Fodder Scam : लालू प्रसाद यादव से जुड़े चारा घोटाला में सीबीआई ने किस आधार पर हाईकोर्ट में जमानत का विरोध किया, पढ़िए ये रिपोर्ट

Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 25 Nov 2020 8:58 AM

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Fodder Scam : रांची : बहुचर्चित चारा घोटाला मामले में सजा काट रहे बिहार के पूर्व सीएम सह राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की जमानत मामले में सीबीआई ने झारखंड हाईकोर्ट में जवाब दाखिल किया. इसमें सीबीआई ने कहा है कि लालू प्रसाद यादव ने चारा घोटाले के जिस मामले में जमानत की मांग की है, उस मामले में सीबीआई कोर्ट से उन्हें मिली सजा की आधी अवधि पूरी नहीं हुई है. सीबीआई ने इस दौरान सीआरपीसी की धारा 427 का हवाला देते हुए कहा कि दुमका कोषागार से अवैध निकासी मामले में से जुड़े चारा घोटाला में लालू प्रसाद यादव एक दिन भी जेल में नहीं रहे हैं.

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Fodder Scam : रांची : बहुचर्चित चारा घोटाला मामले में सजा काट रहे बिहार के पूर्व सीएम सह राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की जमानत मामले में सीबीआई ने झारखंड हाईकोर्ट में जवाब दाखिल किया. इसमें सीबीआई ने कहा है कि लालू प्रसाद यादव ने चारा घोटाले के जिस मामले में जमानत की मांग की है, उस मामले में सीबीआई कोर्ट से उन्हें मिली सजा की आधी अवधि पूरी नहीं हुई है. सीबीआई ने इस दौरान सीआरपीसी की धारा 427 का हवाला देते हुए कहा कि दुमका कोषागार से अवैध निकासी मामले में से जुड़े चारा घोटाला में लालू प्रसाद यादव एक दिन भी जेल में नहीं रहे हैं.

लालू प्रसाद यादव की ओर से दुमका कोषागार से अवैध निकासी मामले में हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की गई है. उनकी ओर से सजा की आधी अवधि जेल में काटने और हृदय रोग, किडनी व शुगर सहित 16 प्रकार की बीमारियों का हवाला देकर जमानत की मांग की गयी है. आपको बता दें कि लालू प्रसाद यादव पर झारखंड में कुल पांच मामले चल रहे हैं. इनमें से चार मामलों में उन्हें सजा मिल चुकी है. लालू को पहले ही चाईबासा के दो एवं देवघर मामले में जमानत मिल चुकी है, जबकि दुमका कोषागार मामले में उन्होंने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है. डोरंडा कोषागार मामले में अभी निचली अदालत में सुनवाई चल रही है.

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सीबीआई ने हाईकोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 427 का हवाला देकर जमानत का विरोध किया है. इसके तहत सजा काट रहे किसी व्यक्ति को दूसरे मामले में दोबारा सजा सुनाई जाती है, तो सजा लगातार चलेगी. जब तक कि निचली अदालत अपने आदेश में यह स्पष्ट न करे कि सजाएं एक साथ चलेंगी. सीबीआई का दावा है कि लालू प्रसाद यादव के मामले में भी ऐसा ही हुआ है. उनके मामले में न तो निचली अदालत ने सजा चलाए जाने को लेकर कोई स्पष्ट आदेश दिया है और न ही लालू की ओर इसके लिए निचली अदालत में कोई आवेदन दिया गया है. ऐसे में पहली सजा पूरी होने के बाद ही दूसरी सजा शुरू मानी जाएगी.

Posted By : Guru Swarup Mishra

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