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Chhath Puja 2025 Shubh Yog: छठ पूजा पर बन रहा है दुर्लभ संयोग, सूर्य को अर्घ्य देने से होगा ये लाभ

Updated at : 24 Oct 2025 8:08 AM (IST)
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Chhath Puja 2025 Shubh Yog

छठ पूजा पर रवि योग का निर्माण

Chhath Puja 2025 Shubh Yog: इस साल छठ पूजा पर दुर्लभ योग बन रहा है. सूर्य देव को अर्घ्य देने से स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और परिवार में शांति की प्राप्ति होगी. इस विशेष अवसर पर पूजा और व्रत करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, खुशहाली और आर्थिक लाभ के प्रबल योग बनेंगे.

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Chhath Puja 2025 Shubh Yog: लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा की तैयारियाँ इस बार जोरों पर हैं. 2025 में छठ पूजा के दौरान रवि योग और कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जिनमें छठ मैया और सूर्य देव की आराधना करने से सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है. यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तक मनाया जाता है.

छठ पूजा की प्रमुख तिथियां और अनुष्ठान

चतुर्थी तिथि (25 अक्टूबर 2025)– नहाय-खाय: व्रती स्नान करके शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं, जैसे चना दाल और लौकी की सब्जी. यह दिन संयम और पवित्रता का प्रतीक है.

पंचमी तिथि (26 अक्टूबर 2025)– खरना: इस दिन व्रती गुड़-खीर बनाकर प्रसाद ग्रहण करते हैं और इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ होता है.

षष्ठी तिथि (27 अक्टूबर 2025): संध्या अर्घ्य- व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं. बांस की सूप में फल और ठेकुआ रखकर नदी या तालाब में पूजा की जाती है. यह सूर्य देव की कृपा का दिन है.

सप्तमी तिथि (28 अक्टूबर 2025) : उषा अर्घ्य- सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और व्रत का समापन होता है. इस दिन सूर्य की ऊर्जा से स्वास्थ्य, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है.

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छठ पूजा पर बन रहा है विशेष योग और संयोग

27 अक्टूबर 2025 को रवि योग रात 10:46 तक रहेगा. ज्योतिष शास्त्र में यह योग दुर्लभ और अत्यंत शुभ माना जाता है. छठ पूजा पर सुकर्मा योग भी पूर्ण रात्रि तक रहेगा, जो शुभ कार्यों और पूजा के लिए आदर्श है. इस दौरान कौलव और तैतिल करण बन रहे हैं, जो दोनों ही शुभ माने जाते हैं. साथ ही पूर्वाषाढा नक्षत्र भी उपस्थित है. इन सभी संयोगों में पूजा और अर्घ्य करने से सौभाग्य, आरोग्य और समृद्धि में वृद्धि होती है.

    छठ व्रत कब है?

    छठ व्रत साल 2025 में 25 अक्टूबर से शुरू होकर 28 अक्टूबर को उषा अर्घ्य के साथ समाप्त होगा.

    छठी मैया और सूर्य देव के बीच क्या संबंध है?

    छठी मैया को सूर्य देव की बहन माना जाता है, इसलिए छठ पूजा में सूर्य देव के साथ उनकी भी पूजा की जाती है.

    सीता माता ने छठ पूजा क्यों की?

    सीता माता ने राम राज्याभिषेक के बाद संतान सुख और समृद्धि की कामना से छठ व्रत किया था.

    सबसे पहले छठ व्रत किसने किया था?

    मान्यता है कि सबसे पहले सूर्य पुत्र कर्ण ने सूर्य देव की उपासना कर छठ व्रत किया था.

    षष्ठी देवी का मंत्र क्या है?

    षष्ठी देवी का प्रमुख मंत्र है — “ॐ ह्रीं षष्ठीदेव्यै नमः”, जो सुख, संतान और समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है.

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    Shaurya Punj

    लेखक के बारे में

    By Shaurya Punj

    मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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