PHOTOS: रैंप वॉक में दिखा झारखंडी ट्राइबल परिधान, राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने की सराहना
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Dec 2022 1:41 PM
आज के युवा झारखंडी कला-संस्कृति को नयी पहचान देने में जुटे हुए हैं. यह पहल फैशन इंडस्ट्री में देखी जा रही है. युवा फैशन डिजाइनर राज्य के पारंपरिक परिधान को सोहराई पेंटिंग, मंडाला, कोहबर, मधुबनी जैसी कलाओं से आकर्षक बना रहे हैं. इनकी यही खूबी झारखंड की फैशन इंडस्ट्री में स्टार्टअप का रूप ले रही है.

हाल ही में आयोजित जनजातीय उत्सव में मॉडल ने झारखंडी पारंपरिक परिधान को रैंप पर उतारा. इसे ट्राइबल फैशन इंडस्ट्री से जुड़े शहर के ही युवाओं ने पेश किया. फैशन शो की सराहना राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने भी की. उत्सव में राज्य के करीब हर जनजातीय परिधान को प्रदर्शित किया गया. इसके पीछे वर्षों की कड़ी मेहनत है, जिससे अब देश-विदेश के बड़े फैशन शो के रैंप पर जगह मिल रही है.

मुंडा, खड़िया, उरांव और हो जैसे तमाम समुदाय से जुड़े परिधान अब केवल पारंपरिक लाल पाड़ साड़ी, पंची, धोती, गमछा, टोपी तक सीमित नहीं रह गये हैं. फैशन डिजाइनर इसे अब मेंस वियर में कुर्ता, बंडी, जैकेट, ओवर कोट, स्कर्ट, फ्रॉक, टॉप और पगड़ी के रूप में पेश कर रहे हैं. इसके अलावा पारंपरिक परिधान में नयापन लाने के लिए पारंपरिक जेवर में भी आधुनिक कारीगरी की जा रही है.

कोराेना काल में 2020 में झारखंडी परिधानों को विश्व पटल पर लाने के लिए झारखंडी ट्राइबल कपड़े का चयन किया. युवाओं के लिए आधुनिक डिजाइन के कपड़ों को जोहार ग्राम ब्रांड से नया लुक देने में जुटे हैं. इसके लिए रातू हेसल में कार्यशाला की शुरुआत की. पारंपरिक परिधानों को जैकेट, बैग, काेट, स्कर्ट, प्लाजो, वन पीस के रूप में तैयार कर रहे हैं.

सिमडेगा के संगम कुमार बड़ाइक उरांव जनजाति के पारंपरिक परिधानों में नयापन दिखा रहे. इनके कपड़ों की डिमांड अब विवाह समारोह में होने लगी है. इसमें माय साड़ी, बरकी साड़ी, पिंधना साड़ी, लाल पाड़ साड़ी, बीरू गमछा, कुखेना गमछा शामिल हैं. संगम ने बताया कि वे दादा के पुश्तैनी काम को आगे बढ़ा रहे हैं. कांटाटोली, खादगढ़ा और बहुबाजार में तैयार पारंपरिक परिधान को आसानी से उपलब्ध करा रहे हैं.

हेहल निवासी अमित भगत 2004 से जनजातीय परिधान से जुड़े कारोबार कर रहे हैं. नये बदलाव के साथ पारंपरिक परिधान को शादी व पार्टी समारोह के लिए तैयार कराया है. रांची के युवा पारपंरिक कला-संस्कृति से जुड़े, इसके लिए बरियातू , हिदपीढ़ी और रातू में कार्यशाला के जरिये प्रशिक्षित भी कर रहे हैं. अमित लाल पाड़ साड़ी के अलावा सेरुआ साड़ी, कुखेना डिजाइन, बीरू डिजाइन काटी और धोती भी बनाते हैं. साथ ही संताल परगना की पांची साड़ी, मुंडा समाज की फूल साड़ी को भी तैयार कर रहे. अमित ने बताया कि वे एंटी क्लॉक थीम को प्रकृति के साथ जोड़कर कपड़ों का डिजाइन तैयार कर रहे हैं.

गढ़वा की नीलम मेहता ने झारखंड की ट्राइबल ज्वेलरी पर स्टार्टअप शुरू किया है. झारखंड की ट्राइबल ज्वेलरी हंसली, गोड़ाव , कनबाली, अंगूठी, हार, ब्रासलेट, चूड़ा और माला को डिजाइन कर रही हैं. इनकी डिजाइन की गयी ज्वेलरी अब दिल्ली से तैयार होकर रांची पहुंच रही है. इन ज्वेलरी को ऑक्सिडाइज सिल्वर पर तैयार किया जा रहा है. नीलम ने संत जेवियर कॉलेज से पढ़ाई की है. साथ ही फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट नोएडा से फैशन डिजाइनिंग की डिग्री हासिल की. इनकी ज्वेलरी अब राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में अपनी पहचान बना रही है.
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