संक्रमण में कमी

Author : संपादकीय Published by : Prabhat Khabar Updated At : 05 May 2021 11:15 AM

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संतोष की एक बड़ी वजह यह है कि दूसरी लहर से सबसे अधिक प्रभावित महाराष्ट्र में महामारी के तेवर शिथिल पड़ते दिख रहे हैं. अभी देश में सक्रिय कोरोना मामलों की संख्या दो करोड़ से अधिक है और हर रोज हजारों लोगों की जानें जा रही हैं. बीते पंद्रह दिन में ही 50 लाख से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं. अमेरिका के बाद भारत ही एकमात्र देश है, जहां दो करोड़ से अधिक लोग संक्रमण का शिकार हुए हैं.

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संतोष की एक बड़ी वजह यह है कि दूसरी लहर से सबसे अधिक प्रभावित महाराष्ट्र में महामारी के तेवर शिथिल पड़ते दिख रहे हैं. अभी देश में सक्रिय कोरोना मामलों की संख्या दो करोड़ से अधिक है और हर रोज हजारों लोगों की जानें जा रही हैं. बीते पंद्रह दिन में ही 50 लाख से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं. अमेरिका के बाद भारत ही एकमात्र देश है, जहां दो करोड़ से अधिक लोग संक्रमण का शिकार हुए हैं.

ऐसे में संक्रमितों की रोजाना तादाद में मामूली कमी भी हमें हौसला देती है कि इस महामारी से जारी जंग में हमारी जीत होगी. इससे यह भी भरोसा मजबूत होता है कि महामारी की रोकथाम के लिए हो रहे उपायों का असर हो रहा है. लेकिन, जैसा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है, ये केवल शुरुआती संकेत हैं और हर स्तर पर किये जा रहे उपायों को जारी रखने की जरूरत है. बीते कुछ सप्ताह से कोविड-19 के संक्रमण से गंभीर रूप से बीमार होनेवाले लोगों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है, जिसके कारण हमारा स्वास्थ्य तंत्र भारी दबाव में है.

ऐसे में यदि संक्रमण में कुछ कमी भी आती है, तो उससे राहत मिलने की गुंजाइश अभी नहीं है. चिंताजनक यह भी है कि बिहार, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल में संक्रमण के बढ़ने का सिलसिला जारी है. कुछ अन्य हिस्सों में भी महामारी पैर पसारने की कोशिश में है. दिल्ली जैसी कुछ जगहों पर, जहां संक्रमण कुछ कम होता दिख रहा है, वहां मौतों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है. इससे स्पष्ट है कि वायरस की भयावहता में कोई कमी नहीं हो रही है.

सरकारों को जांच की गति बढ़ाने और जल्दी रिपोर्ट देने पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि महामारी की असली तस्वीर हमारे सामने रहे. आंकड़ों को दबाने-छुपाने या जांच प्रक्रिया में लापरवाही व देरी महामारी से लड़ने की कोशिशों पर पानी फेर सकती है क्योंकि वायरस के नये रूपों की आक्रामकता पहले से कहीं अधिक है.

किसी भी स्तर पर, चाहे सरकारें हों या आम लोग, कोई भी चूक हमें भारी पड़ सकती है. पहले चरण के बाद की लापरवाहियों और महामारी से जीत जाने के भ्रम का खामियाजा आज सभी भुगत रहे हैं. हमें अपने अनुभवों से सीख लेते हुए विशेषज्ञों की सलाह पर पूरी तरह अमल करना होगा. यदि हम सही ढंग से महामारी से लड़ेंगे, तो देर-सबेर जीत हमारी ही होगी.

किसी भी स्तर पर, चाहे सरकारें हों या आम लोग, कोई भी चूक हमें भारी पड़ सकती है. पहले चरण के बाद की लापरवाहियों और महामारी से जीत जाने के भ्रम का खामियाजा आज सभी भुगत रहे हैं. हमें अपने अनुभवों से सीख लेते हुए विशेषज्ञों की सलाह पर पूरी तरह अमल करना होगा. यदि हम सही ढंग से महामारी से लड़ेंगे, तो देर-सबेर जीत हमारी ही होगी.

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