भारत की बलूच नीति

हर कोई चाह रहा था कि भारत भी पाकिस्तान के साथ जैसे को तैसा के तर्ज पर जवाब दे, मगर जिस तरह से जवाब दिया गया वह शायद भारत के लिए नुकसानदेह साबित होगा़ लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री जी ने बलूचिस्तान का जिक्र किया़ इस बाबत बलोच पृथकतावादियों द्वारा प्रधानमंत्री का शुक्रिया अदा […]
हर कोई चाह रहा था कि भारत भी पाकिस्तान के साथ जैसे को तैसा के तर्ज पर जवाब दे, मगर जिस तरह से जवाब दिया गया वह शायद भारत के लिए नुकसानदेह साबित होगा़ लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री जी ने बलूचिस्तान का जिक्र किया़ इस बाबत बलोच पृथकतावादियों द्वारा प्रधानमंत्री का शुक्रिया अदा करने के वीडियो तमाम खबरिया चैनलों पर चलने लगे़
हम में से ज्यादार लोग यह मान रहे हैं कि यह रहा कश्मीर का बदला़ जबकि ऐसा बयान सोच-विचार देना चाहिए था, क्योंकि इससे पाकिस्तान का इरादा और मजबूत होगा़ पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय जगत में प्रचारित करेगा़ वह कहेगा कि हम तो पहले से ही कहते थे कि बलूच आंदोलन के पीछे भारत का हाथ है़ अब जब भारतीय प्रधानमंत्री ने स्वयं इसे स्वीकार किया, इसका अर्थ हुआ कि वहां जो भी पृथकतावादी गतिविधि चल रही है उसमें भारत की सहमति है. इस हरकत से दुनिया का ध्यान हमारी ओर जायेगा़
जंग बहादुर सिंह, ई-मेल से
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