वैशाख अमावस्या 2026: पितरों का तर्पण करते समय न करें ये गलतियां, पूर्वज हो सकते हैं नाराज

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Vaishakh Amavasya 2026

पितरों का तर्पण करते हुए सांकेतिक तस्वीर (एआई)

Vaishakh Amavasya 2026: हिंदू धर्म में अमावस्या के दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करने का विधान है. हालांकि, तर्पण के दौरान लोग अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनसे तर्पण का फल नष्ट होने की संभावना होती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि तर्पण करते समय किन सावधानियों का ध्यान रखना आवश्यक है.

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Vaishakh Amavasya 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, साल में 12 अमावस्याएं पड़ती हैं. हर महीने के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को अमावस्या मनाई जाती है. इस दिन पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए परिवार के लोग तर्पण, पिंडदान और अन्य श्राद्ध कर्म करते हैं. साल 2026 में वैशाख महीने की अमावस्या 17 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जा रही है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए पितृ कर्मों से घर में सुख-समृद्धि आती है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है.

तर्पण के समय रखें ये सावधानियां

  • दिशा का चुनाव: तर्पण करते समय हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करना चाहिए. दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना गया है. यदि आप उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके तर्पण करते हैं, तो वह पितरों तक नहीं पहुंचता.
  • तिल का प्रयोग: तर्पण के जल में काले तिल का होना अनिवार्य है. कहा जाता है कि बिना तिल के किया गया तर्पण पितरों को नहीं, बल्कि अन्य शक्तियों को प्राप्त होता है. ध्यान रखें कि तर्पण में केवल काले तिल का ही प्रयोग करें, सफेद तिल का नहीं.
  • जल अर्पण के लिए पात्र: पितरों को जल अर्पित करने के लिए हमेशा तांबे के बर्तन का उपयोग करना चाहिए. स्टील, प्लास्टिक या कांच के बर्तनों का उपयोग वर्जित माना गया है. तांबा शुद्ध धातु मानी जाती है, जो सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है.
  • समय का ध्यान रखना: तर्पण का सबसे शुभ समय मध्याह्न (दोपहर) का होता है. सुबह स्नान करने के बाद दोपहर में तर्पण करना सबसे फलदायी माना गया है. सूर्यास्त के बाद तर्पण करना शास्त्रों में वर्जित है.
  • क्रोध और तामसिक भोजन: अमावस्या के दिन घर में शांति का वातावरण बनाए रखें. तर्पण करने वाले व्यक्ति को उस दिन मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज जैसे तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए. साथ ही, किसी भी गरीब या असहाय व्यक्ति का अपमान न करें.

पितरों को प्रसन्न करने के लिए उपाय

  • पीपल की पूजा: इस दिन पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीपक जलाएं. मान्यता है कि पीपल में त्रिदेवों के साथ पितरों का वास होता है.
  • पंचबलि भोग: भोजन बनाने के बाद सबसे पहले गाय, कुत्ते, कौवे, चींटियों और देवताओं के लिए अन्न का अंश निकालें.
  • दान का महत्व: अमावस्या के दिन तिल, गुड़, अनाज या वस्त्र का दान करने से पितर प्रसन्न होते हैं और वंश वृद्धि, सुख-समृद्धि व आरोग्य का आशीर्वाद देते हैं.

यह भी पढ़ें: Vaishakh Amavasya 2026: पितरों का तर्पण और पिंडदान क्यों है जरूरी? जानें रहस्य

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Neha Kumari

लेखक के बारे में

By Neha Kumari

नेहा कुमारी वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में धर्म बीट पर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वह व्रत-त्योहार, राशिफल, पंचांग, ज्योतिष, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेख लिखती हैं. उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है.

डिजिटल पत्रकारिता में उन्होंने धर्म, ज्योतिष और भारतीय परंपराओं से जुड़े विषयों पर विशेष अनुभव हासिल किया है. उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सटीक, विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों को आसानी से समझ सकें.

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