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बाइडेन के अनुकूल हो रहीं परिस्थितियां

By संपादकीय
Updated Date
फाइल फोटो

जे सुशील

अमेरिका में स्वतंत्र शोधार्थी

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए हुए मतदान के करीब बीस दिनों के बाद आखिरकार सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को मंजूरी मिल गयी है. वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट कर के कहा है कि वे जो बाइडेन प्रशासन के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन चुनाव परिणामों के खिलाफ उनका अभियान जारी रहेगा. ये बयान विरोधाभासी भले ही लग रहे हों, लेकिन अमेरिकी लोकतंत्र के लिए इसे सकारात्मक माना जाना चाहिए.

अमेरिकी सिस्टम में नवंबर महीने में हुए चुनावों के बाद बीस जनवरी तक का समय सत्ता के हस्तांतरण का समय होता है. इसी अवधि में वर्तमान राष्ट्रपति के पास जो भी जानकारियां होती हैं, वो सारी जानकारियां नव-निर्वाचित राष्ट्रपति को मुहैया करायी जाती हैं. फिर इसी जानकारी के आधार पर निर्वाचित राष्ट्रपति अपनी आगे की रणनीति तय करते हैं और बीस जनवरी से सीधे काम-काज शुरू हो जाता है.

आधिकारिक तौर पर हस्तांतरण की इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से से चलाने की जिम्मेदारी जनरल सर्विस एडमिनिस्ट्रेशन नाम की सरकारी संस्था करती है. इस संस्था की प्रमुख ने जो बाइडेन को चिट्ठी लिखी है कि अब हस्तांतरण का काम शुरू किया जाये. इसका सबसे बड़ा कारण मिशिगन और पेनसिल्वेनिया में जो बाइडेन की जीत की औपचारिक घोषणा को माना जा रहा है. दोनों ही जगहों पर डोनाल्ड ट्रंप कैंप ने कोर्ट में मामले दायर किये थे, लेकिन अब उन मामलों को खारिज कर दिया गया है.

मिशिगन में रिपब्लिकन सदस्यों ने भी माना है कि आंकड़ों के अनुसार डोनाल्ड ट्रंप हार गये हैं और अब उन्हें चुनाव परिणाम स्वीकार कर लेना चाहिए. डोनाल्ड ट्रंप भले ही हार मानने को अभी भी तैयार नहीं हैं, लेकिन रिपब्लिकन पार्टी के कई नेता भी अब चाहते हैं कि ट्रंप सम्मान के साथ पद से विदा हों. राष्ट्रपति चुनाव लड़ चुके मिट रोमनी ने कड़े शब्दों में ट्रंप की निंदा भी की है, जबकि कई अन्य सीनेटरों ने विनम्रता से अपील की है कि देशहित में डोनाल्ड ट्रंप अपनी हार स्वीकार कर लें.

इस बीच करीब सौ बिजनेस घरानों ने भी ट्रंप प्रशासन को चिट्ठी लिख कर कहा था कि सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को शुरू किया जाये, ताकि देश में अनिश्चितता का माहौल खत्म हो. ऐसा माना जा रहा है कि बिजनेस घरानों की इस चिट्ठी के कारण डोनाल्ड ट्रंप सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को मंजूरी देने को लेकर बहुत दबाव में थे. अगर वो ऐसा नहीं करते तो भी सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हो जाती और ऐसे में ट्रंप की जगहंसाई भी होती.

फिलहाल ट्रंप के लिए समर्थन दिन-प्रतिदिन कम होता जा रहा है और अमेरिका में लोग मान रहे हैं कि जो हुआ सो हुआ और अब डोनाल्ड ट्रंप को हार मान लेनी चाहिए. हालांकि अमेरिकी मीडिया में ऐसी भी खबरें हैं कि ट्रंप सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं, लेकिन उसके लिए अभी कई औपचारिकताएं पूरी होनी हैं. फिलहाल ट्रंप की टीम को किसी भी तरह की कानूनी लड़ाई में सफलता नहीं मिली है और ऐसी स्थिति में मुश्किल है कि सुप्रीम कोर्ट से उन्हें कोई राहत मिले.

