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झारखंड में डेंगू के मामले 1400 के पार, आधे से ज्यादा स्वास्थ्य मंत्री के जिले से, रोकथाम के लिए इंतजाम नहीं

Updated at : 29 Sep 2023 7:29 AM (IST)
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झारखंड में डेंगू के मामले 1400 के पार, आधे से ज्यादा स्वास्थ्य मंत्री के जिले से, रोकथाम के लिए इंतजाम नहीं

दबी जुबान में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी यह मान रहे हैं कि निजी अस्पतालों में 15 से 20 फीसदी ज्यादा डेंगू के मरीजों का इलाज हुआ है या चल रहा है. यानी मरीजों की वास्तविक संख्या, सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा है

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रांची: स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता दावा कर रहे हैं कि कोरोना की तर्ज पर रिपोर्ट तैयार कर डेंगू मरीजों की मॉनिटरिंग की जा रही है. अस्पतालों में मरीजों का इलाज भी बेहतर ढंग से हो रहा है. हालांकि, उनके दावे के बावजूद राज्य में डेंगू पीड़ितों का सरकारी आंकड़ा 1,400 के पार पहुंच गया है. इनमें आधे से ज्यादा मरीज स्वास्थ्य मंत्री के जिले पूर्वी सिंहभूम के ही हैं. वैसे हकीकत सरकारी आंकड़ों से अलग है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में सबसे ज्यादा 804 डेंगू के मरीज पूर्वी सिंहभूम के हैं. यह सरकारी कुल आंकड़े का करीब 57 फीसदी है. कोल्हान की बात करें, तो पूर्वी सिंहभू, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में अब तक 8,600 सैंपलों की जांच हो चुकी है, जिसमें कुल 1,026 डेंगू पीड़ितों की पुष्टि हो चुकी है. फिलहाल, यहां 230 मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं. इधर, रांची में अब तक डेंगू के 110 मरीज मिल चुके हैं, जबकि, निजी अस्पतालों में फिलहाल 130 से ज्यादा डेंगू के मरीज भर्ती हैं. उधर, साहिबगंज में 170 और धनबाद में 75 डेंगू पीड़ित मिले हैं.

डेंगू पीड़ितों से भरे पड़े हैं राज्य के निजी अस्पताल भी

डेंगू के प्रकोप की जमीनी हकीकत इन सरकारी आंकड़ों से बिल्कुल अलग है. राज्य के निजी अस्पतालों के अधिकांश बेड डेंगू पीड़ितों से भरे पड़े हैं. दबी जुबान में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी यह मान रहे हैं कि निजी अस्पतालों में 15 से 20 फीसदी ज्यादा डेंगू के मरीजों का इलाज हुआ है या चल रहा है. यानी मरीजों की वास्तविक संख्या, सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा है. बड़ी संंख्या में घर में भी लोग डेंगू का इलाज करा रहे हैं. यह आंकड़ा भी सरकार के रिकॉर्ड में नहीं है.

डेंगू की रोकथाम के लिए सरकारी स्तर पर कोई इंतजाम नहीं

सबसे चिंताजनक यह है कि सरकारी स्तर से अब तक डेंगू की रोकथाम के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किये गये हैं. राजधानी के कई इलाके डेंगू का ‘रेड जोन’ बने हुए हैं, इसके बावजूद सफाई और फॉगिंग में सुस्ती बरती जा रही है. हालांकि, स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि सभी सरकारी व निजी अस्पतालों में 10 प्रतिशत बेड डेंगू मरीजों के लिए आरक्षित किये गये हैं.

स्वास्थ्य विभाग और निकायों में तालमेल नहीं

राज्य में डेंगू के मरीजों की तादाद लगातार बढ़ रही है, इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग और संबंधित नगर निकायों में तालमेल नहीं है. स्वास्थ्य विभाग ने सात सितंबर को डेंगू को लेकर गाइडलाइन जारी कर दी थी. लेकिन, किसी भी स्तर से इसकी मॉनिटरिंग नहीं की जा रही है. हालत यह है कि अखबारों में खबरें प्रकाशित होने के बाद निकायों और स्वास्थ्य विभाग की टीम संबंधित इलाकों में पहुंच कर लार्वा की जांच करती है.

मंत्री बोले, विभाग गंभीर, नियंत्रण को लेकर उठाये जा रहे कदम

स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता दावा करते हैं कि विभाग इस बीमारी को लेकर गंभीर है और इसके नियंत्रण को लेकर ठोस कदम भी उठा रहा है. श्री गुप्ता ने कहा : सभी नगर निकायों को स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय स्थापित करते हुए जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिये गये हैं. कोरोना की तर्ज पर रिपोर्ट तैयार कर डेंगू मरीजों की मॉनिटरिंग की जा रही है. खून की कालाबाजारी नहीं हो, इसके लिए एड्स कंट्रोल सोसाइटी को भी निर्देश दिये गये हैं. सभी सरकारी व निजी अस्पतालों में 10 प्रतिशत बेड डेंगू मरीजों के लिए आरक्षित किया गया है. वहीं, दूसरी तरफ नगर निगम क्षेत्र में जल जमाव को खत्म करने, एंटी लार्वा केमिकल का छिड़काव करने के निर्देश दिये गये हैं. पहले जमशेदपुर व साहिबगंज में डेंगू का प्रकोप बढ़ा था, लेकिन फिलहाल दोनों जगहों पर स्थिति नियंत्रण में है.

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