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टीबी का उन्मूलन

Updated at : 12 Sep 2022 8:29 AM (IST)
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टीबी का उन्मूलन

तपेदिक यानी टीबी एक गंभीर वैश्विक बीमारी है. अनुमान है कि दुनिया की एक-तिहाई आबादी टीबी के बैक्टिरिया से संक्रमित है, जिसमें केवल पांच से पंद्रह फीसदी लोग ही बीमार पड़ते हैं. शेष संक्रमितों को न तो टीबी की बीमारी होती है और न ही उनके जरिये यह संक्रमण दूसरों में फैलता है.

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तपेदिक यानी टीबी एक गंभीर वैश्विक बीमारी है. अनुमान है कि दुनिया की एक-तिहाई आबादी टीबी के बैक्टिरिया से संक्रमित है, जिसमें केवल पांच से पंद्रह फीसदी लोग ही बीमार पड़ते हैं. शेष संक्रमितों को न तो टीबी की बीमारी होती है और न ही उनके जरिये यह संक्रमण दूसरों में फैलता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2020 में दुनियाभर में लगभग एक करोड़ लोग तपेदिक के शिकार हुए थे और 15 लाख लोगों की मौत हो गयी थी.

साल 2019 में भारत में 24 लाख से अधिक मरीजों की तादाद दर्ज की गयी थी. इस हिसाब से देखें, तो भारत में टीबी के सर्वाधिक रोगी हैं. बीमार व्यक्ति से इसका संक्रमण फैलने का खतरा भी रहता है. इस बीमारी से मुक्ति के प्रयास वर्षों से हो रहे हैं. इस क्रम में भारत सरकार ने एक विशेष कार्यक्रम ‘प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान’ की शुरुआत की है. इसके तहत 2025 तक देश को टीबी से पूरी तरह छुटकारा दिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस अभियान का शुभारंभ करते हुए इसमें शामिल होने के लिए पूरे देश का आह्वान किया है. उन्होंने कहा है कि जब जनहित में कोई कल्याणकारी योजना बनायी जाती है, तो उसकी सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है.

टीबी और इसके निदान से संबंधित जानकारी देने के लिए एक विशेष वेबसाइट ‘नि-क्षय मित्र’ बनायी गयी है. राष्ट्रपति मुर्मू ने निर्वाचित जन-प्रतिनिधियों, उद्योग जगत, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा नागरिकों से निवेदन किया है कि वे इस पहल में दान करें ताकि रोगियों को सफल उपचार मुहैया कराया जा सके. उल्लेखनीय है कि 2017 में एक राष्ट्रीय रणनीति तैयार की गयी थी, जिसके तहत 2025 तक इस खतरनाक बीमारी से मुक्ति का लक्ष्य तय किया गया था. इस प्रयास में राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम को भी सशक्त बनाया गया है. अनेक दशकों की कोशिशों तथा हाल के वर्षों में अधिक ध्यान दिये जाने से इस मोर्चे पर लगातार उपलब्धियां हासिल हुई हैं.

सरकारी चिकित्सा केंद्रों पर टीबी का इलाज निशुल्क होता है. यह बीमारी असाध्य नहीं है और इसका उपचार संभव है. महामहिम राष्ट्रपति ने उचित ही रेखांकित किया है कि इसके बारे में अधिक जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है. कई बार लोग टीबी के लक्षणों को सामान्य स्वास्थ्य समस्या मानकर उनकी अनदेखी कर देते हैं. ऐसे में संक्रमण के बढ़ने और फैलने का खतरा पैदा हो जाता है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और आयुष्मान भारत जैसी अनेक पहलों से स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हो रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी नीतियों और योजनाओं के केंद्र में नागरिकों को रखने से इनका प्रभाव भी संतोषजनक है. आशा है कि हमारा देश कुछ वर्षों में तपेदिक के साये से बाहर निकल जायेगा.

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