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Akshaya Tritiya 2025 पर इन जगहों पर जरूर जलाएं दीपक, मां लक्ष्मी की कृपा होगी प्राप्त

Updated at : 26 Apr 2025 12:45 PM (IST)
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Akshaya Tritiya 2025 diya lighting importance

Akshaya Tritiya 2025 diya lighting importance

Akshaya Tritiya 2025: अक्षय तृतीया के अवसर पर दीपक जलाने का अत्यधिक महत्व होता है. ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स के अनुसार, इस दिन दीपक जलाने से घर में सुख और समृद्धि का वास होता है तथा शुभता का आगमन होता है. आइए जानते हैं कि अक्षय तृतीया के दिन दीपक जलाने का शुभ मुहूर्त क्या है, हमें कहां-कहां दीपक जलाना चाहिए और दीपक जलाने का महत्व क्या है.

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Akshaya Tritiya 2025: वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि, जिसे अक्षय तृतीया कहा जाता है, एक अत्यंत शुभ और फलदायी दिन माना जाता है. इस दिन किए गए दान, जप, तप और अन्य शुभ कार्यों का फल दोगुना होता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अक्षय तृतीया का दिन अबूझ मुहूर्त में से एक है. इस दिन किए गए सभी कार्य लाभकारी माने जाते हैं, जिनमें दीपक जलाना भी शामिल है. कहा जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन दीपक जलाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है. आइए जानते हैं कि अक्षय तृतीया पर किस मुहूर्त में दीपक जलाना शुभ रहेगा.

अक्षय तृतीया के दिन दिया जलाने का शुभ मुहूर्त

अक्षय तृतीया के अवसर पर गोधूली बेला में दीप जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है. गोधूली बेला को शाम का समय माना जाता है. 30 अप्रैल को गोधूलि बेला का मुहूर्त शाम 6:55 बजे से प्रारंभ होगा और इसका समापन शाम 7:16 बजे होगा. शास्त्रों के अनुसार, गोधूली बेला में पूजा-पाठ करना और मांगलिक कार्य करना बहुत ही शुभ होता है. इस समय को मंगलबेला भी कहा जाता है.

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अक्षय तृतीया का दिया जलाना कहां कहां जरूरी

  • अक्षय तृतीया के अवसर पर घर के 5 स्थानों पर दीपक जलाना अनिवार्य है. सबसे पहले, दीपक को घर के मंदिर में जलाना चाहिए, जिससे घर में दिव्य ऊर्जा का संचार होता है और सकारात्मकता का अनुभव होता है. इसके बाद, तुलसी के पौधे के पास दूसरा दीपक जलाने से मां लक्ष्मी का वास होता है और आर्थिक स्थिति में सुधार होता है.
  • अक्षय तृतीया के अवसर पर, मुख्य द्वार पर तीसरा दीपक जलाना आवश्यक है. इससे घर में प्रवेश करने वाली नकारात्मक ऊर्जा रुकती है और पितरों का आशीर्वाद भी बना रहता है. इसी दिन, चौथा दीपक रसोई में जलाना चाहिए, जहाँ मां अन्नपूर्णा का निवास होता है. इस प्रकार, घर की समृद्धि बनाए रखने के लिए रसोई में दीप जलाना महत्वपूर्ण है.
  • अक्षय तृतीया के अवसर पर अंतिम दीया, अर्थात् पांचवां दीया, पीपल के वृक्ष के नीचे जलाना चाहिए. पीपल के वृक्ष में देवी-देवताओं का निवास होता है. इसके अतिरिक्त, पीपल के वृक्ष में ग्रह भी स्थित होते हैं और पितरों का स्थान भी यही है. इस प्रकार, अक्षय तृतीया के दिन पीपल के वृक्ष के समीप दीया जलाने से देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है और ग्रह तथा पितृ शांत होते हैं.
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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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