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मात्र 20 पैसे में एक व्यक्ति को सैनिटाइज कर देता है ‘काजरी’ का ‘टनल’, ऐसे करता है काम

Updated at : 16 Apr 2020 3:14 PM (IST)
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मात्र 20 पैसे में एक व्यक्ति को सैनिटाइज कर देता है ‘काजरी’ का ‘टनल’, ऐसे करता है काम

tunnel of cazri sanitizes a person for just 20 paise जयपुर : केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) ने एक ऐसा स्वत: संक्रमण मुक्त बनाने वाला ‘टनल’ बनाया है, जिससे संस्थान में प्रवेश करने से पहले हर व्यक्ति संक्रमण से मुक्त हो सकेगा. इसमें एक व्यक्ति को संक्रमणरहित करने पर केवल 20 पैसे का खर्च आता है.

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जयपुर : केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) ने एक ऐसा स्वत: संक्रमण मुक्त बनाने वाला ‘टनल’ बनाया है, जिससे संस्थान में प्रवेश करने से पहले हर व्यक्ति संक्रमण से मुक्त हो सकेगा. इसमें एक व्यक्ति को संक्रमणरहित करने पर केवल 20 पैसे का खर्च आता है.

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संस्थान के एक प्रवक्ता के अनुसार, काजरी द्वारा निर्मित यह ‘सेल्फ-डिसइनफैक्टेंट टनल’ संस्थान के प्रवेश द्वार पर लगाया गया है. इसे एल्यूमीनियम पाइप और विशेष पॉलीथिन शीट की मदद से बनाया गया है. ‘टनल’ के अंदर छिड़काव के लिए मशीन लगायी गयी है, जो आधा हॉर्सपावर के पंप की मदद से चलती है.

इस टनल के दोनों ओर बिजली के स्विच लगाये गये हैं, ताकि कोई भी व्यक्ति इसे स्वयं ही चालू और बंद कर सके. इसमें 500 लीटर क्षमता की एक टंकी का इस्तेमाल किया गया है. ‘टनल’ से बाहर निकलने के बाद व्यक्ति अपने हाथ और चेहरा धो सके, इसके लिए वॉश बेसिन और पानी की व्यवस्था की गयी है.

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काजरी की इस ‘टनल’ की लागत केवल 15 हजार रुपये है. काजरी की यह पहल संस्थान के वैज्ञानिकों और अन्य कर्मचारियों को कोरोना संक्रमण से बचाने में मददगार साबित हो रही है. जोधपुर स्थित केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) के वैज्ञानिक मरु व शुष्क क्षेत्र के किसानों के लिए खेती-बाड़ी और सिंचाई की नयी और आधुनिक तकनीक विकसित करने का काम करते हैं.

राजस्थान सरकार किसानों को मक्का व बाजरे के बीज मुफ्त देगी

राजस्थान सरकार ने खरीफ सीजन 2020 के लिए किसानों को मक्का और बाजरे के प्रमाणित बीज निःशुल्क उपलब्ध कराने का निर्णय किया है. कोरोना वायरस संक्रमण से उपजे संकट के बीच राज्य के किसानों को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान राज्य बीज निगम लिमिटेड द्वारा राष्ट्रीय बीज निगम से प्रमाणित बीजों की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. इस फैसले से राज्य के लाखों किसानों को फायदा होने की उम्मीद है.

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वित्त विभाग के प्रस्ताव के अनुसार, खरीफ सीजन के दौरान प्रदेश के अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में पांच लाख किसानों को मक्का के प्रमाणित बीज के पांच किलोग्राम के मिनीकिट और सभी बाजरा उत्पादक जिलों के 10 लाख किसानों को 1.5 किलोग्राम के बाजरा के प्रमाणित बीज के मिनीकिट निःशुल्क उपलब्ध कराये जायेंगे.

मुख्यमंत्री ने राज्य बीज निगम को राष्ट्रीय बीज निगम से खरीफ सीजन 2020 के लिए सोयाबीन के 26 हजार क्विंटल प्रमाणित बीज और 14 हजार क्विंटल सोयाबीन के आधार बीज की खरीद के लिए भी स्वीकृति दे दी है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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