कृषि कानून वापस: लालू ने कहा- पहलवानी से नहीं चलता देश, नीतीश ने पीएम के फैसले का किया स्वागत, गरमायी सियासत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा हाल में लागू किये गये तीन कृषि कानून को वापस करने के ऐलान के बाद बिहार की सियासत गरमा गयी है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस फैसले का स्वागत किया है वहीं तेजस्वी समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने तंज कसकर किसानों की जीत करार दिया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज इसबात का ऐलान कर दिया है कि सरकार उन तीनों कृषि कानून को वापस लेगी और रद्द करेगी, जिन कानूनों पर लंबे समय से विवाद छिड़ा हुआ है. इस फैसले का बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वागत किया है जबकि विपक्ष ने सरकार पर तंज कसकर इसे सत्तापक्ष की हार व किसानों और विपक्षी राजनीतिक दलों के संघर्षों की जीत करार दिया है.
केंद्र सरकार के द्वारा हाल में लागू किये गये तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के ऐलान के बाद अब देशभर की राजनीति इस मुद्दे पर गरामयी हुई है. बिहार में भी सियासी दलों के तरफ से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी है. सूबे के मुखिया नीतीश कुमार ने इस फैसले का स्वागत किया है. सीएम ने कहा कि ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने सब कुछ स्पष्ट कर दिया है. यह निर्णय उन्हीं का है. पहले भी निर्णय लिया गया था अब जो उचित लगा वह निर्णय हुआ है’.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि पीएम मोदी ने सब कुछ स्पष्ट कर दिया है. विपक्ष के लोग क्या बोलते हैं यह उनकी अपनी इच्छा है. किसानों को लेकर जो काम हो रहा है वह जारी रहेगा. वहां पर किसी तरह का असंतोष है ही नहीं. यह प्रधानमंत्री जी का निर्णय था और यह तीनों कानून संसद से पास हुआ था. ये निर्णय उन्हीं का है, इसलिए इस पर कोई प्रतिक्रिया हो नहीं सकती. उन्होंने सबकुछ स्पष्ट किया है. इसपर कोई प्रतिक्रिया जरुरी नहीं है.
प्रधानमंत्री के इस ऐलान पर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने प्रतिक्रिया दी है. आरजेडी सुप्रीमो ने इसे लेकर ट्ववीट किया है. उन्होंने लिखा किदेश संयम, शालीनता और सहिष्णुता के साथ-साथ विवेकपूर्ण, लोकतांत्रिक और समावेशी निर्णयों से चलता है, पहलवानी से नहीं.
विश्व के सबसे लंबे,शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक किसान सत्याग्रह के सफल होने पर बधाई।
पूँजीपरस्त सरकार व उसके मंत्रियों ने किसानों को आतंकवादी,खालिस्तानी,आढ़तिए,मुट्ठीभर लोग,देशद्रोही इत्यादि कहकर देश की एकता और सौहार्द को खंड-खंड कर बहुसंख्यक श्रमशील आबादी में एक अविश्वास पैदा किया।
— Lalu Prasad Yadav (@laluprasadrjd) November 19, 2021
देश संयम, शालीनता और सहिष्णुता के साथ-साथ विवेकपूर्ण, लोकतांत्रिक और समावेशी निर्णयों से चलता है ना कि पहलवानी से!
बहुमत में अहंकार नहीं बल्कि विनम्रता होनी चाहिए।
— Lalu Prasad Yadav (@laluprasadrjd) November 19, 2021
वहीं प्रधानमंत्री के इस ऐलान के बाद राजद ने तंज कसा है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इसे किसानों की जीत बताया है. तेजस्वी यादव ने इसे लेकर ताबड़तोड़ ट्वीट किया है. उन्होंने लिखा कि ”26 नवंबर से किसान आंदोलनरत थे. बिहार चुनाव नतीजों के तुरंत पश्चात हम किसानों के समर्थन में सड़कों पर थे. इसी दिन किसान विरोधी नीतीश-भाजपा ने इन कृषि कानूनों का विरोध एवं किसानों का समर्थन करने पर मुझ सहित हमारे अनेक नेताओं/कार्यकर्ताओं पर केस दर्ज किया.. किसानों की जीत हुई.”
एकता में शक्ति है। यह सबों की सामूहिक जीत है। बेरोजगारी,महंगाई,निजीकरण के ख़िलाफ हमारी जंग जारी रहेगी।
उपचुनाव हारे तो उन्होंने पेट्रोल-डीज़ल पर दिखावटी ही सही लेकिन थोड़ा सा टैक्स कम किया। UP,उत्तराखंड,पंजाब की हार के डर से तीनों काले कृषि क़ानून वापस लेने पड़ रहे है। https://t.co/EGklswiBOe
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) November 19, 2021
तेजस्वी ने लिखा कि ”उपचुनाव हारे तो उन्होंने पेट्रोल-डीज़ल पर दिखावटी ही सही लेकिन थोड़ा सा टैक्स कम किया’. UP,उत्तराखंड,पंजाब की हार के डर से तीनों काले कृषि क़ानून वापस लेने पड़ रहे है.” कांग्रेस प्रवक्ता अशितनाथ तिवारी ने इसे लेकर प्रतिक्रिया दी है. ट्वीट कर लिखा कि ‘जो लोग कह रहे थे कि चाहे कुछ भी हो जाए कानून वापस नहीं होंगे वो ये जान लें कि यह देश न किसी विचारधारा की बपौती है ना किसी नेता की…’
नादिरशाह,सदा नहीं रहते वक्त गवाह
लोकतंत्र है यह।चुनाव भी होता है।पूरा पश्चिमी यूपी किसानों का है।पूरा पंजाब किसानों का है।जो लोग कह रहे थे कि चाहे कुछ भी हो जाए कानून वापस नहीं होंगे वो ये जान लें कि यह देश न किसी विचारधारा की बपौती है ना किसी नेता की।
जय किसान #FarmersProtest— Asit Nath Tiwari (@AsitNathTiwari) November 19, 2021
Published By: Thakur Shaktilochan
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