भोजपुरी फिल्म सितमगर 15 अक्टूबर को हो रही रिलीज, पलामू के टाउन हॉल में होगा प्रीमियर शो
Published by : Guru Swarup Mishra Updated At : 06 Oct 2023 6:16 AM
भोजपुरी फिल्म सितमगर में कुल छह गाने हैं. जिनमें तीन काफी कर्णप्रिय हैं. ये तीन गीत हैं गुलरी के फूल, बनारस के पान और सजना हो. अन्य गाने ठीकठाक हैं. फिल्म में कोरियोग्राफी पलामू के रहने वाले मुंबई निवासी स्थापित कोरियोग्राफर सुदामा मिंज ने की है.
पलामू, सैकत चटर्जी: पलामू में, पलामू के लोगों के द्वारा, पलामू के लिए बनाई गई भोजपुरी फीचर फिल्म सितमगर 15 अक्टूबर को जब रिलीज होगी तो एकतरफ इसके सामने इतिहास बनाने के मौके होंगे तो दूसरी तरफ कई चुनौतियां भी होंगी. भूमिका फिल्म्स के बैनर तले इससे पहले भी भोजपुरी फिल्म डिफरेंट व कुछ शॉर्ट फिल्म बन चुकी है, पर बात सितमगर की है तो यह काफी संतुलित नजर आती है. पलामू के रहने वाले मुंबई के सीरियल और भोजपुरी फिल्मों के स्थापित अभिनेता कुमार युगांत उर्फ युगांत बद्री पांडेय भी इस फिल्म में एक दमदार चरित्र में नजर आएंगे. उनकी मौजूदगी फिल्म को रीच लुक देती है. युगांत इन दिनों इंडस्ट्री के काफी सफल चरित्र अभिनेताओं में हैं. पिछले कुछ फिल्मों में हीरोइन की कमी से जूझ रही भूमिका फिल्म्स ने सितमगर में बतौर हीरोइन मुंबई की रागिनी पासवान को आजमाया और उसने अपनी भूमिका में खरी उतरीं. खास कर फिल्म में रंजित और रागिनी की केमेस्ट्री जम रही है. इस फिल्म में कुल छह गाने हैं. जिनमें तीन काफी कर्णप्रिय हैं. ये तीन गीत हैं गुलरी के फूल, बनारस के पान और सजना हो. अन्य गाने ठीकठाक हैं. फिल्म में कोरियोग्राफी पलामू के रहने वाले मुंबई निवासी स्थापित कोरियोग्राफर सुदामा मिंज ने की है.
सितमगर की ये है स्टोरी
फिल्म सितमगर का सारांश है कि एक फौजी सेवानिवृत होकर गांव आता है, गांव में जमींदार सह गांव का मुखिया गांववालों पर झूठी हमदर्दी दिखाकर उनकी जमीन हड़पने का षडयंत्र करता है. हत्या को आत्महत्या कहके घड़ियाली आंसू बहाता है. इधर, शंकर शहर का मैकेनिक है, जिसे शहर में पढ़ी लिखी एक युवती से प्रेम हो जाता है. युवती का बाप एक लालची व्यक्ति है जो इस प्रेम के विरुद्ध है. इसी तरह विभिन्न घटनाक्रम और उतार चढ़ाव के बीच रहस्यों का उद्भेदन और किसान आत्महत्या के सच का पर्दाफाश करती है फिल्म सितमगर.
फिल्म में हैं कुल छह गाने
इस फिल्म में कुल छह गाने हैं. जिनमें तीन काफी कर्णप्रिय हैं. ये तीन गीत हैं गुलरी के फूल, बनारस के पान और सजना हो. अन्य गाने ठीकठाक हैं. फिल्म में कोरियोग्राफी पलामू के रहने वाले मुंबई निवासी स्थापित कोरियोग्राफर सुदामा मिंज ने की है, जो इस फिल्म को एक गति देती है. हीरो कमल रंजीत पर फिल्माए गए गीतों को उन्होंने खुद आवाज दिया है, जिससे स्पष्ट है कि भोजपुरी इंडस्ट्री के चलन के मुताबिक वो खुद को गायक-नायक के रूप में स्थापित करने में लगे हैं. इसमें वे कितने सफल होते हैं यह तो वक्त बताएगा पर फिलहाल फिल्म सितमगर में उनके गाए गीत सुनने में अच्छे लग रहे हैं.
मारधाड़ का जिम्मा सुमित वर्मन ने उठाया
फिल्म में कई सारे एक्शन दृश्य हैं, जिनमें जमकर मारधाड़ हुई है. इन मारधाड़ को पलामू के जाने माने कराटेकार सेंसई सुमित वर्मन ने निर्देशित किया है. वैसे तो सुमित ने कई फिल्मों में मारधार की जिम्मेवारी सम्हाली है पर इस फिल्म में उनका काम सराहनीय है. कुछ दृश्य में तकनीकी कमी जरूर है पर उसे साधन की कमी मानकर नजरंदाज किया जाना चाहिए.
