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बाजार में बेहद कीमती है झारखंड के इन जिलों में पैदा होने वाली लेमन ग्रास

Updated at : 29 Jul 2020 3:09 PM (IST)
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बाजार में बेहद कीमती है झारखंड के इन जिलों में पैदा होने वाली लेमन ग्रास

Jharkhand news, Ranchi news : लेमन ग्रास या नींबू घास एक औषधीय और सुगंधित पौधा है. झारखंड के 5 जिलों के 10 प्रखंड (Block) में लेमन ग्रास की खेती हो रही है. करीब 12,500 ग्रामीण महिलाएं लेमन ग्रास की खेती से जुड़ी हैं. 4 महीने में तैयार होने वाले इस पौधे की काफी मांग है. इसकी पत्तियां और उससे निकलने वाले तेल से कई सामानों का निर्माण होता है. वहीं एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इन्फ्लेमेटरी एवं एंटी-फंगल गुण होने के कारण इसकी महत्ता काफी अधिक बढ़ जाती है. इसका उपयोग मेडिसिन, कॉस्मेटिक, डिटरजेंट समेत अन्य सामानों में उपयोग में लाया जाता है. लेमन ग्रास का तेल 2 हजार से 4 हजार प्रति किलोग्राम तक बाजार में बिकता है.

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Jharkhand news, Ranchi news : रांची : लेमन ग्रास या नींबू घास एक बेहतरीन औषधीय और सुगंधित पौधा है. झारखंड के 5 जिलों के 10 प्रखंड (Block) में लेमन ग्रास की खेती हो रही है. करीब 12,500 ग्रामीण महिलाएं लेमन ग्रास की खेती से जुड़ी हैं. 4 महीने में तैयार होने वाले इस पौधे की काफी मांग है. इसकी पत्तियां और उससे निकलने वाले तेल से कई सामानों का निर्माण होता है. वहीं एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इन्फ्लेमेटरी एवं एंटी-फंगल गुण होने के कारण इसकी महत्ता काफी अधिक बढ़ जाती है. इसका उपयोग मेडिसिन, कॉस्मेटिक, डिटरजेंट समेत अन्य सामानों में उपयोग में लाया जाता है. लेमन ग्रास का तेल 2 हजार से 4 हजार प्रति किलोग्राम तक बाजार में बिकता है.

लेमन ग्रास की खेती से न सिर्फ ग्रामीण महिलाएं स्वावलंबी बन रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भर बन कर दूसरी महिलाओं को प्रोत्साहित भी कर रही हैं. यही कारण है कि रविवार (26 जुलाई, 2020) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में गुमला की ग्रामीण महिलाओं द्वारा की जा रही लेमन की खेती की सराहना भी की है. गुमला के बिशुनपुर प्रखंड में विकास भारती के अलावा जेएसएलपीएस (झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी) से जुड़ीं सखी मंडल की महिलाएं लेमन ग्रास की खेती कर रही है.

राज्य के 5 जिलों में होती है लेमन ग्रास की खेती

औषधीय पौधे लेमन ग्रास की खेती झारखंड के 5 जिलों के 10 प्रखंडों में होती है. इसके तहत खूंटी जिला का खूंटी प्रखंड, सिमडेगा के तीन प्रखंड टेठईटांगर, जलडेगा और बानो, लातेहार के मनिका और बरवाडीह प्रखंड, गुमला के बिशुनपुर और डुमरी प्रखंड तथा हजारीबाग के कटकमसांडी और दारू प्रखंड में लेमन की खेती होती है.

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एक पौधे से कई फायदे

लेमन ग्रास से कई फायदे हैं. एक तो इसकी पत्तियों को सूखा कर चाय में उपयोग किया जा सकता है. वहीं, इसे सूखा कर और तेल निकाल कर मेडिसिन के अलावा साबुन, फिनाइल, फ्लोर क्लिनर, अगरबत्ती, कॉस्मेटिक आदि में उपयोग किया जाता है. एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इन्फ्लेमेटरी व एंटी-फंगल आदि गुणों से भरपूर होने के कारण यह कई तरह की बीमारियों और संक्रमण से बचाता है. इसमें 75 फीसदी सिट्रल पाया जाता, जिसके कारण ही इसकी खुशबू नींबू जैसी होती है. इसमें मौजूद विटामिन और मिनरल इम्यून सिस्टम को बढ़ावा देने का काम करता है. वहीं, इसमें आयरन की मात्रा होने के कारण यह एनीमिया रोगियों के लिए लाभदायक होता है. इसके नियमित सेवन से शरीर में आयरन की कमी को पूरा किया जा सकता है.

4 महीने में तैयार होते पौधे

शुरुआत के समय लेमन ग्रास के पौधे 4 महीने में तैयार हो जाते हैं. इसके बाद हर 3-3 महीने में इसे उपयोग में लाया जा सकता है. झारखंड में 12,500 ग्रामीण महिलाएं इस कार्य में लगी है. खेतों की देखभाल से लेकर पत्तियों की कटाई और पत्तियों से तेल निकालने में इसकी सहभागिता रहती है. इस कार्य के लिए जेएसएलपीएस हरसंभव सहयोग करता है.

