मई में कब रखें एकादशी व्रत? जानें अपरा और पद्मिनी का शुभ समय

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Ekadashi May 2026

पद्मिनी एकादशी 2026

Ekadashi May 2026: मई 2026 में अपरा और पद्मिनी एकादशी का विशेष महत्व है. जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और व्रत के लाभ, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक शांति मिलती है.

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Ekadashi May 2026: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है. हर माह दो एकादशी तिथियां आती हैं—एक शुक्ल पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में. इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं. मान्यता है कि एकादशी का व्रत रखने से जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है. मई 2026 में अपरा और पद्मिनी एकादशी का विशेष संयोग बन रहा है, जो धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना जाता है.

अपरा एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 12 मई 2026 को दोपहर 2:53 बजे से होगी. यह तिथि 13 मई को दोपहर 1:30 बजे समाप्त हो जाएगी. उदयकाल तिथि को ध्यान में रखते हुए अपरा एकादशी 13 मई 2026 को मनाई जाएगी.

व्रत का पारण 14 मई को द्वादशी तिथि में किया जाएगा, क्योंकि एकादशी व्रत का समापन हमेशा द्वादशी को ही होता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है. इसे विशेष रूप से पुण्यदायी एकादशी माना गया है.

पद्मिनी एकादशी 2026: तिथि और मुहूर्त

पद्मिनी एकादशी अधिक मास (मलमास) के शुक्ल पक्ष में आती है, जिसका विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है. वर्ष 2026 में यह एकादशी 27 मई को मनाई जाएगी. पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 26 मई की सुबह 5:10 बजे शुरू होगी और 27 मई की सुबह 6:21 बजे समाप्त होगी. इसलिए उदयकाल के आधार पर 27 मई को ही पद्मिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा. इस एकादशी को वामन और परिवर्तिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और व्यक्ति को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है.

एकादशी व्रत का धार्मिक महत्व

एकादशी का व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और मानसिक संतुलन का मार्ग भी है. यह दिन व्यक्ति को संयम, त्याग और आत्म-नियंत्रण का अभ्यास कराता है. व्रत और पूजा के माध्यम से मनुष्य अपने मन को शुद्ध करता है और ईश्वर के प्रति भक्ति भाव को बढ़ाता है.

आज के व्यस्त और तनावपूर्ण जीवन में एकादशी का व्रत व्यक्ति को आंतरिक शांति प्रदान करता है. यह हमें भौतिक सुखों से थोड़ी दूरी बनाकर आध्यात्मिक उन्नति की ओर प्रेरित करता है. इसलिए एकादशी को न केवल धार्मिक, बल्कि जीवन को संतुलित करने का भी महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है.

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शौर्य पुंज

लेखक के बारे में

By शौर्य पुंज

मैं धर्म, ज्योतिष और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन में विशेषज्ञता रखता हूं. हस्तरेखा शास्त्र, राशिफल, ग्रह-नक्षत्र, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं से जुड़े विषयों पर मेरी विशेष रुचि और गहरी समझ है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष के अलावा एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी लगातार लेखन करता रहा हूं. मेरी कोशिश रहती है कि जटिल विषयों को आसान, रोचक और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाया जाए.

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