कौन हैं लेक्स फ्रीडमैन, जिनका पीएम मोदी के साथ एक्सक्लूसिव पॉडकास्ट आज होगा जारी

Edited by Rajneesh Anand
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्चर हैं लेक्स फ्रीडमैन ,

Lex Fridman : अमेरिका के विश्व प्रसिद्ध पॉडकास्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्चर लेक्स फ्रीडमैन का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पॉडकास्ट 16 मार्च को जारी होगा. इस पॉडकास्ट को करने के लिए लेक्स फ्रीडमैन ने भारत की यात्रा की. लेक्स फ्रीडमैन ने जनवरी में ही यह जानकारी दे दी थी कि वे पीएम मोदी का पॉडकास्ट करने के लिए पहली बार भारत की यात्रा करेंगे. अपने बेहतरीन प्रजेंटेशन और रिसर्च की वजह से चर्चा के केंद्र में रहने वाले लेक्स फ्रीडमैन ने पहली बार किसी भारतीय के साथ पॉडकास्ट किया है.

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Lex Fridman : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक्सक्लूसिव पॉडकास्ट रविवार को शाम 5:30 बजे जारी होगा. एक्स पर इस पॉडकास्ट के बारे में जानकारी दी गई है. पीएम मोदी के एक्स हैंडिल से इस पॉडकास्ट को एक्सक्लूसिव बताया गया है. इस पॉडकास्ट में प्रधानमंत्री के जीवन से जुड़ी कई बातें और उनके विजन से संबंधित सूचनाएं सामने आएंगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह पॉडकास्ट प्रसिद्ध अमेरिकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस  रिसर्चर लेक्स फ्रीडमैन (Lex Fridman) नाम के पॉडकास्टर ने शूट किया है. लेक्स फ्रीडमैन ने अपने एक्स हैंडिल पर इस बात की जानकारी जनवरी में ही दे दी थी. लेक्स फ्रीडमैन ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है-मैं फरवरी के अंत में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक पॉडकास्ट करूंगा. मैं कभी भारत नहीं गया, इसलिए मैं वहां की ऐतिहासिक संस्कृति और उसके अद्भुत लोगों के कई पहलुओं का अनुभव करने के लिए उत्साहित हूं.

कौन हैं लेक्स फ्रीडमैन

लेक्स फ्रीडमैन एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्चर हैं. वे ऑस्टिन और बोस्टन में रहते हैं. लेकिन उनका जन्म सोवियत सोशलिस्ट रिपब्लिक में हुआ था, जो अब उज्बेकिस्तान में है. 11 साल की उम्र में वे शिकागो आ गए थे. लेक्स फ्रीडमैन ने 2015 में मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान से पढ़ाई की है. वे एक वैज्ञानिक है. लेक्स फ्रीडमैन की रुचि इंसानों और रोबोट में है. इन्होंने डीप लर्निंग( deeplearning AI) का कोर्स किया है. अपने पॉडकास्ट के जरिए चर्चित होने वाले लेक्स फ्रीडमैन ने कई जाने-माने लोगों के साथ पॉडकास्ट शूट किया है. कुछ चर्चित पॉडकास्ट की बात करें तो लेक्स फ्रीडमैन ने एलोन मस्क, मार्क जुकरबर्ग, वोलोडिमिर जेलेंस्की, सैम हैरिस, जो रोगन, विटालिक ब्यूटिरिन, ग्रिम्स, डैन कार्लिन, रोजर पेनरोज, जॉर्डन पीटरसन, रिचर्ड डॉकिन्स, लिव बोएरी, लियोनार्ड सुस्किंड, डेविड फ्रावर, कान्ये वेस्ट, डोनाल्ड हॉफमैन और रिक रुबिन के साथ पॉडकास्ट किया है. 

पहली बार किसी भारतीय के साथ पॉडकास्ट करेंगे लेक्स फ्रीडमैन

लेक्स फ्रीडमैन कभी भारत नहीं आए हैं और जिस प्रकार उन्होंने एक्स पर पोस्ट लिखा है उससे यह बात साफ है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यहां की प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,डिजिटलाइजेशन, डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसे मुद्दों पर बात करेंगे. इसके साथ ही वे यहां की सभ्यता और संस्कृति को भी समझने की कोशिश करेंगे. चूंकि लेक्स फ्रीडमैन एक विश्वस्तरीय पॉडकास्टर है, इसलिए इस पॉडकास्ट की चर्चा वैश्विक मंच पर होने की उम्मीद है.

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लेक्स फ्रीडमैन अपनी बेहतरीन अदायगी और बेबाकी के लिए हैं प्रसिद्ध

प्रसिद्ध पॉडकास्टर लेक्स फ्रीडमैन अपनी बेबाकी और प्रेंजटेशन के लिए प्रसिद्ध हैं. यू-ट्यूब पर उनके चैनल के 4.51 मिलियन सब्सक्राइबर हैं.लेक्स फ्रीडमैन का सबसे लेटेस्ट वीडियो यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के साथ किया गया पॉडकास्ट है. इस पॉडकास्ट को मात्र 13 दिन में 4.7 मिलियन लोगों ने देखा है. लेक्स फ्रीडमैन के पॉडकास्ट में एक व्यक्ति के जीवन से जुड़ी विभिन्न पहलुओं पर बात करते हैं. लेक्स फ्रीडमैन ने 2018 में अपने पॉडकास्ट की शुरुआत की थी.

पॉडकास्ट क्या है?

पॉडकास्ट की शुरुआत एप्पल कंपनी के फाउंडर स्टीव जॉब्स ने अपने प्रोडक्ट iTunes और iPod के लिए की थी. शुरुआती दौर में पॉडकास्ट इंटरनेट पर उपलब्ध एक ऑडियो फाइल होता था, लेकिन अब इसमें वीडियो भी शामिल हो चुका है. वर्तमान दौर में पॉडकास्ट इंटरनेट के दुनिया की चर्चित विधा है. भारत में पॉडकास्टिंग की शुरुआत साल 2006 में हुई थी.

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पीएम मोदी ने पहला पॉडकास्ट किसके साथ किया था?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना पहला पॉडकास्ट जीरोधा के सह संस्थापक निखिल कामथ के साथ किया.

भारत में कब आया था पॉडकास्ट ?

भारत में पॉडकास्ट 2006 में आया था.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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