प्रवासी मजदूरों से डरने की जरूरत नहीं, घर लौटे चार लाख श्रमिकों में से मात्र 0.13 प्रतिशत ही कोरोना पॉजिटिव
Author : Rajneesh Anand Published by : Prabhat Khabar Updated At : 04 Jun 2020 2:17 PM
four lakhs migrant labourers returned jharkhand only 0.13 percent of them are Corona positive : बात अगर आंकड़ों की करें तो झारखंड लौटने के लिए लगभग साढ़े सात लाख प्रवासी श्रमिकों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिसमें से लगभग चार लाख वापस लौट चुके हैं. ऐसे में चार लाख में से 526 श्रमिकों का कोरोना संक्रमित निकलना कोई डराने वाले आंकड़े नहीं हैं, क्योंकि प्रतिशत की बात करें तो वापस लौटे प्रवासी मजदूरों में से मात्र 0.13 प्रतिशत ही कोरोना पॉजिटिव हैं.
रांची : मई महीने में जब प्रवासी मजदूर अपने राज्य वापस लौटना शुरु हुए तो झारखंड में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ी. झारखंड में कुल 726 कोरोना संक्रमितों में से 526 प्रवासी मजदूर हैं. यानी कुल केस के 72 प्रतिशत से भी अधिक प्रवासी मजदूर हैं. बात अगर आंकड़ों की करें तो झारखंड लौटने के लिए लगभग साढ़े सात लाख प्रवासी श्रमिकों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिसमें से लगभग चार लाख वापस लौट चुके हैं. ऐसे में चार लाख में से 526 श्रमिकों का कोरोना संक्रमित निकलना कोई डराने वाले आंकड़े नहीं हैं, क्योंकि प्रतिशत की बात करें तो वापस लौटे प्रवासी मजदूरों में से मात्र 0.13 प्रतिशत ही कोरोना पॉजिटिव हैं.
झारखंड में अभी कोरोना मरीजों का आंकड़ा 726 है, हालांकि राज्य में कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा अभी तक मात्र पांच ही है. प्रदेश में कोरोना के कुल एक्टिव मामले 401 हैं. कल प्रदेश में 55 कोरोना संक्रमण के मामले सामने आये हैं.
जिलावार प्रवासी मजदूरों की संख्या की बात करें तो सबसे ज्यादा मामले पूर्वी सिंहभूम से हैं. यहां अबतक 122 कोरोना संक्रमित मिल हैं, जिनमें से 100 प्रवासी मजदूर हैं. कल भी यहां से 13 कोरोना पॉजिटिव मिले हैं. उसके बाद हजारीबाग जिला है, जहां कुल संक्रमित 82 हैं, जिनमें से 77 प्रवासी मजदूर हैं. तीसरे स्थान पर धनबाद है, जहां से कुल 70 संक्रमित मिले हैं और जिनमें से 64 प्रवासी मजदूर हैं.
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चौथे स्थान पर गढ़वा जिला है, जहां कुल संक्रमित 62 हैं और जिनमें से 59 प्रवासी मजदूर हैं. पांचवें स्थान पर कोडरमा जिला है, जहां से 46 प्रवासी मजदूर मिले हैं. रामगढ़ जिले में भी कुल संक्रमित 44 है और वे सभी प्रवासी मजदूर हैं. बात अगर रांची जिले की करें तो यह अबतक कुल 138 मामले सामने आये हैं, जिनमें से 26 प्रवासी मजदूर हैं. गुमला जिले में भी कुल 22 कोरोना संक्रमित हैं जिनमें से 21 प्रवासी मजदूर हैं.
गौरतलब है कि प्रवासी मजदूरों का यह आंकड़ा दो मई से तीन जून तक का है. कोरोना वायरस के खिलाफ जारी जंग के दौरान जब देश में लॉकडाउन शुरू हुआ तो प्रवासी मजदूरों के पास काम नहीं था, जिसके कारण वे अपने-अपने घर वापस लौट गये. इस क्रम में उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा. कई मजदूर तो हजारों किलोमीटर पैदल चलकर आये हैं.
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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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