Kathetaer Samay: अमिताभ राय बोले- 'कथेतर समय' कोई मुहावरा नहीं, आज की जरूरत

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Kathetaer Samay: कथेतर गद्य पर बात करते हुए अशोक वाजपेयी ने ऑक्टेवियो पाज, रिल्के, मुक्तिबोध और त्रिलोचन का जिक्र किया. उन्होंने रचनात्मकता पर भी प्रकाश डाला.
Kathetaer Samay: नयी दिल्ली के साहित्य अकादमी सभागार में ‘कथेतर समय’ का आयोजन मंगलवार 27 फरवरी को किया गया. सेतु प्रकाशन समूह के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमिताभ राय ने कहा, कथेतर समय आज के समय का कोई मुहावरा नहीं, बल्कि आज के समय की जरूरत है. अक्स, मलयज के पत्र और रोजनामचा सहित तमाम कथेतर कृतियों के सन्दर्भ में वरिष्ठ साहित्यकार अशोक वाजपेयी, आलोचक ज्योतिष जोशी, प्राध्यापक-कथाकर गरिमा श्रीवास्तव एवं प्रवीण कुमार ने बड़ी ही तथ्यात्मक और रोचक बातें सामने रखीं.
अशोक वाजपेयी ने की कथेतर पद्य पर चर्चा
कथेतर गद्य पर बात करते हुए अशोक वाजपेयी ने ऑक्टेवियो पाज, रिल्के, मुक्तिबोध और त्रिलोचन का जिक्र किया. उन्होंने रचनात्मकता पर भी प्रकाश डाला. वाजपेयी ने इन सबके बीच उनके उन पत्रों का जिक्र किया जिससे गुजरते हुए हम उनके रिश्तों के व्याकरण ज्यादा बेहतर ढंग से समझ पाते हैं.
ज्योतिष जोशी ने ‘रोजनामचा’ को अपने साहित्यिक जीवन का आइना बताया
ज्योतिष जोशी ने कहा कि विख्यात आलोचक, कवि और नाट्यविद श्री नेमिचन्द्र जैन की डायरी की पुस्तक ‘रोजनामचा’ उनके साहित्यिक जीवन के विशाल फलक का वह आइना है जिसमें उनके दैनन्दिन निजी जीवन के साथ-साथ कला, साहित्य, संस्कृति, राजनीति सहित अपने वर्तमान और आगत भविष्य का समग्र लेखा-जोखा है.
गरिमा श्रीवास्तव ने पत्रों के विभेदीकरण की बात की
गरिमा श्रीवास्तव पत्रों के विभेदीकरण की बात समझाते हुए, मानवीय सम्बन्धों की प्रगाढ़ता पर पहुंचती हैं. मलयज द्वारा उनके कठिन दिनों में उनकी बहन प्रेमा को लिखे गये कुछ पत्रों का उद्धरण देते हुए कहती हैं ये पत्र वे दस्तावेज हैं जिसने उनके बीच के स्नेहिल आत्मीय उष्मा की आंच को आज तक बचा रखा है.
प्रवीण कुमार ने अखिलेश को प्रेमचन्द की धारा का लेखक बताया
प्रवीण कुमार ने स्पष्ट कहा कि अखिलेश प्रेमचन्द की धारा के लेखक हैं. जहां जैनेन्द्र, अज्ञेय और निर्मल वर्मा के यहां दर्शन के आगे जीवन बहुत छोटा दिखता है, वहीं प्रेमचन्द की परम्परा के अखिलेश के यहां जीवन के आगे दर्शन बहुत छोटा दिखता है. यह उनकी विविधता का संसार है, जिसमें जीवन का सामना करने की ललक ज्यादा है और दर्शन गढ़ने का कम.
अखिलेश की पुस्तक ‘अक्स’ पर हिमांशु वाजपेयी और प्रज्ञा शर्मा ने शानदार प्रस्तुति दी
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में अखिलेश की पुस्तक ‘अक्स’ को आधार बनाकर जाने-माने किस्सागो हिमांशु वाजपेयी और प्रज्ञा शर्मा ने शानदार प्रस्तुति दी. सेतु प्रकाशत समूह द्वारा आयोजित इस महत्त्वपूर्ण गोष्ठी में काफी तादाद में साहित्य प्रेमियों, शोधकर्ताओं और प्राध्यापकों ने शिरकत की.
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