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इंदौर में दूषित पानी से मौतें

Updated at : 02 Jan 2026 6:10 AM (IST)
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Contaminated water Death

इंदौर में दूषित पानी से मौतें

Contaminated water Death: इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतें चिंताजनक हैं. हालांकि अब प्रशासन ने आपातकालीन उपाय तेज कर दिये हैं. इस हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई तो ठीक है, लेकिन इस पर भी ध्यान देना होगा कि ऐसी जानलेवा लापरवाही दोबारा न हो.

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Contaminated water Death: पिछले कई वर्षों से राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण में देश के सबसे स्वच्छ शहर का दर्जा प्राप्त इंदौर में दूषित पेयजल के सेवन से हुई मौतें स्तब्ध करती हैं. दरअसल शहर की भागीरथपुरा पुलिस चौकी के शौचालय के ठीक नीचे नर्मदा की मुख्य पाइपलाइन में बड़ा रिसाव हुआ था. रिसाव के कारण गंदा पानी सीधे नर्मदा की सप्लाई लाइन में मिल रहा था, जिससे पूरे वार्ड में दूषित पानी पहुंच गया. शौचालय के नीचे हुए रिसाव के अलावा भी कई जगह रिसाव हुए थे. पर स्वच्छ जलापूर्ति की जिम्मेदारी जिन पर थी, वे समय रहते इसका पता नहीं लगा सके थे. नतीजतन वार्ड के लोग वही दूषित पानी पी रहे थे.

यह मामला तब सामने आया, जब 25 दिसंबर को स्थानीय लोगों ने पानी में असामान्य गंध की शिकायत की. बताया तो यह भी जा रहा है कि इलाके में पेयजल की समस्या पिछले कई महीने से बनी हुई थी. लेकिन स्थानीय लोगों ने गंदे पानी की शिकायत जब स्थानीय पार्षद से की थी, तो उन्होंने उसे गंभीरता से नहीं लिया, उल्टे उन्हें धमका कर भगा दिया था. सात मौतों के बाद एक पत्रकार द्वारा सवाल पूछे जाने पर स्थानीय विधायक के आक्रामक रवैये से भी इस तथ्य की पुष्टि ही होती है.

दूषित पानी पीने से लोगों को उल्टी-दस्त हुए. दस्त को मौत की वजह बताया जा रहा है. मृतकों में छह महिलाएं और छह महीने का एक बच्चा है. साफ है कि यह मामला सार्वजनिक होने और दूषित पानी से मौतों को लेकर हो रही आलोचनाओं के बीच राज्य सरकार ने आपातकालीन उपाय तेज कर दिये. पिछले एक सप्ताह में भागीरथपुरा क्षेत्र के 100 से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती भी कराया गया है. हालांकि अब रिसाव ठीक कर दिया गया है, उस शौचालय को तोड़ दिया गया है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की गयी है.

तीन सदस्यीय एक जांच समिति भी गठित की गयी है, जो हादसे की जांच के अलावा विगत अगस्त में क्षेत्र के लिए नयी पानी सप्लाई लाइन के टेंडर में हुई देरी की भी जांच करेगी. इस मामले में जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के बाद मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने जहां सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है, वहीं प्रशासन को पीड़ितों के नि:शुल्क इलाज और क्षेत्र में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिये हैं. प्रशासनिक लापरवाही से हादसा कहीं भी हो सकता है, लेकिन उस स्थिति में भी सत्ता का रौब दिखाना शर्मनाक है.

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