ePaper

ठोस आर्थिक आधार

Updated at : 02 Apr 2024 9:02 AM (IST)
विज्ञापन
ठोस आर्थिक आधार

भारतीय अर्थव्यवस्था न केवल महामारी के साये से बाहर निकल चुकी है, बल्कि भू-राजनीतिक संकटों तथा वैश्विक संघर्षों का भी असर न के बराबर रहा है.

विज्ञापन

पिछले वित्त वर्ष 2023-24 के अंत तक भारतीय अर्थव्यवस्था के मुख्य आयामों की मजबूती को देखते हुए वित्त वर्ष 2024-25 में अच्छी बढ़ोतरी की उम्मीद बढ़ी है. नेशनल काउंसिल ऑफ अप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च की मासिक आर्थिक समीक्षा के अनुसार, फरवरी में परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स बढ़कर 56.9 हो गया, जो मैनुफैक्चरिंग में निरंतर वृद्धि को इंगित करता है. इंफ्रास्ट्रक्चर से संबंधित आठ मुख्य क्षेत्रों में फरवरी में वृद्धि 6.7 प्रतिशत रही, जो तीन माह में सर्वाधिक है. ऐसा लगता है कि बीते वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर आठ प्रतिशत के आसपास रहेगी. विभिन्न वित्तीय एवं रेटिंग एजेंसियों के साथ-साथ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी ऐसी आशा जतायी है. अर्थव्यवस्था के आकार दर्शाने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर संग्रहण में उल्लेखनीय बढ़ोतरी.

फरवरी में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का संग्रहण 1.7 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया, जो फरवरी 2023 की तुलना में 12.5 प्रतिशत अधिक है. जीएसटी ई-वे बिल का संग्रहण भी 18.9 प्रतिशत बढ़ा है. इसी प्रकार आयकर और कॉर्पोरेट कर संग्रहण में भी उत्साहजनक बढ़ोतरी दर्ज की गयी है. ये आंकड़े इंगित करते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था न केवल महामारी के साये से बाहर निकल चुकी है, बल्कि भू-राजनीतिक संकटों तथा वैश्विक संघर्षों का भी असर भी न के बराबर रहा है. अन्य अर्थव्यवस्थाओं के संदर्भ में ऐसा नहीं कहा जा सकता है. कर संग्रहण बढ़ने का सीधा अर्थ है कि औद्योगिक एवं आर्थिक गतिविधियों में लगातार तेजी आ रही है.

इस स्थिति में भविष्य को लेकर लोगों में आशा का बढ़ना स्वाभाविक है. इसका संकेत हमें व्यक्तिगत ऋण, सेवा क्षेत्र, कृषि आदि क्षेत्रों के विकास से मिलता है. रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि बैंकों के ऋण में वृद्धि की दर 20.5 प्रतिशत बनी हुई है. विभिन्न कारणों से मुद्रास्फीति एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है, पर कुछ महीने से इस मोर्चे पर राहत की स्थिति है. इसी कारण से ऐसी उम्मीद जतायी जा रही है कि आगामी महीनों में ब्याज दरों में कटौती की जा सकती है. चालू घाटा खाता संतोषजनक है तथा बाहर कार्यरत भारतीयों ने अपनी कमाई के रूप में 31.4 अरब डॉलर की राशि भेजी है. सेवा क्षेत्र के निर्यात में मुनाफा बना हुआ है. बाहरी निवेशक भी भारत पर भरोसा जता रहे हैं. इन कारकों के चलते हमारा विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 650 अरब डॉलर के स्तर पर है. यदि मुद्रास्फीति पर नियंत्रण हो जाए तथा आर्थिक लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे, तो अर्थव्यवस्था को और गति मिल सकती है.

विज्ञापन
संपादकीय

लेखक के बारे में

By संपादकीय

संपादकीय is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola