Janmashtami 2025, Krishna Ji Ki Arti: आरती कुंजबिहारी की … इस जन्माष्टमी ऐसे करें श्री कृष्ण जी की आरती

Janmashtami 2025 Krishna Ji Ki Arti in Hindi (AI Generated Image)
Janmashtami 2025, Krishna Ji Ki Aarti: Aarti Kunj Bihari – भगवान श्रीकृष्ण की आरती, विशेषकर ‘आरती कुंजबिहारी की’, इस पावन दिन का अभिन्न हिस्सा है। Janmashtami 2025 पर भक्त सुबह और शाम कन्हैया की आरती गाकर अपने प्रेम और श्रद्धा को व्यक्त करते हैं। इस जन्माष्टमी, जानें श्रीकृष्ण जी की आरती करने का सही विधि-विधान और उससे मिलने वाले आध्यात्मिक लाभ।
Janmashtami 2025, Puja Krishna Ji Ki Arti: आज, 16 अगस्त शनिवार को पूरे देश में जन्माष्टमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. इस विशेष अवसर पर पांच शुभ योग बन रहे हैं. पूरे दिन बुधादित्य योग रहेगा, जबकि प्रातः से सुबह 7:21 बजे तक वृद्धि योग का संयोग है. इसके बाद दिनभर ध्रुव योग प्रभावी रहेगा. जन्माष्टमी के पावन पर्व पर भगवान श्रीकृष्ण की आरती का विशेष महत्व होता है. मान्यता है कि इस दिन सुबह और शाम पूजा के समय कन्हैया की आरती गाने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. यहां हम आपके लिए जन्माष्टमी पर गाई जाने वाली आरती के बोल प्रस्तुत कर रहे हैं.
श्री कृष्ण जी की आरती
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
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गले में बैजंती माला,
बजावै मुरली मधुर बाला ।
श्रवण में कुण्डल झलकाला,
नंद के आनंद नंदलाला ।
गगन सम अंग कांति काली,
राधिका चमक रही आली ।
लतन में ठाढ़े बनमाली
भ्रमर सी अलक,
कस्तूरी तिलक,
चंद्र सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
कनकमय मोर मुकुट बिलसै,
देवता दरसन को तरसैं ।
गगन सों सुमन रासि बरसै ।
बजे मुरचंग,
मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग,
अतुल रति गोप कुमारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
जहां ते प्रकट भई गंगा,
सकल मन हारिणि श्री गंगा ।
स्मरन ते होत मोह भंगा
बसी शिव सीस,
जटा के बीच,
हरै अघ कीच,
चरन छवि श्रीबनवारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
चमकती उज्ज्वल तट रेनू,
बज रही वृंदावन बेनू ।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू
हंसत मृदु मंद,
चांदनी चंद,
कटत भव फंद,
टेर सुन दीन दुखारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
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लेखक के बारे में
By Shaurya Punj
मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.
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