हिंदू धर्म में महिलाएं पैरों में क्यों लगाती हैं आलता? जानें इसका रहस्य

Published by : Neha Kumari Updated At : 08 Apr 2026 9:00 AM

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पैरों में आलता लगाती हुई महिला (एआई तस्वीर)

Hindu Tradition: पैरों में लगाया जाने वाला आलता सिर्फ एक पारंपरिक सजावट नहीं, बल्कि आस्था और संस्कृति से जुड़ी खास पहचान है. शादियों और त्योहारों में महिलाएं इसे अपने पैरों पर सजाती हैं. मान्यता है कि यह समृद्धि, शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देता है.

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Hindu Tradition: भारत अपनी विविध परंपराओं और रीति-रिवाजों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. इन्हीं परंपराओं में से एक है महिलाओं द्वारा पैरों में आलता यानी महावर लगाना. अक्सर हम शादियों, पूजा-पाठ या शास्त्रीय नृत्य के दौरान महिलाओं के पैरों पर लाल रंग की रेखाएं देखते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह केवल सौंदर्य बढ़ाने का साधन नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरे धार्मिक और वैज्ञानिक कारण छिपे हैं?

धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आलता को देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. लाल रंग ऊर्जा, शक्ति और समृद्धि का प्रतीक है. माना जाता है कि जिस घर की महिलाएं अपने पैरों को आलता से सजाती हैं, वहां मां लक्ष्मी का वास होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है.

हिंदू धर्म में आलता को महिलाओं के ‘सोलह श्रृंगार’ में शामिल किया गया है. मान्यता है कि यह सुहाग की लंबी उम्र और वैवाहिक सुख का आशीर्वाद देता है. विशेष रूप से छठ, करवा चौथ, दिवाली और बंगाल की दुर्गा पूजा जैसे त्योहारों में आलता के बिना श्रृंगार अधूरा माना जाता है.

वैज्ञानिक दृष्टिकोण और स्वास्थ्य लाभ

पुराने समय में आलता प्राकृतिक तत्वों जैसे कुमकुम, पान के पत्तों और औषधीय अर्क से तैयार किया जाता था, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होता था.

  • शीतलता: यह शरीर के तापमान को नियंत्रित कर पैरों को ठंडक पहुंचाता है.
  • त्वचा की सुरक्षा: इसके एंटी-बैक्टीरियल गुण एड़ियों को फटने से बचाते हैं और पैरों को संक्रमण से सुरक्षित रखते हैं.

सांस्कृतिक विरासत

आलता को उत्तर भारत में ‘महावर’ और दक्षिण भारत में ‘परानी’ के नाम से जाना जाता है. भारत के पूर्वी राज्यों जैसे बिहार, बंगाल और ओडिशा में इसका सबसे अधिक उपयोग किया जाता है. इसके अलावा, भगवान कृष्ण द्वारा राधा के पैरों में आलता लगाने की पौराणिक कथाएं भी इस परंपरा की प्राचीनता को दर्शाती हैं.

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लेखक के बारे में

By Neha Kumari

नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें लेखन के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. पिछले छह महीनों से वे राशिफल और धर्म से जुड़ी खबरों पर काम कर रही हैं. उनका मुख्य कार्य व्रत-त्योहारों, पौराणिक कथाओं और भारतीय रीति-रिवाजों से जुड़ी जानकारी को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. नेहा का हमेशा यह प्रयास रहता है कि वे कठिन से कठिन विषय को भी इतना आसान और रोचक बना दें कि हर कोई उसे सहजता से पढ़ और समझ सके. उनका मानना है कि यदि धर्म और संस्कृति से जुड़ी जानकारी सरल शब्दों में मिले, तो लोग अपनी परंपराओं से बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं. डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने प्रभात खबर में ही ‘नेशनल’ और ‘वर्ल्ड’ डेस्क पर छह महीने की इंटर्नशिप के साथ की थी. इस दौरान उन्होंने रियल-टाइम खबरों पर काम करना, तेजी और सटीकता के साथ कंटेंट लिखना, ट्रेंडिंग विषयों की पहचान करना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उनकी न्यूज़ सेंस, लेखन क्षमता और खबरों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की समझ को और अधिक मजबूत बनाया.

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