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Dhanteras 2024: धनतेरस को इन नाम से भी जानते हैं लोग, इस दिन जरूर करते हैं ये काम

Updated at : 27 Oct 2024 12:08 PM (IST)
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Dhanteras 2024 also known as dhantrayodashi

Dhanteras 2024 also known as dhantrayodashi

Dhanteras 2024 also known as dhantrayodashi: धनतेरस को लोग धन त्रयोदशी के नाम से भी जानते हैं. इस दिन को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाने की परंपरा है, अर्थात् पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का पर्व मनाया जाता है.

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Dhanteras 2024: धनतेरस को धन त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है. यह शब्द दो भागों से मिलकर बना है – धन और तेरस. ‘धन’ का अर्थ है संपत्ति और समृद्धि, जबकि ‘तेरस’ का अर्थ है हिंदू कैलेंडर की 13वीं तिथि. इस दिन को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है यानी पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है.

धनतेरस को और किस नाम से जानते हैं ?

कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को ‘धनतेरस’ के रूप में जाना जाता है, जिसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है. इस दिन यमराज की कृपा प्राप्त करने के लिए दीप जलाने की परंपरा है. पद्म पुराण के उत्तरखंड अध्याय 124 के अनुसार, इस दिन घर के बाहर यमराज के लिए दीपक रखना चाहिए, जिससे अकाल मृत्यु का नाश होता है. दीप जलाते समय विशेष मंत्र का उच्चारण करना चाहिए.

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धनतेरस का महत्व

भारतीय संस्कृति में स्वास्थ्य को धन से अधिक महत्वपूर्ण माना गया है. यह कहावत आज भी प्रचलित है कि ‘पहला सुख निरोगी काया, दूजा सुख घर में माया’. इसलिए दीपावली के अवसर पर सबसे पहले धनतेरस का पर्व मनाया जाता है, जो भारतीय परंपरा के अनुसार अत्यंत उपयुक्त है.

शास्त्रों में वर्णित कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन भगवान धनवंतरी अमृत कलश के साथ प्रकट हुए. मान्यता है कि भगवान धनवंतरी भगवान विष्णु के अवतार हैं. चिकित्सा विज्ञान के विकास और प्रसार के लिए भगवान विष्णु ने धनवंतरी का अवतार लिया था. भगवान धनवंतरी के प्रकट होने के उपलक्ष्य में धनतेरस का पर्व मनाया जाता है.

धनतेरस में लोग जरूर करते हैं ये काम

इस दिन विशेष रूप से अपने सामर्थ्य के अनुसार चांदी और अन्य धातुओं की खरीदारी करना अत्यंत लाभकारी रहेगा. धन और संपत्ति की प्राप्ति के लिए घर के पूजा स्थल पर कुबेर देवता के लिए दीप जलाना चाहिए, साथ ही मुख्य द्वार पर यमराज के लिए भी दीप जलाना आवश्यक है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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