रोहित-विराट भी नहीं बचा पाए लाज, 24 साल बाद टेस्ट सीरीज में भारत की हार

Edited by Rajneesh Anand
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India vs New Zealand : भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले जा रहे टेस्ट सीरीज में न्यूजीलैंड ने भारत को बुरी तरह पराजित करके सीरीज अपने नाम कर लिया है. दक्षिण अफ्रीका ने 1999/2000 के सीरीज में भारत को हराया था उसके बाद अपनी धरती पर यह भारत की पहली हार है. भारतीय टीम लगातार 18 सीरीज अपने होम ग्राउंड पर जीत चुकी थी, लेकिन खिलाड़ियों के शर्मनाक प्रदर्शन की वजह से टीम विजयी अभियान थम गया है. पढ़ें विस्तृत रिपोर्ट.

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India vs New Zealand : न्यूजीलैंड ने भारत को उसकी ही सरजमीं पर रौंद कर पहली बार भारत में टेस्ट सीरीज जीतने का रिकाॅर्ड अपने नाम कर लिया है. कीवीज ने भारत को तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला में 2-0 से पछाड़कर कर सीरीज अपने नाम किया है. न्यूजीलैंड के लिए यह जीत बहुत खास इसलिए भी है क्योंकि उसने भारत के विजयरथ को रोका है. भारतीय टीम लगातार 18 घरेलू टेस्ट सीरीज जीतने का विश्व रिकाॅर्ड बना चुकी थी, लेकिन अब उसका विजयी अश्व रोक दिया गया है. 

न्यूजीलैंड ने भारत में पहली बार टेस्ट सीरीज जीतने का रिकाॅर्ड बनाया

न्यूजीलैंड की टीम ने भारतीय धरती पर पहली बार टेस्ट सीरीज जीतने का रिकाॅर्ड बनाया है. न्यूजीलैंड ने भारत में 1955 से 2024 के बीच 13 टेस्ट सीरीज खेले हैं, जिनमें से एक में उसे अब जीत हासिल हो गई है. पहला टेस्ट सीरीज 1955-56 में खेला गया था जिसमें कुल पांच मैच खेले गए थे और भारत ने इस सीरीज को 2-0 से जीता था. 1964-65 में चार मैचों की सीरीज खेली गई थी, जिसे भारत ने 1-0 से जीता था. 1969-70 में सीरीज ड्रा रही थी, इसमें कुल तीन मैच खेले गए थे और दोनों टीमों ने एक-एक मैच जीता था और एक मैच ड्रा खेला गया था. 1976-77 में तीन मैचों की सीरीज खेली गई जिसे भारत ने 2-0 से जीता था. 1988-89 में तीन मैचों की सीरीज खेली गई जिसे भारत ने 2-1 से जीता था. उसके बाद 1995-96 में तीन मैचों के सीरीज को भारत ने 1-0 से जीता था. 1999 में तीन मैचों के सीरीज को 1-0 से जीता. 2003-04 में दो मैच की सीरीज 0-0 से ड्रा खेली गई. 2010-11 में तीन मैचों की सीरीज 1-0 से भारत ने जीता, 2012 में दो मैचों की सीरीज 2-0 से भारत ने जीता. उसके बाद भारत ने 2016-17 में तीन मैचों के सीरीज को 3-0 से जीता और 2021-22 में दो मैचों के सीरीज को भी भारत ने 1-0 से जीता. 2024 में तीन मैचों का सीरीज खेला जा रहा है जिसे न्यूजीलैंड ने 2-0 से जीत लिया है तीसरा मैच अभी खेला जाना है. यानी कुल रिकाॅर्ड यह कहता है कि अबतक खेले गए टेस्ट सीरीज में न्यूजीलैंड ने सिर्फ सीरीज और चार मैच जीते हैं. न्यूजीलैंड ने एक मैच 1969 में, दूसरा 1988 में, तीसरा और चौथा 2024 में खेला गया.

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2024 के टेस्ट सीरीज में भारत का प्रदर्शन शर्मनाक

2024 में भारत की धरती पर न्यूजीलैंड जो टेस्ट सीरीज खेल रहा है, उसमें भारत का प्रदर्शन बहुत ही खराब है. पहला मैच बेंगलुरु में खेला गया था, जिसे कीवीज ने आठ विकेट से जीता था. इस मैच में भारतीय टीम ने अपनी धरती पर न्यूनतम स्कोर का रिकाॅर्ड भी बना दिया था क्योंकि पूरी टीम महज 46 रन पर पवेलियन लौट गई थी. दूसरे इनिंग में टीम इंडिया ने 462 रन बनाया, लेकिन न्यूजीलैंड की टीम ने लक्ष्य को आसानी से पूरा कर लिया था. दूसरे टेस्ट में भी भारतीय पारी लड़खड़ा गई और भारतीय टीम किसी भी इनिंग में 250 का आंकड़ा भी नहीं छू पाई. यशस्वी जायसवाल ने दूसरी इनिंग में 77 रन बनाए बाकी कोई भी खिलाड़ी 50 रन तक भी नहीं पहुंच पाया. विराट कोहली का प्रदर्शन भी बहुत खराब रहा, उन्होंने पहली पारी में एक और दूसरी पारी में मात्र 17 रन बनाए. कप्तान रोहित शर्मा भी कुछ खास नहीं कर पाए और पहली पारी में शून्य और दूसरी पारी में आठ रन बनाए.

18 टेस्ट सीरीज जीतने के बाद रूका विजय रथ

भारतीय टीम अपनी धरती पर लगातार 18 टेस्ट सीरीज जीती थी, लेकिन अब न्यूजीलैंड ने उसके विजयी अभियान पर रोक लगा दिया है. लगातार 18 सीरीज जीतने का रिकाॅर्ड भारत के नाम ही दर्ज था. भारत के दौरे पर आने वाली टीमों में से सबसे ज्यादा बार टेस्ट सीरीज इंग्लैंड ने जीता है, उसने पांच बार टेस्ट सीरीज जीता है जिसमें से आखिरी जीत 2012-13 में दर्ज की गई थी. वेस्ट इंडीज की टीम भी पांच बार टेस्ट सीरीज जीत चुकी है, उसके 1983-184 में अंतिम टेस्ट सीरीज जीता था. आस्ट्रेलिया चार बार टेस्ट सीरीज जीती है, जिसमें से अंतिम 2004-05 में खेला गया था. पाकिस्तान ने 1986-87 में टेस्ट सीरीज जीता था, उसके बाद साउथ अफ्रीका ने 1999/2000 में टेस्ट सीरीज जीता. उसके बाद 2024 में न्यूजीलैंड ने भारत को हराया.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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