साल का आखिरी सूर्यग्रहण आज, भारत में नहीं दिखेगा यह नजारा

Updated at : 01 Sep 2016 9:39 AM (IST)
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साल का आखिरी सूर्यग्रहण आज, भारत में नहीं दिखेगा यह नजारा

नयी दिल्ली : आज 1 सितंबर को साल का अंतिम सूर्य ग्रहण लगेगा. हालांकि, यह भारत में नहीं दिखेगा. इसलिए भारत के लिए सूतक भी अमान्य होगा. भारतीय समय के अनुसार, ग्रहण 12 बजकर 48 मिनट पर शुरू होगा और शाम 4 बजकर 24 मिनट पर खत्म होगा. सूर्यग्रहण भाद्रपद माह की कृष्णपक्ष की अमावस्या […]

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नयी दिल्ली : आज 1 सितंबर को साल का अंतिम सूर्य ग्रहण लगेगा. हालांकि, यह भारत में नहीं दिखेगा. इसलिए भारत के लिए सूतक भी अमान्य होगा. भारतीय समय के अनुसार, ग्रहण 12 बजकर 48 मिनट पर शुरू होगा और शाम 4 बजकर 24 मिनट पर खत्म होगा. सूर्यग्रहण भाद्रपद माह की कृष्णपक्ष की अमावस्या को पड़ रहा है. भारत में सूर्य ग्रहण नहीं देखा जा सकेगा. मान्यता है कि जहां ग्रहण नहीं दिखता, वहां सूतक भी मान्य नहीं होता. कई विद्वानों का मानना है कि सूर्यग्रहण कहीं भी हो उसका आंशिक असर सभी जगह रहता है. इसलिए भले ही ग्रहण का असर न हो, लेकिन लोग दान-पुण्य और ग्रहण खत्म होने के बाद गंगा स्नान जरूर करते हैं.

आज लगने वाला सूर्यग्रहण हिंद महासागर और अफ्रीका के अलावा ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तटवर्ती इलाके में दिखेगा. आज का सूर्यग्रहण मुख्य रूप से अफ्रीकी देशों जैसे अलजीरिया, अंगोला, बेनिन, बोत्सवाना, बुरकीनो फासो, बुरंडी, कैमरुन, कैनरी आइसलेण्ड, कोंगू गणराज्य, मध्य अफ्रीका गणराज्य, चाड, कोकोस आइसलेण्ड, इजिप्ट, इथोपिया, गबून, जाम्बिया, घाना, इण्डोनेशिया, केन्या, लिबेरिया, लीबिया, मेडागास्कर, जिम्बाम्बे, पश्चिमी सहारा, सेनेगल, यमन, टोगो, तंजानिया, निगर, नामीबिया आदि देशों में देखा जा सकेगा.

सूर्यग्रहण के समय ना करें ये काम

जब भी सूर्यग्रहण का सूतक काल चल रहा हो तो शास्त्रों के अनुसार कुछ काम वर्जित हैं. सूतक काल के समय भोजन नहीं करना चाहिए. साथ ही सूतक काल में मल मूत्र त्यागना भी वर्जित है. सूतक काल में मनुष्‍य को सोना नहीं चाहिए. किसी भी प्राणी की हत्या नहीं करनी चाहिए और किसी को धोखा भी नहीं देना चाहिए. सूतक काल में भगवान का पूजन वर्जित है लेकिन इस समय मंत्रों का जाप कर सकते हैं. सूतक समाप्त होने के बाद स्नान कर भगवान की पूजा करनी चाहिए. ब्राह्मणों को दान देना चाहिए. हालांकि भारत में इस ग्रहण को देखा नहीं जायेगा. फिर भी विद्वानों का मत है कि सूतक काल के बाद स्नान और पूजन के पश्‍चात ब्राह्मणों को उचित दान अवश्‍य दें.

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