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Kamika Ekadashi 2025: कब मनाई जाएगी कामिका एकादशी, जानें तिथि और महत्व

Updated at : 17 Jul 2025 8:17 AM (IST)
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Kamika Ekadashi 2025 exact date

Kamika Ekadashi 2025 exact date

Kamika Ekadashi 2025: श्रावण मास की कृष्ण पक्ष एकादशी को मनाई जाने वाली कामिका एकादशी भगवान विष्णु की आराधना का विशेष दिन है. यह व्रत पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति में सहायक माना जाता है. जानें इस व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व.

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Kamika Ekadashi 2025: कामिका एकादशी, श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है. यह पावन व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे करने से मनुष्य को पापों से मुक्ति, मानसिक शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्राप्त होता है. धर्मशास्त्रों के अनुसार, कामिका एकादशी का व्रत करने से अश्वमेध यज्ञ जितना पुण्य फल मिलता है. आइए जानतें हैं सावन में कामिका एकादशी किस दिन पड़ रही है और कामिका एकादशी का व्रत कैसे रखना चाहिए-

सावन में कामिका एकादशी कब है? जानें तिथि और समय

द्रिक पंचांग के अनुसार, श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 20 जुलाई 2025 को दोपहर 12:12 बजे से होगी, और यह तिथि 21 जुलाई 2025 को सुबह 9:38 बजे तक रहेगी. चूंकि एकादशी व्रत हमेशा उदया तिथि के अनुसार रखा जाता है, इसलिए सावन की कामिका एकादशी का व्रत 21 जुलाई 2025 (सोमवार) को रखा जाएगा.

कामिका एकादशी व्रत विधि

  • दशमी तिथि की संध्या को सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य व संयम का संकल्प लें.
  • एकादशी के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
  • घर या मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीप जलाएं.
  • गंगाजल से अभिषेक करें तथा तुलसी दल, पंचामृत, फल-फूल, धूप-दीप आदि अर्पित करें.
  • “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें.
  • पूरे दिन व्रत रखें — यथासंभव निराहार रहें या फलाहार करें.
  • रात्रि में भगवान का भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करें.
  • द्वादशी को ब्राह्मण या जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र व दक्षिणा का दान कर व्रत का पारण करें.

कामिका एकादशी का महत्व

कामिका एकादशी व्रत पितरों की तृप्ति तथा पूर्व जन्मों के पापों की शांति के लिए अत्यंत प्रभावी माना गया है. यह व्रत क्रोध, लोभ, मोह जैसे दोषों को शांत करता है. श्रीकृष्ण ने स्वयं कहा है कि इस दिन व्रत रखने से मनुष्य, देव, असुर और पिशाच सभी को दिव्य गति मिलती है. तुलसी पूजा का इस दिन विशेष महत्व है, जिससे भगवान विष्णु शीघ्र प्रसन्न होते हैं.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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