एलीट

ज्योतिष के अनुसार 15 अगस्त का दिन आजादी के लिए शुभ नहीं था, तब पंडित नेहरू ने किया था ये उपाय…

Updated:
विज्ञापन
15 august 1947

क्या भारत को आजादी अशुभ मुहूर्त में मिली थी?

Story Of Partition Of India 5 : अंग्रेजों की गुलामी से भारत पूरे दो सौ साल बाद आजाद हुआ था. लेकिन यह आजादी अपने साथ तबाही भी लेकर आई थी. 10 लाख लोगों की मौत विभाजन के बाद हुए दंगों में हो गई थी. आजादी के महज छह माह बाद ही महात्मा गांधी की हत्या हो गई और पाकिस्तान ने भी कश्मीर पर हमला कर दिया था, जिसमें हजारों लोगों की जान गई थी. उस वक्त भारत की आजादी के मुहूर्त को लेकर चर्चा हुई थी और ज्योतिषाचार्यों ने कहा था कि 15 अगस्त का दिन आजादी के लिए शुभ नहीं है.

विज्ञापन

Story Of Partition Of India 5 : 18 जुलाई 1947 को भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम पारित किया गया. इस अधिनियम के पास होने से यह तय हो गया कि भारत अब  आजाद हो जाएगा और उसके दो टुकड़े हो जाएंगे. इससे पहले 3 जून 1947 को कांग्रेस और मुस्लिम लीग के नेताओं ने भारत के विभाजन को स्वीकार कर लिया था. इस बात की सूचना जब रेडियो द्वारा प्रसारित हुई और महात्मा गांधी तक सूचना पहुंची, तो वे बहुत निराश हुए. उन्होंने देश के विभाजन को भयानक बहुत ही भयानक कहा था. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम से यह तो तय हो गया था कि भारत को स्वतंत्रता देश के विभाजन के साथ मिल रही है, लेकिन अंग्रजों के जाने की तिथि अभी घोषित नहीं थी, क्योंकि सत्ता हस्तांतरण का काम पूरा नहीं हुआ था, जो बहुत ही महत्वपूर्ण था.

भारत के विभाजन की खबर का महात्मा गांधी पर कैसा था असर

Mahatma Gandhi with Mountbatten in 1947
भारत के विभाजन का महात्मा गांधी पर असर

महात्मा गांधी को जिस दिन यह सूचना मिली कि भारत को आजादी विभाजन के साथ मिलेगी, वह उनके मौन का दिन था. महात्मा गांधी हमेशा यह कहते थे कि देश के विभाजन से पहले वे अपने शरीर के दो टुकड़े कर देंगे. लेकिन उनके सामने देश के टुकड़े हुए और उनके शागिर्दों ने इसपर सहमति भी दे दी. 4 जून को गांधीजी कांग्रेस के नेताओं से नाता तोड़कर अपनी प्रार्थना सभा में इस निर्णय की आलोचना करने वाले थे. यह खबर मिलते ही वायसराय माउंटबेटन उनसे मिलने पहुंचे और उन्हें समझाया कि आप ही कहते थे कि देश का विभाजन होगा या नहीं यह हिंदुस्तानियों पर छोड़ दिया जाए, तो यह हिंदुस्तानियों की ही इच्छा है. माउंटबेटन ने गांधी जी को कई तरह के तर्क देकर समझाने की कोशिश की, जिसमें वे काफी हद तक सफल भी हो गए. गांधी जी प्रार्थना सभा में पहुंचे,तो उन्होंने कहा कि विभाजन के लिए वायसराय को दोष देने का कोई फायदा नहीं है. आप सब अपने मन को टटोलिए तब पता चलेगा कि जो हुआ, वह क्यों हुआ. 

इसे भी पढ़ें : क्या आप जानते हैं, भारत ने पाकिस्तान को क्यों नहीं दिया था चावल और ताजमहल के नहीं किए थे टुकड़े?

जब मांओं ने बेटियों को जिंदा जला दिया, वक्त का ऐसा कहर जिसे सुनकर कांप जाएगी रूह

विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर पढ़ने के लिए क्लिक करें

कैसे हुई थी आजादी की तिथि की घोषणा

माउंटबेटन एक संवाददाता सम्मेलन में अपनी योजनाओं की जानकारी दे रहे थे. बता रहे थे कि किस तरह पावर ट्रांसफर होगा. इस संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों का मजमा लगा था. सभी सवाल पूछ रहे थे और इस संवाददाता सम्मेलन का अंतिम प्रश्न एक भारतीय पत्रकार ने किया और उनसे पूछा कि सत्ता हस्तांतरण के लिए कोई तिथि निर्धारित की गई है क्या? इसपर माउंटबेटन ने उनसे कहा कि जी हां, बिलकुल तिथि निर्धारित है. माउंटबेटन ने अचानक ही अपने मन से यह बता दिया कि भारत को आजादी 15 अगस्त को मिलेगी.

क्या भारत को आजादी अशुभ मुहूर्त में मिली थी? 

independence of india
भारत की स्वतंत्रता का मुहूर्त

माउंटबेटन द्वारा आजादी की तिथि घोषित किए जाने के बाद जब यह सूचना रेडियो द्वारा प्रसारित हुई कि भारत को आजादी 15 अगस्त 1947 को मिलेगी तो भारतीय ज्योतिषियों को झटका लग गया. उनके अनुसार यह तिथि शुभ नहीं थी. कोलकाता के एक ज्योतिष मदनानंद ने तो माउंटबेटन को एक पत्र भी लिखा था जिसमें यह जिक्र था कि यह अनर्थ ना करें, भारत को 15 अगस्त को आजादी ना दें. इस दिन अगर भारत को आजादी मिली तो नरसंहार होगा. बाढ़, अकाल जैसी त्रासदी का सामना करना पड़ सकता है. इससे अच्छा तो यह हो कि भारत एक और दिन गुलामी की त्रासदी सह ले. इस बात का जिक्र डोमिनीक लापिएर और लैरी काॅलिन्स की किताब फ्रीडम एट नाइट में किया गया है. वरिष्ठ पत्रकार दुर्गादास ने अपनी किताब ‘इंडिया – फ्राम कर्जन टू नेहरू एंड आफ्टर’ में भी इस बात का जिक्र किया है कि 15 अगस्त का दिन आजादी के लिए शुभ नहीं माना गया था. इसका रास्ता निकालने के लिए नेहरू जी ने दिल्ली के ज्योतिषों से बात की और फिर शुरू हुई ज्योतिषीय गणना. गणना के बाद यह तय हुआ कि भारत को आजादी 15 अगस्त (अंग्रेजी तारीख से रात के 12 बजे) को ही मिलेगी, लेकिन ज्योतिषीय गणना के अनुसार दिन की शुरुआत उदयातिथि से होती है और उससे पहले का समय आजादी के लिए शुभ था. यानी भारत को आजादी ज्योतिषीय गणना के अनुसार शुभ मुहूर्त में मिली थी.

इसे भी पढ़ें : अफगानिस्तान के कबीलाई परिवार से थे सैफ अली खान के पूर्वज, जानिए अभी परिवार में कौन-कौन हैं सदस्य

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम ब्रिटिश संसद से कब पारित हुआ था?

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम ब्रिटिश संसद से 18 जुलाई 1947 को पारित हुआ था.

भारत की आजादी की तारीख किसने घोषित की थी?

भारत की आजादी की तारीख लॉर्ड माउंटबेटन ने घोषित की थी.

विज्ञापन
रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola

Frequently Asked Questions

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम ब्रिटिश संसद से 18 जुलाई 1947 को पारित हुआ था.