू;हंसत मृदु मंद,चांदनी चंद,
कटत भव फंद;टेर सुन दीन भिखारी की..
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की..
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की..
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की..
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की..
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की..

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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