Rajasthan Election 2023: 70 साल के किसान ने राजस्थान में बढ़ा दी बीजेपी की टेंशन! जानें क्या है पूरा मामला
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 07 Oct 2023 9:57 AM
Rajasthan Election 2023 : बीजेपी के द्वारा जारी इस पोस्टर के बाद जिस किसान ने आपत्ति जताई है उसका नाम माधुराम जयपाल है जो जैसलमेर के एक गांव का रहने वाला है. जानें इस किसान ने क्या किया दावा
Rajasthan Election 2023 : राजस्थान में विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस और बीजेपी पूरा जोर लगाते हुए नजर आ रही है. प्रदेश में बीजेपी ने विधानसभा चुनाव अभियान ‘नहीं सहेगा राजस्थान’ शुरू किया है जो विवाद में पड़ गया है. बीजेपी के द्वारा जारी किए गए एक पोस्टर पर विवाद खड़ा होने से पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती है. दरअसल, जैसलमेर के एक बुजुर्ग ने दावा किया है कि इस पोस्टर में इस्तेमाल की गई फोटो उसकी है और उसे गलत तरीके से पेश करने का काम किया गया है. पोस्टर की बात करें तो यह किसानों के मुद्दे से संबंधित है जिसमें बीजेपी ने दावा किया है कि उन्नीस हजार से अधिक किसानों की जमीन नीलाम करने का काम किया गया है. इस पोस्टर को कई जगह पर होर्डिंग के तौर पर बीजेपी के द्वारा लगाया गया है. पोस्टर में एक किसान की तस्वीर है जो अब सामने आया है.
कौन है वो किसान जिसने बढ़ाई बीजेपी की टेंशन
राजस्थान बीजेपी के द्वारा जारी इस पोस्टर के बाद जिस किसान ने आपत्ति जताई है उसका नाम माधुराम जयपाल है जो जैसलमेर के एक गांव का रहने वाला है. इस किसान की उम्र 70 साल है. जयपाल ने दावा किया कि पोस्टर में इस्तेमाल की गई तस्वीर उनकी है और बीजेपी के दावे से उनका कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने उनकी फोटो का गलत इस्तेमाल किया है. उन्होंने कहा कि उन्होंने स्थानीय बीजेपी नेताओं से फोटो हटाने को कहा है अन्यथा वह कानूनी कार्रवाई करेंगे.
माधुराम के बेटे जुगताराम ने क्या कहा
मामले पर बुर्जुग किसान माधुराम के बेटे जुगताराम ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि हम बीजेपी से मेरे पिता की तस्वीर हटाने का अनुरोध करते हैं. सोशल मीडिया यूजर इस पोस्टर के जारी होने के बाद लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं जिससे हम परेशान हैं. हमारी कोई जमीन नीलाम नहीं हुई और न ही हम पर कर्ज है. हम अपने खेत में बैठे हैं. उन्होंने कहा कि पोस्टर में पार्टी की ओर से किया गया दावा झूठा है.
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मामले पर कांग्रेस ने क्या दी प्रतिक्रिया
मामले पर कांग्रेस ने की प्रतिक्रिया सामने आई है. कांग्रेस के स्थानीय प्रवक्ता रूघदान झीबा ने कहा है कि बीजेपी ने एक पोस्टर बनाया है जिसमें एक आदमी की तस्वीर लगाई गई थी. उसके माध्यम से यह उजागर किया गया था कि उसकी जमीन कर्ज के कारण नीलाम की गई थी, जबकि उस आदमी (माधुराम जयपाल) पर न तो कोई कर्ज है और न ही उसकी जमीन नीलाम की गई है. जैसलमेर में स्थानीय बीजेपी नेताओं की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई.
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने क्या कहा
राजस्थान की राजधानी जयपुर में प्रदेश मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि बीजेपी बेनकाब हो गई है. गहलोत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मैंने भी सुना है कि उस किसान ने तो बीजेपी की धज्जियां उड़ा दी. उसने (किसान ने) कहा कि मैं मुकदमा दर्ज करवाऊंगा.. मुझे बदनाम कर दिया है. आप सोच सकते हैं कि ये कितने झूठे लोग हैं. ये झूठ बोलकर चुनाव में आगे बढना चाहते है.
राजस्थान का ट्रेंड
आपको बता दें कि इस बार कांग्रेस सत्ता में वापसी का दावा कर रही है. लेकिन यदि हम पिछले 20 साल में राजस्थान में हुए चार विधानसभा चुनाव पर नजर डालें तो कोई भी पार्टी लगातार दूसरी बार सरकार बनाने में सफल होती नजर नहीं आयी. सत्ताधारी पार्टी के विधायक दोबारा चुनाव मैदान में उतरते हैं तो उनमें से ज्यादातर को जनता नकार देती है. जनता का सबसे ज्यादा गुस्सा मंत्रियों पर निकलता है, पिछली चार सरकारों में मंत्री रहे ज्यादातर नेता अगले चुनाव में हारते नजर आ चुके हैं. इसको देखकर राजस्थान का ट्रेंड आप सहज समझ सकते हैं कि प्रदेश की जनता हर पांच साल में सरकार बदल देती है. हालांकि कांग्रेस नेता ये दावा करते दिख रहे हैं कि सूबे में इस बार कांग्रेस फिर सत्ता पर काबिज होगी और राजस्थान का ट्रेंड बदलेगा.
भाषा इनपुट के साथ
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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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