शादी में 7 फेरे क्यों होते हैं, जानिए वैदिक विवाह का असली सच

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7 pheras truth

शादी में सात फेरे ही क्यों लेते हैं

7 pheras truth: वैदिक विवाह में 7 नहीं बल्कि 4 फेरे होते हैं. ये चारों फेरे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे जीवन के मुख्य पुरुषार्थों और जिम्मेदारियों का प्रतीक माने जाते हैं.

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7 pheras truth: जब भी हिंदू शादी की बात होती है, तो सबसे पहले “7 फेरे” और “7 जन्मों का बंधन” याद आता है. फिल्मों में मंडप, अग्नि, शहनाई और पंडित की आवाज के साथ यही दिखाया जाता है कि दूल्हा-दुल्हन 7 फेरे लेकर हमेशा के लिए एक हो गए. धीरे-धीरे लोगों ने इसे ही हिंदू विवाह की असली परंपरा मान लिया. लेकिन सच इससे थोड़ा अलग है. हमारी यह धारणा वेदों से नहीं, बल्कि फिल्मों और टीवी से बनी है. असल वैदिक विवाह में 7 नहीं, बल्कि केवल 4 फेरे होते हैं.

वैदिक विवाह में क्यों होते हैं 4 फेरे?

धर्मग्रंथों और विद्वानों के अनुसार, वेदों में विवाह संस्कार का उल्लेख स्पष्ट रूप से मिलता है. खासतौर पर यजुर्वेद में विवाह की विधियों का वर्णन किया गया है, जहां चार फेरों का महत्व बताया गया है. इन 4 फेरों का संबंध जीवन के 4 पुरुषार्थों से माना जाता है. हिंदू दर्शन के अनुसार इंसान का पूरा जीवन इन्हीं चार आधारों पर टिका होता है.

4 पुरुषार्थों का महत्व

धर्म

पहला फेरा धर्म का प्रतीक माना जाता है. इसका अर्थ है कि पति-पत्नी जीवनभर सत्य, कर्तव्य और नैतिकता का पालन करेंगे.

अर्थ

दूसरा फेरा अर्थ यानी धन और समृद्धि से जुड़ा होता है. दोनों मिलकर परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां निभाने का संकल्प लेते हैं.

काम

तीसरा फेरा काम का प्रतीक है, जिसका अर्थ केवल इच्छाएं नहीं बल्कि प्रेम, परिवार और भावनात्मक संतुलन भी है.

मोक्ष

चौथा और अंतिम फेरा मोक्ष का प्रतीक माना जाता है. इसका मतलब है कि पति-पत्नी एक-दूसरे का साथ देते हुए आत्मिक उन्नति की ओर बढ़ेंगे.

फिर 7 फेरों की परंपरा कहां से आई?

समय के साथ अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में विवाह की रस्मों में बदलाव हुए. बाद में कई समाजों में 7 फेरों की प्रथा लोकप्रिय हो गई. फिल्मों और टीवी ने भी इसे इतना दिखाया कि लोगों ने यही मान लिया कि हिंदू विवाह में हमेशा 7 फेरे ही होते हैं.

असल में हिंदू धर्म की हर परंपरा के पीछे एक गहरा अर्थ और वैज्ञानिक सोच छिपी होती है. इसलिए वैदिक विवाह को समझने के लिए फिल्मों से ज्यादा धर्मग्रंथों को जानना जरूरी है.

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शौर्य पुंज

लेखक के बारे में

By शौर्य पुंज

मैं धर्म, ज्योतिष और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन में विशेषज्ञता रखता हूं. हस्तरेखा शास्त्र, राशिफल, ग्रह-नक्षत्र, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं से जुड़े विषयों पर मेरी विशेष रुचि और गहरी समझ है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष के अलावा एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी लगातार लेखन करता रहा हूं. मेरी कोशिश रहती है कि जटिल विषयों को आसान, रोचक और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाया जाए.

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