पिछले कुछ महीनों में ये आशंका जतायी गयी थी कि ट्रंप समर्थक सड़कों पर निकल जायेंगे और देश में गृहयुद्ध जैसी स्थिति बन जायेगी. ऐसी आशंकाएं अब नहीं हैं. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी मीडिया के जिम्मेदार रवैये और सरकारी संस्थानों की स्वायतत्ता को माना जाना चाहिए. अमेरिका के ट्रंप विरोधी चैनल हों या समर्थक, सभी ने बहुत ही जिम्मेदारी से चुनाव परिणामों की रिपोर्टिंग की है और बार-बार कहा है कि इस बारे में आधिकारिक घोषणाओं का इंतजार किया जाये.

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार फॉक्स न्यूज की खबरें शेयर करते रहे हैं, लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद जब फॉक्स ने भी जो बाइडेन को जीता हुआ माना, तो ट्रंप फॉक्स से खासे नाराज दिखे. ट्रंप पिछले कई दिनों से दक्षिणपंथी वेबसाइट ब्रिटबैट की खबरें शेयर करते रहते हैं.

वहीं दूसरी तरफ जो बाइडेन के खेमे में गंभीरता से काम शुरू कर दिया गया है. बाइडेन ने अपने वादों के मुताबिक, नियुक्तियां शुरू कर दी हैं और कई नियुक्तियों में से एक में जॉन कैरी को जलवायु परिवर्तन संबंधी विभाग का प्रमुख बनाया गया है. विदित हो कि जलवायु परिवर्तन संबंधी कैबिनेट अपने आप में नयी बात है. हालांकि जॉन कैरी लंबे समय से इस दिशा में काम करते रहे हैं. पूर्व में विदेशमंत्री रहे जॉन कैरी जलवायु परिवर्तन से जुड़े पेरिस समझौते में अमेरिका की अगुवाई कर चुके हैं.

ट्रंप ने अमेरिका को इस समझौते से अलग कर लिया था. इसके अतिरिक्त, जो बाइडेन ने अपनी कैबिनेट में कई महिलाओं को भी स्थान दिया है. संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका का प्रतिनिधित्व करने के लिए उन्होंने एक अश्वेत महिला को चुना है, जो लंबे समय तक विदेश सेवा में काम कर चुकी हैं.

जो बाइडेन के लिए अगले वर्ष की सबसे बड़ी चुनौती अर्थव्यवस्था और कोरोना वायरस दोनों से ही निबटने की रहने वाली है, लेकिन लग रहा है कि किस्मत इस समय जो बाइडेन के साथ है. अमेरिका की दो कंपनियों फाइजर और मॉडेरना ने वैक्सीन की घोषणा की है. ऐसा माना जा रहा है कि ये दोनों वैक्सीन मार्च के महीने तक आम लोगों के लिए सुलभ हो सकती हैं. अगर ऐसा हुआ तो बाइडेन प्रशासन के लिए ये एक अच्छी खबर होगी.

फिलहाल अमेरिकी जनता चैन की सांस ले रही है कि कम-से-कम एक ऐसा राष्ट्रपति तो आ रहा है, जो कोई क्रांतिकारी कदम न भी उठाए, पर कम-से-कम बेवजह के ट्वीट तो नहीं करेगा. पिछले चार वर्षों में तेजी से बढ़ी अमेरिकी अर्थव्यवस्था में इस समय कोई आधारभूत समस्या नहीं है और वैक्सीन के आते ही अर्थव्यवस्था के भी पटरी पर बहुत तेजी से लौटने की संभावना व्यक्त की जा रही है.

ऐसे में जरूरत है कि लोग संयम बरतें और इंतजार करें. बाइडेन प्रशासन भी फिलहाल इसी कोशिश में है कि बिना किसी बड़े उलटफेर के वैक्सीन तय समय में आ जाये, ताकि आगे फिर जलवायु परिवर्तन और माइग्रेशन जैसी बड़ी समस्याओं को लेकर सरकार काम कर सके और इसके लिए आगे की नीतियों पर ध्यान दे सके.

posted by : sameer oraon

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