PM मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' पर महिला उद्यमियों ने कहा- लोकल को बनायेंगे वोकल, घरेलू उत्पाद बनेंगे ब्रांड
Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 20 May 2020 1:06 PM
पटना : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही 'वोकल फॉर लोकल' की बात कहते हुए घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देने की बात कही थी. उन्होंने देशवासियों से अपील की थी कि लोकल को वोकल बनाने में सहयोग करें. हम अपने देश के हुनरमंद को उनकी बनायी गयी चीजों से सराहेंगे और उन्हें अपनायेंगे, तो बढ़ावा मिलेगा. हमारे कारीगरों द्वारा हाथ की बनी चीजें इतनी खूबसूरत और टिकाऊ होती हैं कि बड़े ब्रांड को मात देने की ताकत रखती है. बस जरूरत है, उन्हें पहचान और अवसर देने की. हमारे राज्य और शहर में भी कई ऐसे हुनरमंद युवा और महिलाएं हैं, जो मामूली-सी चीज को अपने हुनर के दम पर बेशकीमती बना देते हैं.
पटना : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही ‘वोकल फॉर लोकल’ की बात कहते हुए घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देने की बात कही थी. उन्होंने देशवासियों से अपील की थी कि लोकल को वोकल बनाने में सहयोग करें. हम अपने देश के हुनरमंद को उनकी बनायी गयी चीजों से सराहेंगे और उन्हें अपनायेंगे, तो बढ़ावा मिलेगा. हमारे कारीगरों द्वारा हाथ की बनी चीजें इतनी खूबसूरत और टिकाऊ होती हैं कि बड़े ब्रांड को मात देने की ताकत रखती है. बस जरूरत है, उन्हें पहचान और अवसर देने की. हमारे राज्य और शहर में भी कई ऐसे हुनरमंद युवा और महिलाएं हैं, जो मामूली-सी चीज को अपने हुनर के दम पर बेशकीमती बना देते हैं. पेश है एक रिपोर्ट.
Also Read: Bihar Board 10th Result 2020: शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा बोले- बहुत जल्द जारी होने वाला है मैट्रिक का रिजल्टकुर्जी मगध कॉलोनी के रहनेवाले रंजीत कुमार पिछले 13 सालों से बांस की चीजें बना रहे हैं. इनके द्वारा बनाये गये बांस के सामान की पहुंच देश-विदेश तक है. वह बताते हैं कि 2006 में उन्होंने उपेंद्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान से इस कला को सीखा था. वहीं, साल 2011 में स्टेट अवॉर्ड से नवाजा गया. अभी उन्हें जितने भी ऑर्डर मिलते हैं, इसमें महिला उद्योग संघ और उपेंद्र महारथी शिल्प संस्थान विशेष योगदान रहता है.

अब तक उन्होंने सोनपुर, गांधी मैदान, नयी दिल्ली, कोलकाता, अहमदाबाद, सूरज कुंड आदि जगहों पर इनके स्टॉल और ट्रेनिंग दे चुके हैं. महिला उद्योग संघ की ओर से बल्क में ऑर्डर दिया जाता है, जिसे विदेश भेजा जाता है. बांस का लैंप, नाव, चूड़ी, बैकपीन, गणेश की प्रतिमा, वॉल हैंगिंग, कोस्टर, टी शेट आदि है. रंजीत बेशक लोकल लेवल पर काम कर रहे हैं, लेकिन इनका काम इतना खूबसूरत हैं कि मौका मिलने पर वे बड़े ब्रांड को मात दे सकते हैं. उन्होंने बताया कि इस कठिन दौन में हमारे जैसे छोटे उद्यमी अब सुकून से सांस ले सकेंगे. यह हमारी को हालत को सुधारने में काफी मदद करेगा. कम-से-कम लोकल प्रोडक्ट को ऊंचाई पर ले जाने में काफी अहम भूमिका होगी.
Also Read: बिहार में कोरोना वायरस संक्रमण के 54 नये मामले सामने आये, खगड़िया में सबसे अधिक 15 केस, कुल संक्रमितों की संख्या बढ़ कर हुई 1573मैनपुरा की रहनेवाली डॉ मृगनैनी पिछले 20 सालों से जूट आर्ट करती आ रही हैं. उन्होंने 2009 में उद्यमिता विकास मंच से इसकी ट्रेनिंग ली थी. साल 2011-12 में उन्हें स्टेट अवॉर्ड मिल चुका है. शुरुआत में इस कला को लेकर लोगों में जागरूकता नहीं थी, लेकिन पिछले पांच सालों में इसकी मांग बढ़ी हैं. जूट की बनी चूड़ियां, गुलदस्ता, फ्लावर पॉट, गुड़िया, चिड़िया, पालकी आदि की सबसे ज्यादा मांग रहती हैं. सिर्फ पटना में ही नहीं, बल्कि नयी दिल्ली, हरियाणा सूरज कुंड और मुंबई जैसे महानगरों में इनके द्वारा बनायी गयी चीजे हाथों- हाथ बिक जाती हैं.