लागत कम मुनाफा अधिक

एक एकड़ खेत में लेमन ग्रास की खेती करने में 24 हजार रुपये की लागत आती है. 4 महीने बाद जब खेत में लेमन ग्रास तैयार हो जाता है, तो इसकी कीमत 90 हजार रुपये हो जाती है. इस प्रकार एक एकड़ खेत से किसान को 60 से 65 हजार रुपये की आमदनी होती है. वहीं, लेमन ग्रास का एक डंठल 25 पैसे पीस बिकता है. इसी डंठल के पौधे से तेल निकाला जाता है. बताया गया कि करीब 5000 किलोग्राम लेमन ग्रास के डंठल से करीब 80 किलोग्राम तक तेल निकल जाता है. वहीं, लेमन ग्रास की पत्तियां काफी महंगी बिकती है. खुदरा बाजार में 50 ग्राम पत्तियों की कीमत करीब 40 रुपया होती है.

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3 से 4 हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक बिकता है तेल

औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण लेमन ग्रास से निकले हुए तेल की काफी मांग है. बोतल में पैक कर खुदरा बाजारों में इसे 3 से 4 हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक बेचा जाता है, जबकि थोक व्यापारियों को इसे करीब 2000 रुपये प्रति किलोग्राम तक बेचा जाता है. लेमन ग्रास ऑयल का 30 ग्राम का बोतल पैक करीब 230 रुपये का आता है.

बिशुनपुर प्रखंड में 50 आदिवासी महिलाएं 28 एकड़ में कर रही खेती

झारखंड राज्य के घोर उग्रवाद प्रभावित गुमला जिला अंतर्गत बिशुनपुर प्रखंड की 50 आदिवासी महिलाएं 28 एकड़ खेत में लेमन ग्रास की खेती कर रही हैं. 2 साल पहले शुरू हुई लेमन ग्रास की खेती ने आज पूरे देश में अपनी पहचान बना लिया है. प्रधानमंत्री ने बिशुनपुर में हो रहे लेमन ग्रास की खेती की प्रशंसा किये हैं. आदिवासी महिलाएं लेमन ग्रास की खेती कर अपना जीवन स्तर सुधार रही है. बेती, नवागढ़, सेरका गांव में इसकी खेती की जा रही है.

केस स्टडी 1 : लेमन ग्रास की खेती से अच्छी हो रही आमदनी

नवागढ़ गांव की महिला किसान देवंती देवी, सुशांति देवी और सुमित्रा देवी ने कहा कि 2 साल पहले लेमन ग्रास की खेती की शुरुआत हुई. वर्ष 2019 में लेमन ग्रास से तेल निकाला गया. जिसे विकास भारती ने खरीदा. इसके बाद दूसरे राज्यों में भी संस्था के माध्यम से तेल भेजा गया था. लेमन ग्रास की खेती से अच्छी आमदनी हो रही है. पीएम की प्रशंसा से हम सभी खुश हैं. आगे और खेती करेंगे.

केस स्टडी 2 : जेएसएलपीएस से हमेशा मिलता सहयोग- रूपमती देवी

कोरोना वायरस संक्रमण के बीच लेमन ग्रास की खेती ग्रामीण महिलाओं के लिए आशा की किरण बन कर आयी है. गुमला के बिशुनपुर प्रखंड में करीब 1500 स्वयं सहायता समूह की दीदियों को लेमन ग्रास आजीविका का मुख्य जरिया बन गया है. चमेली देवी स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष रूपमती देवी कहती हैं कि समूह से लोन लेकर लेमन ग्रास की खेती शुरू की. शुरुआत में 50 डिसमिल में इसकी खेती, जो अब बढ़ कर 65 एकड़ में हो गया है. कहती हैं कि लेमन ग्रास की खेती से कई फायदे हैं. एक तो खेती से पानी की बचत होती है, वहीं इसके साथ अन्य कृषि गतिविधियां भी की जा सकती है. कहती हैं कि जेएसएलपीएस के साथ कृषि विज्ञान केंद्र का हमेशा सहयोग मिला है. लेमन ग्रास से तेल निकालने के लिए पहले खूंटी जाया करती थी, लेकिन अब केवीके के माध्यम से बालूमाथ और नवासेरका में 2 तेल निकालने की मशीन लगी है, इससे काफी राहत मिली है. कहती हैं कि एक एकड़ में लगे लेमन ग्रास से 50 लीटर तेल निकाला जाता है. इन तेलों को ग्रामीण सेवा केंद्र या जेएसएलपीएस के माध्यम से बिक्री की जाती है. उन्हें प्रति लीटर 1400 से 1500 रुपये की आमदनी हो जाती है.

लेमन ग्रास ने बदली महिलाओं की तकदीर : डॉ संजय

कृषि विज्ञान केंद्र, गुमला के वैज्ञानिक डॉ संजय पांडेय ने कहा कि पूरे बिशुनपुर प्रखंड में 60 एकड़ खेत में लेमन ग्रास की खेती करनी है. 2 साल पहले प्रयोग के तौर पर 28 एकड़ खेत में 50 महिलाओं ने खेती शुरू की. जिसका परिणाम है. खेती से न केवल महिलाओं की तकदीर बदल रही है, बल्कि बिशुनपुर प्रखंड लेमन ग्रास से तेल बनाने वाला प्रखंड बन गया है. अभी और 32 एकड़ खेत में लेमन ग्रास की खेती करनी है. इसकी तैयारी चल रही है.

Posted By : Samir Ranjan.

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