अधिवक्ताओं को बीमा का लाभ देंगे, कोर्ट फीस कम करने पर भी विचार : CM हेमंत सोरेन
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 08 Jan 2023 7:38 AM
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जहां कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की, वहीं कोर्ट फीस को कम करने पर विचार करने का भी आश्वासन दिया है. उन्होंने सभी अधिवक्ताओं के लिए दुर्घटना व स्वास्थ्य बीमा की योजना लाने की बात कही.
झारखंड में कोर्ट फीस बढ़ोत्तरी के खिलाफ राज्य के अधिवक्ता आंदोलनरत हैं. इसी बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में पहली बार मुख्यमंत्री अधिवक्ता संवाद कार्यक्रम का आयोजन सीएम आवास में किया. संवाद कार्यक्रम में विभिन्न जिलों के बार काउंसिल सदस्य, एपीपी तथा अधिवक्ता शामिल हुए. इन्हें संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने जहां कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की, वहीं कोर्ट फीस को कम करने पर विचार करने का भी आश्वासन दिया है. उन्होंने सभी अधिवक्ताओं के लिए दुर्घटना व स्वास्थ्य बीमा की योजना लाने की बात कही. इसके तहत अधिवक्ता सपरिवार प्रति वर्ष बेहतर इलाज के लिए पांच लाख रुपये तक की सहायता राशि प्राप्त कर सकेंगे.
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में जितने भी बार कांप्लेक्स बनेंगे वह लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब, मीटिंग हॉल, महिलाओं के लिए जरूरी सुविधा सहित आधुनिक सुविधाओं से युक्त होंगे. बार भवनों में कंप्यूटर तथा इंटरनेट की भी सुविधा सरकार उपलब्ध करायेगी. श्री सोरेन ने एकलव्य प्रशिक्षण योजना, मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना एवं गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना, मॉडल स्कूल का जिक्र करते हुए अधिवक्ताओं को भी अपने बच्चों के लिए योजनाओं का लाभ लेने की सलाह दी. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पहला ऐसा मौका है जब मुख्यमंत्री अधिवक्ता संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया है.
छोटे-छोटे वादों में बंद कैदियों को न्याय दिलाना प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हमारे जिलों में एक बड़ी संख्या में विचाराधीन कैदी बंद हैं. विचाराधीन है क्योंकि सही से विचार के लिए उन्हें समय नहीं मिल पा रहा है. अगर इन कैदियों की जाति की बात करें या आय की बात करें तो उनमें से ज्यादातर आदिवासी/दलित/पिछड़े एवं अल्पसंख्यक हैं. छोटे-छोटे अपराध में वे वर्षों से जेल में बंद हैं. ऐसे कैदियों को भी वकील उपलब्ध कराया जा सके इस निमित्त हमारी सरकार प्रयासरत है. मौके पर महाधिवक्ता राजीव रंजन ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर विस्तृत प्रकाश डाला.इस अवसर पर झारखंड स्टेट बार काउंसिल के प्रतिनिधि रामसुभाग सिंह, अध्यक्ष डिस्ट्रिक्ट बार धनबाद अमरेंद्र सहाय, जीपी गोड्डा अब्दुल कलाम आजाद एवं मेंबर बार काउंसिल तथा ट्रस्टी कमेटी डिस्ट्रिक्ट बार जमशेदपुर के अनिल तिवारी ने मुख्यमंत्री को अधिवक्ताओं की समस्याओं पर संवाद के जरिये ध्यान आकृष्ट कराया.
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कोर्ट फीस पीड़ादायक न बने
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से कोर्ट फीस वृद्धि हम सभी के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. ज्यूडिशियल स्टांप जो 1995 में पांच रुपये था उसे लगभग 27 साल बाद 20 रुपये किया गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर कोर्ट फीस में कमी करने का कोई रास्ता निकलता है तो सरकार उस पर भी विचार करेगी. राज्य सरकार का मानना है कि कोई भी निर्णय आम जनता के लिए पीड़ादायक न बने इसका सदैव ख्याल रखा जाना चाहिए.
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