वह बताती हैं कि सूरजकुंड में लगे एक मेले में केरल और कर्नाटक से आये लोगों ने इस कला की काफी सराहना की और ट्रेनिंग देने का ऑफर दिया. अभी वे फिलहाल मैं ऑन डिमांड चीजें तैयार करती हूं. वहीं, फ्री में ऑनलाइन क्लासेज भी देती हूं. वह बताती हैं कि कई बार लोग अन्य शहरों से ऑर्डर देते हैं और आकर उनसे सामान लेकर जाते हैं. अगर हमें सामान अवसर और बाजार मिले तो हम जैसे कई कलाकार सिर्फ देश में ही नहीं विदेशों में भी अपनी कला का लोहा मनवा सकते हैं.
Also Read: देश के 29 अलग-अलग हिस्सों से बिहार के 20 स्टेशनों पर आज आयेंगी 50 श्रमिक स्पेशल ट्रेनेंमधुबनी की रहनेवाली रेणु देवी ने सिक्की आर्ट अपनी मां से सीखा है. विभिन्न जगहों पर लगनेवाले उद्योग मेले और क्रॉफ्ट मेले में इनकी चीजों की काफी डिमांड रहती है. उपेंद्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान की ओर से उन्हें गोवा, सिक्किम, शिलांग, दिल्ली आदि जगहों पर डेमोंस्ट्रेशन के लिए जा चुकी हैं. इस दौरान उन्होंने वहां के लोगों को इस कला से जुड़ी ट्रेनिंग भी दी हैं. अपनी गांव के 50 महिलाओं को रोजगार दे रही हैं.

सिक्की कला में देवी-देवता, सूरज, कछुआ, चूड़ियां और अन्य चीजों की काफी मांग होती है. दिल्ली में लगनेवाले क्राफ्ट म्यूजियम, दिल्ली हाट और मुंबई में लगनेवाले मेले में इनके द्वारा बनाये गये सामान हाथों-हाथ बिक जाते हैं. उन्होंने बताया कि स्वदेशी से आत्मनिर्भरता की ओर प्रधानमंत्री का यह संदेश उद्यमियों में एक नयी ऊर्जा का संचार कर दिया है.
Also Read: ईद को लेकर सरकार ने दिया मई का वेतन 20 मई से देने का निर्देश : सुशील मोदी, कहा- सरकार सर्विस मोड में, विपक्ष चुनाव मोड मेंअलावलपुर गौरीचक की रहनेवाली मीनू देवी पिछले 15 सालों से सुजनी कला में अपना हुनर दिखा रही हैं. इन्होंने मुजफ्फरपुर की संजू देवी के नेतृत्व में इस कला को सीखा. साड़ी, शूट, दुपट्टा, कुशन कवर और रूमाल आदि पर एक से बढ़ कर एक काम कर रही हैं. सिर्फ पटना में लगनेवाले मेले में ही नहीं, बल्कि दिल्ली हाट से लेकर इंदौर, उज्जैन में भी इनकी कला काफी पसंद की जाती है.

मीनू बताती हैं कि ऑर्डर मिलने पर काम ज्यादा होता है. अब तक उनसे गांव की लगभग सौ से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हुई हैं. उन्होंने बताया की सुजनी कला के लिए वे इंदौर, उज्जैन, हजारीबाग, पटना आदि शहरों में जाकर ट्रेनिंग भी दे रही हैं. उन्होंने बताया कि अब महिलाएं आपके पास बननेवाले लोकल प्रॉडक्ट को जन-जन तक आसानी से पहुंचा पायेंगी.
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