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Sarhul 2023: सरहुल के दिन पाहन करते हैं भविष्यवाणी - अकाल पड़ेगा या होगी उत्तम वर्षा

Updated at : 23 Mar 2023 2:42 PM (IST)
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Sarhul 2023: सरहुल के दिन पाहन करते हैं भविष्यवाणी - अकाल पड़ेगा या होगी उत्तम वर्षा

Sarhul 2023|परंपरा है कि सरहुल पर्व के दौरान गांव का पुजारी, जिसे पाहन भी कहते हैं, भविष्यवाणी करते हैं कि गांव में अच्छी वर्षा होगी या फिर अकाल पड़ेगा. इसके लिए पाहन मिट्टी के तीन पात्र लेते हैं. उसमें ताजा पानी भरते हैं. अगले दिन सुबह-सुबह मिट्टी के तीनों पात्रों को बारी-बारी से देखते हैं...

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Sarhul Festival 2023: आदिवासी सदियों से जंगलों में रहते आये हैं. प्रकृति की पूजा करते हैं. इनकी आजीविका कृषि पर निर्भर है. सरहुल के दिन ही आदिवासी कृषि कार्य शुरू करते हैं. खासकर गेहूं (रबी) की नयी फसल की कटाई शुरू होती है. सरहुल के पर्व के साथ प्रकृति और परंपराएं भी जुड़ी हैं. इसी दिन पता चलता है कि इस वर्ष अकाल पड़ेगा या अच्छी वर्षा होगी.

भविष्यवाणी करते हैं पाहन

परंपरा है कि सरहुल पर्व के दौरान गांव का पुजारी, जिसे पाहन भी कहते हैं, भविष्यवाणी करते हैं कि गांव में अच्छी वर्षा होगी या फिर अकाल पड़ेगा. इसके लिए पाहन मिट्टी के तीन पात्र लेते हैं. उसमें ताजा पानी भरते हैं. अगले दिन सुबह-सुबह मिट्टी के तीनों पात्रों को बारी-बारी से देखते हैं और तब भविष्यवाणी करते हैं कि इस साल गांव में अकाल पड़ेगा या अच्छी वर्षा होगी.

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इस तरह होती है भविष्यवाणी

कहते हैं कि जिस पात्र में पाहन ने एक दिन पहले पानी भरा, था अगर उसका जलस्तर कम हो जाता है, तो पाहन उस वर्ष ‘अकाल’ की भविष्यवाणी करते हैं. अगर पानी का स्तर सामान्य रहता है, तो उसे अच्छा संकेत माना जाता है. तब पाहन ‘उत्तम वर्षा’ की भविष्य‍वाणी करते हैं. सरहुल पूजा के दौरान सरना स्थल यानी पूजा स्थल को ग्रामीणों के द्वारा घेरा जाता है.

चार दिन तक चलता है सरहुल का त्योहार

बता दें कि सरहुल का पर्व चार दिनों का त्योहार है. इसकी शुरुआत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को होती है और चैत्र पूर्णिमा के दिन इसका समापन होता है.

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सरहुल के चार दिन तक क्या-क्या होता है

सरहुल के ‘पहले दिन’ मछली के अभिषेक किए हुए जल को घर में छिड़का जाता है. ‘दूसरे दिन’ उपवास रखा जाता है. हर घर की छत पर पाहन ‘साल के फूल’ का गुच्छा रखता है. तीसरे दिन पाहन उपवास रखते हैं. ‘सरना’ (पूजा स्थल) पर सरई के फूलों (सखुआ के फूल का गुच्छा अर्थात् कुंज) की पूजा की जाती है.

पूरे गांव में बंटता है सुंडी का प्रसाद

तीसरे दिन ही ‘मुर्गी की बलि’ देने की भी परंपरा है. मुर्गी के मांस और चावल को मिलाकर खिचड़ी पकायी जाती है. इसे सुंडी कहते हैं. बाद में इसे प्रसाद के रूप में पूरे गांव में बांट दिया जाता है. चौथे और आखिरी दिन ‘गिड़िवा’ नामक स्थल पर सरहुल फूल का विसर्जन कर दिया जाता है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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