बुध की उल्टी चाल होगी शुरू, कन्या समेत 3 राशियों के लिए अलर्ट

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बुध की उल्टी चाल होगी शुरू, कन्या समेत 3 राशियों के लिए अलर्ट

Budh Vakri 2026: बुध 26 फरवरी से वक्री हो रहे हैं. इस दौरान संचार, व्यापार और निर्णय में भ्रम बढ़ सकता है. जानें किन तीन राशियों को विशेष सावधानी रखने की जरूरत है.

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Budh Vakri 2026: कल यानी 26 फरवरी 2026 को बुध (Mercury) कुंभ राशि में वक्री हो रहे हैं और 21 मार्च 2026 तक वक्री रहेंगे. इस समय कुंभ राशि में बुध के साथ सूर्य, शनि, शुक्र, मंगल और राहु जैसे ग्रहों की उपस्थिति से ऊर्जा और भी अधिक जटिल हो सकती है. वहीं मिथुन राशि में गुरु (Jupiter) भी वक्री स्थिति में हैं, जिससे प्रभाव और गहरा हो जाता है. अब जानते हैं कि मिथुन, कन्या और धनु राशि के लिए बुध किस भाव (घर) को प्रभावित करेंगे और वह भाव किन विषयों का कारक होता है.

बुध कब होंगे वक्री

इस समय बुध शनि के स्वामित्व वाली राशि में स्थित हैं और 26 फरवरी 2026 को दोपहर 12 बजकर 17 मिनट पर कुंभ राशि में वक्री (उल्टी चाल) हो जाएंगे. बुध 21 मार्च 2026 तक वक्री रहेंगे. ज्योतिष मान्यता के अनुसार जब बुध वक्री होते हैं, तो बातचीत, निर्णय, व्यापार, तकनीकी कार्य और दस्तावेजों से जुड़े मामलों में भ्रम या रुकावट आ सकती है.

अब जानते हैं किन राशियों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए.

मिथुन राशि (Gemini)

बुध की स्थिति

कुंभ राशि मिथुन से नवम भाव (9th house) में पड़ती है.

नवम भाव का कारक

भाग्य, धर्म, उच्च शिक्षा, गुरु, लंबी दूरी की यात्रा, सिद्धांत, भाग्योदय.

संभावित प्रभाव

  • भाग्य के मामलों में उतार-चढ़ाव महसूस हो सकता है.
  • उच्च शिक्षा या विदेश संबंधी योजनाओं में देरी.
  • पिता या गुरु तुल्य व्यक्ति से मतभेद संभव.
  • चूंकि गुरु भी मिथुन राशि में वक्री हैं, इसलिए विचारधारा और निर्णय क्षमता में द्वंद्व की स्थिति बन सकती है.
  • आध्यात्मिक या दार्शनिक सोच में परिवर्तन संभव.

सावधानी

महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर लें. यात्रा और कानूनी मामलों में विशेष ध्यान रखें.

कन्या राशि (Virgo)

बुध की स्थिति

कुंभ राशि कन्या से षष्ठम भाव (6th house) में आती है.

षष्ठम भाव का कारक

रोग, ऋण, शत्रु, प्रतिस्पर्धा, दैनिक कार्य, नौकरी.

संभावित प्रभाव

  • भाग्य के मामलों में उतार-चढ़ाव महसूस हो सकता है.
  • उच्च शिक्षा या विदेश संबंधी योजनाओं में देरी.
  • पिता या गुरु तुल्य व्यक्ति से मतभेद संभव.
  • चूंकि गुरु भी मिथुन राशि में वक्री हैं, इसलिए विचारधारा और निर्णय क्षमता में द्वंद्व की स्थिति बन सकती है.
  • आध्यात्मिक या दार्शनिक सोच में परिवर्तन संभव.

सावधानी

महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर लें. यात्रा और कानूनी मामलों में विशेष ध्यान रखें.

धनु राशि (Sagittarius)

बुध की स्थिति

कुंभ राशि धनु से तृतीय भाव (3rd house) में स्थित होगी.

तृतीय भाव का कारक

साहस, संचार, छोटे भाई-बहन, लघु यात्रा, मीडिया, लेखन, प्रयास.

संभावित प्रभाव

  • संचार में भ्रम या गलत संदेश की संभावना.
  • भाई-बहनों से मतभेद.
  • छोटी यात्राओं में बाधा या देरी.
  • मार्केटिंग, मीडिया या लेखन से जुड़े लोगों को अतिरिक्त सावधानी रखनी होगी.

सावधानी

बातचीत में स्पष्टता रखें. डिजिटल डाटा और दस्तावेज सुरक्षित रखें.

क्या रखें ध्यान?

बुध वक्री काल में धैर्य और संयम बहुत जरूरी है. किसी भी निर्णय से पहले दो बार जांच करें. जल्दबाजी और गुस्से से बचें. सकारात्मक सोच और शांत व्यवहार से इस समय को आसानी से संभाला जा सकता है.

ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा
15+ वर्षों का अनुभव | ज्योतिष, वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ
Consultation: 8080426594 / 9545290847

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शौर्य पुंज

लेखक के बारे में

By शौर्य पुंज

मैं धर्म, ज्योतिष और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन में विशेषज्ञता रखता हूं. हस्तरेखा शास्त्र, राशिफल, ग्रह-नक्षत्र, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं से जुड़े विषयों पर मेरी विशेष रुचि और गहरी समझ है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष के अलावा एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी लगातार लेखन करता रहा हूं. मेरी कोशिश रहती है कि जटिल विषयों को आसान, रोचक और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाया जाए.

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