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घरेलू निवेशकों से मजबूत होती भारतीय अर्थव्यवस्था

Updated at : 12 Nov 2024 6:45 AM (IST)
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Indian Economy

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Indian Economy : शेयर बाजार में निवेश करने के मामले में बिहार शीर्ष 10 राज्यों में आ गया है. सूची में महाराष्ट्र के बाद उत्तरप्रदेश 1.96 करोड़ निवेशकों के साथ दूसरे स्थान पर है.

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Indian Economy : शेयर बाजार में घरेलू निवेशकों का दबदबा तेजी से बढ़ रहा है. दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के अतिरिक्त जयपुर, इंदौर, राजकोट, पुणे, हैदराबाद, अहमदाबाद, पटना जैसे शहर भी घरेलू निवेशकों के गढ़ बन रहे हैं. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़े बताते हैं कि सालाना आधार पर बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और राजस्थान में घरेलू निवेशकों की संख्या में सबसे अधिक वृद्धि हुई है.

शेयर बाजार में निवेश करने के मामले में बिहार शीर्ष 10 राज्यों में आ गया है. सूची में महाराष्ट्र के बाद उत्तरप्रदेश 1.96 करोड़ निवेशकों के साथ दूसरे स्थान पर है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार मई, 2024 में दिल्ली में 1.93 लाख और मुंबई में 71.5 हजार नये निवेशकों ने डीमैट खाता खुलवाया. वहीं, बेंगलुरु में डीमैट खाता खोलने वाले निवेशकों की संख्या 25.8 हजार, पुणे में 25.5 हजार, सूरत में 22.8 हजार, अहमदाबाद में 21.7 हजार, जयपुर में 19.9 हजार और नागपुर में 14.1 हजार रही.

2023 में निवेशकों की संख्या में वृद्धि सबसे अधिक बिहार में हुई


नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, सालाना आधार पर शेयर बाजार में निवेश करने वाले निवेशकों की संख्या 2023 में सबसे अधिक 49.40 प्रतिशत बिहार में बढ़ी, जिसे मिलाकर आज कुल 71.9 लाख बिहार के निवेशक निवेश कर रहे हैं, वहीं 47.80 प्रतिशत की वृद्धि के साथ उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर रहा. यहां 1.96 करोड़ निवेशक शेयर बाजार से जुड़े हैं. वहीं 39.10 प्रतिशत की वृद्धि के साथ पश्चिम बंगाल तीसरे स्थान पर है. यहां 1.01 करोड़ निवेशक शेयर बाजार से जुड़े हैं.

दूसरे राज्यों, मसलन महाराष्ट्र में निवेशकों की संख्या 3.34 करोड़ है और 2023 में यहां सालाना आधार पर नये निवेशकों की संख्या में 25.70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. गुजरात में निवेशकों की संख्या 1.67 करोड़ है और सालाना आधार पर 2023 में निवेशकों की संख्या में 26.60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. राजस्थान में निवेशकों की संख्या 1.07 करोड़ है और यहां 2023 में सालाना आधार पर निवेशकों की संख्या में 37.60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. कर्नाटक में निवेशकों की संख्या 96.2 लाख है, सालाना आधार पर 2023 में यहां निवेशकों की संख्या में 28.90 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई.

मध्यप्रदेश में निवेशकों की संख्या 94.0 लाख

मध्यप्रदेश में निवेशकों की संख्या 94.0 लाख है और सालाना आधार पर यहां निवेशकों की संख्या में 2023 में 37.70 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. तमिलनाडु में निवेशकों की संख्या 86.6 लाख है और सालाना आधार पर यहां निवेशकों की संख्या में 2023 में 25.60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. भारत में निवेशकों का सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (एसआइपी) में निवेश 8,183 करोड़ रुपये से ढाई गुना बढ़कर 20,904 करोड़ रुपये हो गया है. गांव और कस्बाई इलाकों और छोटे शहरों में भी एसआइपी में निवेश करने का चलन बढ़ा है. लोग परंपरागत निवेश को छोड़ म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं. विश्लेषण से यह भी पता चलता है कि प्रमुख शहरी क्षेत्रों या महानगरों में नये निवेशकों की संख्या तेजी से नहीं बढ़ी है. जबकि छोटे शहरों और कस्बाई इलाकों में निवेशकों की संख्या में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है, जिससे निवेश में तेजी आयी और विदेशी निवेश पर निर्भरता कम हुई है.

देश में परंपरागत निवेश के पैटर्न में बदलाव आया


देश में परंपरागत निवेश के पैटर्न में बदलाव आने के कारण मौजूदा समय में बैंकों में जमा की किल्लत हो रही है. इस संबंध में बैंकों ने जमा के मामले में दोहरी गलती की है. पहली, जमा बढ़ाने के लिए आकर्षक योजनाएं चलाना बंद कर दिया और दूसरी, बैंक डिपॉजिट का इस्तेमाल म्युचुअल फंड और बीमा कारोबार को बढ़ाने में किया जाने लगा. बैंक कर्मचारी ग्राहकों को म्युचुअल फंड और बीमा में अधिक प्रतिफल मिलने का लालच देने लगे. इसकी वजह से ग्राहक मियादी और बचत खाते से निकासी कर म्यूचुअल फंड और बीमा में निवेश करने लगे.

कालांतर में अधिक कर वसूलने या राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए बचत और आवृत्ति जमा पर मिलने वाले ब्याज को सरकार ने कर योग्य बना दिया और शुरुआती दौर में सस्ती पूंजी उपलब्ध होने के कारण मियादी जमा पर मिलने वाले ब्याज दर में बैंकों द्वारा उल्लेखनीय कटौती की गयी, जिससे ग्राहक बैंक जमा योजनाओं में निवेश करने से परहेज करने लगे. डिपॉजिट की समस्या का एक कारण बैंकों द्वारा इकठ्ठा की गयी जमाराशि का एक हिस्सा विनियामक आवश्यकताओं, जैसे नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) और सांविधिक तरलता अनुपात (एसएलआर) के लिए अलग से रखना है, जिससे उधार देने योग्य राशि कम हो गयी है.


हाल ही में ब्लूमबर्ग ने शेयर बाजार में नये निवेशकों की बढ़ती संख्या को लेकर एक सर्वे करवाया था, जिसके अनुसार चालू कैलेंडर वर्ष की दूसरी छमाही में भारतीय शेयर बाजार में अमेरिका से ज्यादा प्रतिफल मिल सकता है. वर्ष 2014 के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था निरंतर मजबूत हो रही है, जिस कारण शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेशकों को आकर्षक प्रतिफल मिल रहा है. इस कारण लोग शेयर बाजार में निवेश करने को प्राथमिकता दे रहे हैं. (ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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सतीश सिंह

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By सतीश सिंह

सतीश सिंह is a contributor at Prabhat Khabar.

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