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Diwali : अंधकार में एक दीया अंतर्मन में

Updated at : 31 Oct 2024 7:22 AM (IST)
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Diwali

Diwali : रोशनी अर्थात प्रकाश का एहसास, यही जिंदगी और ब्रह्मांड के शाश्वत शिल्प का दृश्य है. जिंदा रहने का यह दृश्य मन को अलौकिक रोशनियों के पार ले जाता है.

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Diwali : दीयों की एक शृंखला जिंदगी के जिंदा होने की रोशनी देती है. दीये की रोशनी जिंदगी में नये उत्साह एवं उमंग का प्रतीक है. हमारे जीवन का शाश्वत सत्य यह है कि हमें अंधकार को भी कभी नहीं भूलना चाहिए क्योंकि अंधकार है, तो रोशनी का वह जलवा है, जो जिंदगी को नयी रोशनी के समंदर की ओर ले जाता है. हमारी आदि संस्कृति में रोशनी जीवन का प्रतीक है, तो अंधेरा उस स्थायीपन का प्रतिनिधित्व करता है, जो जिंदगी का दूसरा पहलू है. रोशनियों के इस उत्सव में यहां पर उसके आने-जाने का ब्रह्मांड की नीति का मौसम है.

रोशनी अर्थात प्रकाश का एहसास, यही जिंदगी और ब्रह्मांड के शाश्वत शिल्प का दृश्य है. जिंदा रहने का यह दृश्य मन को अलौकिक रोशनियों के पार ले जाता है. घरों की मुंडेरों एवं दहलीजों पर जब सैकड़ों दीये जलते हैं, तो पूरी प्रकृति और यह धरती रोशनी से प्रकाशमान होकर खुशियों से भर जाती है. सच्चाई यही है कि यही जिंदगी का उत्सव है. यही जलते हुए दीये जिंदा रहने का उत्सव हैं और रोशनी से भरा हुआ यह सब कुछ हमारा वह लम्हा है, जिसको हम उत्सव के साथ अंतर्मन से प्रकाशमान हुए जीना चाहते हैं.


इन रंगीन सांस्कृतिक ध्वनियों में सप्तरंगी अलौकिक लौ से भरी दुनिया में एक शाश्वत सच्चाई अंधेरे की भी है. अंधकार के खिलाफ एक दीया जलाओ, तो रोशनी भर जाती है और आंगन प्रकाशमान हो जाता है. अंधेरे के खिलाफ रोशनी का यह जलवा अभिभूत करने वाला दृश्य है और यही प्रकृति और ब्रह्मांड का नियम है. अपने जीवन की व्यस्तता से कुछ पल निकाल कर इस बार अपने अंतर्मन के दीये भी रोशन कर दें ताकि अपना अंतर्मन भी रोशनी से प्रकाशमान हो जाए. यही आदमी के जिंदा रहने का एक नया योग है. रोशनियों का अद्भुत योग और अंधेरे का योग- यह जिंदगी का रोशनीयुक्त प्रकाशमान नये रास्तों का नयी मंजिलों और उमंगों से भरा हुआ परिचय है.

अपने समूचे जीवन की परिक्रमा में अंतर्मन में जगे हुए दीये रोशनियों की एक नयी परिकल्पना और जिंदगी के नये रास्तों को रोशनी से जगमगा कर गढ़ते हुए जिंदगी की नयी यात्रा का आह्वान करते हैं. ओशो ने एक बार एक दर्शन सभा में कहा था, ‘हमारे आसपास प्रकृति और मंदिरों पर घरों को रोशन करते हुए बहुत दीये जगा लिये, अब स्वयं से दोस्ती करते हुए अपने तन-मन के दीये भी जगायें.’ यह अंतर्मन उस भक्तिमय बाती की भांति है, जो सदैव तेल में डूबी रहती है और एक लौ की प्रखंड एवं प्रचंड धारा ऊपर की तरफ उठती है, जिसमें जीवन का रस समाया हुआ है, और यह धारा निस्वार्थ जिंदगी के रास्तों को रोशन करती रहती है. मौसमों की इस धरा और धारा में अमावस के अंधकार के नीचे जिंदगी है, ऊपर रोशनी है.


रोशनी और अंधकार के इस समावेश में अपने लिए रोशनी की तलाश में भटकते हुए, आइए, एक सकारात्मक ऊर्जा का दीप अपने नाम और अपने अंतर्मन में भी जगा कर तो देखें. एक दिव्य सौंदर्यबोध आपको वहां मिलेगा, जहां पहले शून्य था और शून्य अंधकार पैदा करता है. अंधकार की अवधारणा में ही है रोशनी का वह समंदर, जो हमारे सामने है. तो, फिर क्यों न चलिए आज के दिन रोशनियों के इस ब्रह्मांड में इस त्योहार रोशनी में नहाते हुए अपने अंतर्मन में भी एक दिया जगा कर उन रोशनियों को साकार करें, जो जीवन को भर देती हैं उल्लास के साथ.

उत्सव की तरंगों की ध्वनियों के साथ और उन आवाजों एवं संदेशों के साथ, जिसमें रोशनी आगे बढ़ती है और जिंदगी की हंसी, ठिठोली और खुशियों से भरी हुई जीवन की ऊंचाइयों की ओर ले जाती है, और वे दरवाजे, जो अंतर्मन की अलौकिक रोशनी के हैं, अकस्मात खुल जाते हैं. इसलिए, अपने अंतर्मन में एक दिया जगा कर तो देखें! दीपावली में संध्या से रात्रि तक रोशनी से सर्वत्र जगमगा उठता है और अंतर्मन भी नहा जाता है. जिंदगी को नये रंगों से सराबोर देखना सुखद होता है. जगमगाती हुई यह दुनिया सेटेलाइट से देखें, हर कोना प्रकाशमान दिखता है. ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि हमारे यहां रहने वाले लोग क्यों नहीं अपने मन में एक बार फिर से अंतर्मन की रोशनियों से भरी दुनिया को रचनात्मक ऊर्जा की रोशनी से जगमगाते हैं.


हमारी विरासत, धरोहर और संस्कृति में यह सच है कि दुनिया को बदलने का तरीका यही है कि सूरज के समक्ष अपने-आप को रोशनियों से भर दो, तो यह दुनिया आपके पांव में होगी. तो चलिए, आप इस भौतिकवादी संरचना के साथ भी अपने अंतर्मन की आवाज सुनते हुए एक दिया अपने नाम इस अंधेरे के खिलाफ जगायें कि हर कोने में ऊर्जा का नया समंदर लहरों से भरा किनारे को ढूंढता हुआ आपको रेत की ओर लेकर जाए, जहां से सूर्य के उजाले की यात्रा शुरू होती है. इसलिए अपने अंतर्मन के दीये को सदैव प्रज्वलित रखें. रोशनी का एक ऐसा चौमुखी दीया हो, जिसमें जिंदगी मुस्कुराती है और रोशनी की अनंत लहरें आपको दूर तक ले जाती हैं, जहां पर जीवन है, जहां पर जिंदगी है. इस अंधेरे में अपने नाम एक दीया जगाकर तो देखें, आपका अंतर्मन खिलखिला उठेगा.
(ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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डॉ कृष्ण कुमार रत्तू

लेखक के बारे में

By डॉ कृष्ण कुमार रत्तू

डॉ कृष्ण कुमार रत्तू is a contributor at Prabhat Khabar.

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