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जम रही है रंजित और रागिनी की केमेस्ट्री
पिछले कुछ फिल्मों में हीरोइन की कमी से जूझ रही भूमिका फिल्म्स ने सितमगर में बतौर हीरोइन मुंबई की रागिनी पासवान को आजमाया और उसने अपनी भूमिका में खरी उतरीं. खास कर फिल्म में रंजित और रागिनी की केमेस्ट्री जम रही है. भावुक और गीतों के दृश्य में उनका अभिनय अच्छा है. रागिनी थोड़ी भारी शरीर की जरूर है पर इसीमे उसकी मासूमियत भी झलकती है. सहज अभिनय उसका प्लस पॉइंट है. मुख्य अभिनेता कमल रंजीत की डायलॉग डिलीवरी पहले की फिल्मों को अपेक्षा काफी निखरा है. एक्शन दृश्य के आसपास उनका मूवमेंट और संवाद अदायगी प्रभावशाली है. इस फिल्म के बाद यह उम्मीद किया जा सकता है की आने वाले समय में दूसरे प्रोडक्शन हाउस वाले भी उन्हे हीरो के रूप में कास्ट करे. इस फिल्म के बाद उनकी एक और फिल्म काली भी प्रदर्शन के लिए तैयार है, लेकिन बतौर अभिनेता रंजित की फिल्मी कैरियर का काफी कुछ फिल्म सितमगर की सफलता पर टिकी हुई है.
फिल्म को रीच बनाती है कुमार युगांत और मनोज पंडित की उपस्थिति
पलामू के रहने वाले मुंबई के सीरियल और भोजपुरी फिल्मों के स्थापित अभिनेता कुमार युगांत उर्फ युगांत बद्री पांडेय भी इस फिल्म में एक दमदार चरित्र में नजर आएंगे. उनकी मौजूदगी फिल्म को रीच लुक देती है. युगांत इन दिनों इंडस्ट्री के काफी सफल चरित्र अभिनेताओं में हैं. हालांकि इस फिल्म के ट्रेलर में उनकी उपस्थिति नगण्य रखी गई है, जिससे लगता है उनके स्टारडम को भुनाने में निर्माताओं से चूक हुई है. इंडस्ट्री के जाने माने खलनायक व चरित्र अभिनेता मनोज पंडित फिल्म सितमगर में अपने खतरनाक अंदाज में सितम ढाते नजर आएंगे. हमेशा की भांति इस फिल्म में भी वे मार भले खा ले पर अभिनय के मामले में अपने साथी अभिनेताओं पर छाए हुए है. उनके एक्टिंग में परिपक्वता साफ दिखता है. आंखों के इस्तेमाल में भी वे दूसरों पर बीस साबित हुए है.
पलामू के प्रसिद्ध ने मनवाया लोहा
इंडस्ट्री के हमेशा काम करने वाले कलाकारों के बीच पलामू के जाने माने रंगकर्मी प्रसिद्ध राम ने भी अपने अभिनय का लोहा मनवाया. इसी तरह मेलोडी नाट्य संस्था के वरीय रंगकर्मी अब्दुल हमीद ने भी सेवा निवृत फौजी को भूमिका में शानदार अभिनय किया है. इस फिल्म में पलामू की जानीमानी समाजसेविका सह उद्घोषिका शर्मिला वर्मा भी अपना अभिनय प्रतिभा का झलक दिखाई है. उनके साथ पलामू के स्टार सिंगर उमा शंकर मिश्रा, सुधीर मिश्रा, गौतम घोष, प्रिया राजहंस ने भी अपनी सशक्त उपस्तिथि दर्ज कराई है. इन सबके बीच रेणु शर्मा ने अपनी सहज अभिनय से सबका ध्यान खींचती है.
क्यों देखें और कैसे देखें फिल्म सितमगर
अब सबसे अंत में यह सवाल उठता है कि लगातार आ रही एक से एक बिग बजट और मल्टी स्टारर फिल्मों के बीच पलामू में बनी इस भोजपुरी फिल्म को क्यू देखना चाहिए, इसका बस एक ही जबाव है की इस फिल्म के निर्माता- निर्देशक के जीवटता, संघर्ष और सृजनशीलता को सम्मान करने के लिए यह फिल्म जरूर देखना चाहिए. फिल्म सितमगर के कहानी/पटकथा/संवाद और निर्देशन की जिम्मेवारी पलामू के वरीय रंगकर्मी पुलीन मित्रा ने सम्हाला है जबकि निर्माता भूमिका फिल्म्स है. पलामू में , पलामू के कलाकारों के द्वारा, पलामू के लिए फिल्म बनाना कितना जोखिम भरा काम है ये सभी समझ सकते है. निर्देशक श्री मित्रा ने इस कठिन काम को अंजाम दिया है इसके लिए न सिर्फ उनके साथ पूरी यूनिट को बधाई देना चाहिए बल्कि इस फिल्म को देखकर कला संस्कृति को जीवित रखने वालों का हौसला भी बढ़ाना चाहिए. फिल्म सितमगर 15 अक्टूबर को रिलीज हो रही है, पर पलामू में कोई हॉल नहीं होने के कारण यहां के लोग इसे एक दिन ही देख पाएंगे. आयोजकों ने इसका प्रीमियर शो का आयोजन टाउन हॉल में किया है, जिसका प्रवेश शुल्क 99 रुपये है. प्रवेश पत्र कल्याण मेडिको, साई हार्डवेयर, मां सर्वेश्वरी मोबाइल में मिल रहा है. इसके अलावा 8210270543 नंबर पर भी संपर्क किया जा सकता है.
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लेखक के बारे में
By Guru Swarup Mishra
मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.
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