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महामना की जयंती पर BHU में तीन दिवसीय पुष्प प्रदर्शनी का आगाज, नौ तसवीरों में देखें मनमोहक झलकियां

Updated at : 25 Dec 2021 8:11 PM (IST)
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महामना की जयंती पर BHU में तीन दिवसीय पुष्प प्रदर्शनी का आगाज, नौ तसवीरों में देखें मनमोहक झलकियां

मालवीय जी ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय की नींव 1916 में रखी थी. मदन मोहन मालवीय की जयंती पर शनिवार (25 दिसंबर) से काशी हिंदू विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय पुष्प प्रदर्शनी का आयोजन किया गया.

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Madan Mohan Malviya Birth Anniversary: काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय को उनकी 160वीं जयंती पर लोगों ने नमन किया. समूचे देश ने भारत मां के महान सपूत को याद किया और श्रद्धांजलि दी.

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पंडित मदन मोहन मालवीय जी को काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक के रूप में खासतौर पर याद किया जाता है. मालवीय जी शिक्षाविद के साथ स्वतंत्रता सेनानी के रूप में भी जाने जाते हैं.

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मालवीय जी ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय की नींव 1916 में रखी थी. मदन मोहन मालवीय की जयंती पर शनिवार (25 दिसंबर) से काशी हिंदू विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय पुष्प प्रदर्शनी का आयोजन किया गया.

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बीएचयू के मालवीय भवन में हर साल महामना की पावन स्मृति में तीन दिवसीय पुष्प प्रदर्शनी का आयोजन किया जाता है. इसमें कृषि और उद्यान विभाग भी शामिल होते हैं. प्रदर्शनी में सफल होने वालों को पुरस्कार दिया जाता है.

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इस खास प्रदर्शनी में फूलों के साथ ही कई चीजों को देखने के लिए लोग उमड़ पड़ते हैं. इस प्रदर्शनी में वाराणसी और इसके आसपास के शहरों के अलावा पूर्वांचल के लोग भी आते हैं.

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महामना मालवीय प्रकृति प्रेमी थे. वो कहते थे कि हरे-भरे पौधों के बीच जब बच्चे शिक्षा ग्रहण करेंगे तो वो सरल और दयालु बनेंगे. उनके विचार शुद्ध और उच्च कोटि के हो जाएंगे. महामना की प्रेरणा से बीएचयू कैंपस में लाखों फूल के पौधे लगाए गए हैं.

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महामना मालवीय ने 1916 में बसंत पंचमी के दिन बीएचयू की स्थापना की थी. महामना प्राकृतिक नियमों के हिसाब से जीवन जीने की शिक्षा देते थे. बीएचूय बनाने के समय भी प्राकृतिक माहौल का खास ख्याल रखा गया था.

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बीएचयू को सौ सालों से ज्यादा हो गए हैं. आज भी यह देश के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में शामिल है. विश्वविद्यालय के सिंह द्वार से परिसर में दाखिल करने के बाद आपको महामना के प्रकृति प्रेम की जानकारी मिल जाएगी.

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महामना मालवीय का जन्म 25 दिसंबर 1861 को प्रयागराज में हुआ था. उन्होंने 12 नवंबर 1946 को बनारस में अंतिम सांस ली थी. उनका जीवन प्रकृति को सहेजने और संजोने में भी समर्पित रहा था.

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