मांगलिक होने का क्या अर्थ है ? जानें क्या कहते हैं सद्‌गुरु स्वामी आनंद जी

By Prabhat Khabar Digital Desk
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सद्‌गुरु स्वामी आनंद जी एक आधुनिक सन्यासी हैं, जो पाखंड के धुरविरोधी हैं और संपूर्ण विश्व में भारतीय आध्यात्म व दर्शन के तार्किक तथा वैज्ञानिक पक्ष को उजागर कर रहे हैं. सद्‌गुरुश्री के नाम से प्रख्यात कार्पोरेट सेक्टर से अध्यात्म में क़दम रखने वाले यह आध्यात्मिक गुरु नक्षत्रीय गणनाओं तथा गूढ़ विधाओं में पारंगत हैं तथा मनुष्य के आध्यात्मिक, सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक व्यवहार की गहरी पकड़ रखते हैं. आप भी इनसे अपनी समस्याओं को लेकर सवाल पूछ सकते हैं. इसके लिए आप इन समस्याओं के संबंध में लोगों के द्वारा किये गये सवाल के अंत में पता देख सकते हैं...

-मांगलिक होने का क्या अर्थ है. कोई कब तक मांगलिक रहता है? क्या पूजा-पाठ से इसकी शांति हो सकती है?
रुचि राघव, पटना

-जन्म कुंडली में बारह खाने होते हैं, जिन्हें द्वादश भाव या बारह घर कहा जाता है. लग्न (अर्थात प्रथम भाव), चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में मंगल की मौजूदगी व्यक्ति को मांगलिक बनाता है. इसे मंगल दोष भी कहा जाता है. यह योग परिवर्तनशील नहीं है. अर्थात यदि कोई मांगलिक है, तो वह जीवन पर्यंत रहेगा. साधारण रूप से कहा जानेवाला उपक्रम 'मंगल की शांति' से तो उसका आशय ही स्पष्ट नहीं है, क्योंकि यह अशांति की स्थिति है ही नहीं, बल्कि यह तो एक भिन्न परिस्थिति है. आंतरिक संकल्प तो ठीक है, पर कोई धार्मिक अनुष्ठान या बाह्य क्रिया-कलाप इस योग को बदल देगा, यह अपरिपक्व अवधारणा है. मांगलिक लोगों में ऊर्जा की अधिकता होती है. अतः यदि इनका संयोग मांगलिक लोगों से हो, तो इनका जीवन आनंद से लबरेज होता है. उपाय के रूप में अगर नियमित रूप से रोज लंबी दौड़, योगाभ्यास या वर्जिश करें, साथ ही गर्म जल के साथ शहद का सेवन करें, तो यह अधिक प्रभावी और अर्थपूर्ण है.

-अंक 8 अशुभ क्यों माना जाता है?
संगीता रानी, बोकारो

-अंक 8 अशुभ होता है, मैं इस विचार से सहमत नहीं हूं, क्योंकि हर अंक का अपना पृथक अस्तित्व, गुण- धर्म और महत्व है. कोई भी अंक श्वेत-श्याम की कसौटी पर न तो सार्वभौमिक रूप से अच्छा होता है, न ही बुरा. अंक ज्योतिष के अनुसार 8 की संख्या जो शनि से सरोकार रखती है, स्वयं में विराट मानसिक क्षमता और अपार संभावनाएं समेटे हुए है. यह अंक खुद में अध्यात्म, लेखन, कला, संगीत, अर्थशास्त्र, नीति, राजनीति, सामाजिक सुधार और वैचारिक क्षमता की अप्रतिम प्रतिभा से ओत-प्रोत है. हां, विचारों की प्रचुरता के कारण यह अंक भौतिक रूप से अन्य कई अंकों के पीछे चुपचाप खड़ा नजर आता है, शायद, इसलिए अपरिपक्व मान्यताएं इस अंक को अशुभ घोषित कर देती हैं, जो सही व्याख्या नहीं है.

मैं बवासीर से परेशान हूं. क्या ज्योतिष में इसका भी कोई योग होता है? क्या मेरी कुंडली में बवासीर का योग है? मेरी जन्म तिथि 13.09.1991, जन्म समय- 11.35 पूर्वाह्न, जन्म स्थान- रायपुर (छत्तीसगढ़) है.
सोना सिंह, जमशेदपुर

-यदि ज्योतिष में केतु अष्टम भाव में आसीन हो, तो गुदा से संबंधित विकारों के साथ देह के निचले भाग को कष्ट प्रदान करता है और विशेष रूप से बवासीर जैसे रोग से ग्रसित होने की संभावना बढ़ जाती है. मसालेदार और तीखे भोजन से इन्हें कष्ट पहुंचता है. आपका केतु अष्टम भाव में ही बैठा है, लिहाजा, आपकी कुंडली में इस कष्ट का योग निर्मित हो रहा है, पर इसे खान-पान, योगाभ्यास और स्वस्थ दिनचर्या से इस पर काबू पाया जा सकता है.

सदगुरु ज्ञान : यदि विरासत में संपत्ति प्राप्त हो, यदि घर-परिवार में बुजुर्गों को सम्मान मिलता हो और उनसे राय ली जाती हो, यदि दादा-दादी का पूर्ण सुख प्राप्त होता हो, यदि घर की संतान संस्कारी हो, यदि मन पवित्र रहता हो और बुरे विचार न आते हों, यदि घर में संत-महात्माओं और ज्ञानी व्यक्तियों का आदर होता हो, यदि परिवार में धन और धान्य की कोई कमी न हो, तो ये कुंडली में वृहस्पति के अच्छे होने के संकेत हैं.

यदि आपकी कोई ज्योतिषिय, आध्यात्मिक या गूढ़ जिज्ञासा हो, तो आप अपनी जन्म तिथि, जन्म समय व जन्म स्थान के साथ कम-से-कम शब्दों में हमें अपना प्रश्न saddgurushri@gmail.com पर भेज सकते हैं. चुनिंदा सवालों के जवाब प्रकाशित किये जायेंगे.

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