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Bakrid 2025 Date In India:  भारत में कब मनाई जाएगी बकरीद?  जानिए इस दिन क्या करते हैं मुसलमान

Updated at : 28 May 2025 1:14 PM (IST)
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Bakrid 2025 Date In India

Bakrid 2025 Date In India

Bakrid 2025 Date In India: ईद-उल-अजहा को आमतौर पर बकरीद के नाम से जाना जाता है. यह इस्लाम धर्म के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है. यह पर्व कुर्बानी यानी त्याग और बलिदान की भावना को समर्पित होता है, और हर साल इस्लामी कैलेंडर के 12वें महीने, धुल-हिज्जा की 10वीं तारीख को मनाया जाता है. आइए जानें कि इस साल बकरीद कब मनाई जाएगी और इस त्योहार का महत्व क्या है.

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Bakrid 2025 Date In India:  ईद-उल-अजहा, जिसे ईद उल-जुहा, बकरीद या कुर्बानी का त्योहार भी कहा जाता है, इस्लाम में एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है. यह पर्व मुस्लिम समुदाय द्वारा बड़े श्रद्धा और भावनात्मक समर्पण के साथ मनाया जाता है. यह केवल कुर्बानी का दिन नहीं है, बल्कि अल्लाह के प्रति समर्पण, त्याग और इंसानियत की गहरी भावना का प्रतीक भी है. इस अवसर पर मुसलमान हजरत इब्राहीम (अलैहि सलाम) की उस निष्ठा और बलिदान को याद करते हैं, जब उन्होंने अल्लाह के आदेश पर अपने पुत्र को कुर्बान करने का संकल्प लिया था.

भारत में बकरीद कब मनाई जाएगी

सऊदी अरब की सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चांद दिखाई देने के बाद बकरीद की तारीख की घोषणा की है. वहां 27 मई को धुल-हिज्जा का चांद नजर आया, जो इस्लामी कैलेंडर का दूसरा सबसे पवित्र महीना माना जाता है. मक्का में इस वर्ष की हज यात्रा 4 जून से शुरू होगी, अराफा का दिन 5 जून को पड़ेगा और ईद-उल-अजहा 6 जून 2025, शुक्रवार को मनाई जाएगी.

किस दिन मनाया जाएगा बकरीद का त्योहार, जानें तारीख

हालांकि, भारत में बकरीद की तारीख स्थानीय चांद देखने पर तय होती है. यदि भारत में 28 मई को चांद दिखाई देता है, तो ईद-उल-अजहा शनिवार, 7 जून को मनाई जाएगी. अन्यथा, चांद 29 मई को दिखने की स्थिति में यह पर्व रविवार, 8 जून को मनाया जाएगा.

बकरीद क्यों मनाई जाएगी

इस पर्व की उत्पत्ति एक प्रेरणादायक कहानी से हुई है. हजरत इब्राहीम से अल्लाह ने उनकी सबसे प्यारी चीज़ की कुर्बानी मांगनी चाही. उन्होंने अपने बेटे को कुर्बान करने का दृढ़ निश्चय किया. जब वे अल्लाह की आज्ञा का पालन करने ही वाले थे, तब अल्लाह ने उन्हें रोक दिया और बेटे की जगह एक दुम्बे की कुर्बानी स्वीकार की.

तब से यह परंपरा चली आ रही है कि ईद-उल-अजहा पर जानवर की कुर्बानी दी जाती है, जो अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण और इंसानियत के लिए त्याग एवं बलिदान का प्रतीक बन गई है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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